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किसानों का चीनी मिलों पर 29.80 करोड़ बकाया
बदायूं, ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jun 2016 12:07 AM IST
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सूखा, ओलावृष्टि, बाढ़ समेत तमाम दैवीय आपदा झेलने के बाद खेतों में खून पसीना एक करके गन्ना पैदा करने वाले किसानों का करोड़ों बकाया चीनी मिल दबाए बैठी हैं, किसान अपने ही बकाए के भुगतान के लिए मिलों के चक्कर काट रहा है, वहां से उसे रोजाना नई तारीख बताकर वापस भेज दिया जाता है। गन्ना विभाग और प्रशासन भी इसके प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहा है। इसी वजह से कुछ चीनी मिलों ने अब तक महज 20 फीसदी गन्ना बकाए का भुगतान किया है।
जिले में उत्पादित हुए लाखों क्विंटल गन्ने को जिले की दो चीनी मिलों के साथ गैर जनपदों की चार और चीनी मिलों को बेचा गया है। शासन के आदेश थे कि चीनी मिल 230 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना मूल्यों का भुगतान क्रय तिथि के 14 दिनों के अंदर करेंगे, लेकिन किसी भी चीनी मिल ने इन नियमों का पालन नहीं किया। शेष 50 रुपये प्रति क्विंटल की धनराशि का भुगतान चीनी मिल बंद होने के तीन महीनों के अंदर किया जाना है, लेकिन अभी तक 230 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों का 2980 लाख रुपये बकाया है।
इसमें सबसे ज्यादा लापरवाही करीमगंज चीनी मिल ने बरतते हुए केवल 20 फीसदी बकाया ही भुगतान किया है। अन्य मिलों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। इनमें फरीदपुर चीनी मिल ने 280 रुपये के हिसाब से गन्ना किसानों का पूरा बकाया भुगतान कर दिया है, जबकि रजपुरा चीनी मिल 230 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान कर चुका है।
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किसानों का बकाया भुगतान न होने की वजह से उन लोगों को तमाम परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। भाकियू कार्यकर्ता भी किसानों के बकाए भुगतान के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन ने चीनी मिलों को केवल नोटिस ही भेजे हैं। हां, प्रदेश सरकार के आदेश के बाद से मिलों ने 30 जून तक 90 फीसदी भुगतान न करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ आरसी जारी करने का तय कर लिया है।
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चीनी मिल बकाया भुगतान फीसदी
1. शेखूपुर चीनी मिल 292.04 लाख 63 फीसदी
2. बिसौली शुगर मिल 1561.45 लाख 72 फीसदी
3. रजपुरा चीनी मिल 31.22 लाख 280 रुपये से
4. न्यौली शुगर मिल 11.12 लाख 83 फीसदी
5. करीमगंज चीनी मिल 747.00 लाख 20 फीसदी
6. फरीदपुर चीनी मिल पूरा भुगतान 280 रुपये से
कुल बकाया 2980 लाख रुपये
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नोट: आंकड़े 230 रुपये प्रति क्विंटल के आधार पर दिए गए हैं।
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गन्ना किसानों का चीनी मिलों द्वारा बकाया भुगतान न करने पर मिलों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। शासन से मिले निर्देशों के अनुसार 90 फीसदी से कम भुगतान करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ जून के अंत तक बकाया मूल्यों का भुगतान किया जाएगा।
-रामकिशन, सचिव, गन्ना सहकारी समिति
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जिले में उत्पादित हुए लाखों क्विंटल गन्ने को जिले की दो चीनी मिलों के साथ गैर जनपदों की चार और चीनी मिलों को बेचा गया है। शासन के आदेश थे कि चीनी मिल 230 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना मूल्यों का भुगतान क्रय तिथि के 14 दिनों के अंदर करेंगे, लेकिन किसी भी चीनी मिल ने इन नियमों का पालन नहीं किया। शेष 50 रुपये प्रति क्विंटल की धनराशि का भुगतान चीनी मिल बंद होने के तीन महीनों के अंदर किया जाना है, लेकिन अभी तक 230 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों का 2980 लाख रुपये बकाया है।
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इसमें सबसे ज्यादा लापरवाही करीमगंज चीनी मिल ने बरतते हुए केवल 20 फीसदी बकाया ही भुगतान किया है। अन्य मिलों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। इनमें फरीदपुर चीनी मिल ने 280 रुपये के हिसाब से गन्ना किसानों का पूरा बकाया भुगतान कर दिया है, जबकि रजपुरा चीनी मिल 230 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान कर चुका है।
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किसानों का बकाया भुगतान न होने की वजह से उन लोगों को तमाम परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। भाकियू कार्यकर्ता भी किसानों के बकाए भुगतान के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन ने चीनी मिलों को केवल नोटिस ही भेजे हैं। हां, प्रदेश सरकार के आदेश के बाद से मिलों ने 30 जून तक 90 फीसदी भुगतान न करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ आरसी जारी करने का तय कर लिया है।
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चीनी मिल बकाया भुगतान फीसदी
1. शेखूपुर चीनी मिल 292.04 लाख 63 फीसदी
2. बिसौली शुगर मिल 1561.45 लाख 72 फीसदी
3. रजपुरा चीनी मिल 31.22 लाख 280 रुपये से
4. न्यौली शुगर मिल 11.12 लाख 83 फीसदी
5. करीमगंज चीनी मिल 747.00 लाख 20 फीसदी
6. फरीदपुर चीनी मिल पूरा भुगतान 280 रुपये से
कुल बकाया 2980 लाख रुपये
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नोट: आंकड़े 230 रुपये प्रति क्विंटल के आधार पर दिए गए हैं।
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गन्ना किसानों का चीनी मिलों द्वारा बकाया भुगतान न करने पर मिलों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। शासन से मिले निर्देशों के अनुसार 90 फीसदी से कम भुगतान करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ जून के अंत तक बकाया मूल्यों का भुगतान किया जाएगा।
-रामकिशन, सचिव, गन्ना सहकारी समिति