{"_id":"5ba3e943867a5501313c6b47","slug":"201537468739-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"काबू में नहीं आ रहा बुखार, तीन और लोगों की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काबू में नहीं आ रहा बुखार, तीन और लोगों की मौत
Updated Fri, 21 Sep 2018 12:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। जिले में फैला बुखार नियंत्रित होने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार लोगों की मौतें हो रहीं हैं। अब तक जिले में बुखार से 252 लोगों की मौत हो चुकी हैं। पिछले 24 घंटों में एक विवाहिता समेत तीन और लोगों की मौत हो गई।
जरीफनगर। दहगवां कस्बा निवासी इस्लाम कुरैशी के 11 वर्षीय बेटे सकलैन को तीन दिन पहले बुखार आया था। इस्लाम कुरैशी के मुताबिक सकलैन को इतना तेज बुखार था कि उसके दिमाग को चढ़ गया, जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई। परिवार वाले उसे दिल्ली ले गए। काफी इलाज कराया, लेकिन कोई सुधार नहीं हो सका। सकलैन की बुखार से मौत हो गई। इसके अलावा जरीफनगर, दहगवां, दांदरा, वागवाला, सिरसा खुर्द, दिहौरा, केरई समेत दर्जनों गांव बुखार ग्रस्त हैं।
दातागंज। ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पापड़ निवासी रामस्वरूप की 24 वर्षीय विवाहित बेटी विटाना की बुधवार शाम बुखार से मौत हो गई। परिवार वालों के मुताबिक विटाना काफी समय पूर्व मायके आई थी। तभी से वह यहीं रह रही थी। क्षेत्र में फैले बुखार की चपेट में वह भी आ गई और उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
विज्ञापन
कुंवरगांव। सालारपुर ब्लाक क्षेत्र के ग्राम वनगढ़ निवासी राजेंद्र के दो वर्षीय बेटे हिमांशु को दो दिन पहले बुखार आया था। गुरुवार दोपहर उसकी मौत हो गई। इससे गांव वालों में डर बना हुआ है।
फिर चढ़ा दलालों को रंग, जिला अस्पताल से ले जा रहे मरीज
बदायूं। डीएम दिनेश कुमार सिंह के अथक प्रयासों और निरीक्षणों के बावजूद जिला अस्पताल पर दलाल हावी हैं। जिनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। लगातार मरीजों को भड़का कर प्राइवेट अस्पतालों में ले जा रहे हैं और वहां से मोटी कमीशन खा रहे हैं। इनमें कुछ दलाल ऐसे हैं जो खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताते हैं। फिर मौका मिलते ही मरीजों की जेब काट देते हैं। बाकी रही बची कसर मरीजों को रेफर करके यहां के डॉक्टर पूरी कर देते हैं।
वैसे इस तरह के मामले अक्सर महिला अस्पताल में देखने को मिलते थे। जहां महिला दलाल डिलीवरी कराने से लेकर गर्भपात कराने तक का ठेका लेती हैं। मरीज को भड़काती हैं, उन्हें असुविधाएं बताती हैं। कई बातें ऐसी पढ़ातीं हैं, जिससे मरीज और उसके घर वाले डर जाएं फिर उसके कहे अनुसार अस्पताल में भर्ती कराएं। यह महिला दलालों की कमाई का जरिया है। इसी तरह कुछ दलाल जिला अस्पताल में अपना धंधा जमा रहे हैं। उन्होंने कुछ प्राइवेट अस्पतालों में सेटिंग कर रखी है। उनका मर्ज के मुताबिक कमीशन तय है। वह किसी न किसी बहाने अस्पताल के वार्डों में या इमरजेंसी के बाहर घूमते मिलेंगे। ऐसा नहीं है कि यह एक दिन आए और चार दिन गायब रहे। रोजाना वार्डों में आकर घूमते हैं और मरीज को सरकारी अव्यवस्थाओं के अंबार गिनाते हैं। जिस अस्पताल से सेटिंग होती है, वहां की सुविधाएं और इलाज का झूठा बखान करते हैं। बातों में फंस जाए तो मरीज को ले जाते हैं। इस समय बुखार से जिले के हालात खराब हैं। ऐसे में दो दलाल नियमित रूप से रोजाना रात को आ रहे हैं। फिर सीधे वार्डों में चले जाते हैं। वहीं मरीजों और तीमारदारों को झूठी अफवाह फैलाकर चले जाते हैं। इसमें डॉक्टरों की लापरवाही इनको बढ़ावा दे रही है। झंझटों से बचने के लिए डॉक्टर भी मरीज को रेफर करने से नहीं चूक रहे हैं।
वार्ड ब्वाय के सहारे चल रहा गिधौल का नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
मूसाझाग (बदायूं)। संवेदनशील ब्लॉक जगत क्षेत्र का नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इस समय भगवान भरोसे है। यहां कर्मचारी तो तैनात हैं लेकिन कोई डॉक्टर नहीं है। आधी-अधूरी दवाएं हैं, जिनके बल पर यह स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। अधिकतर मरीज तो डॉक्टर के नहीं होने पर ही लौट जाते हैं। बाकी मरीजों का यहां के वार्ड ब्वाय ट्रीटमेंट करते हैं। उनका ब्लड प्रेशर नापते हैं और दवाएं देते हैं।
इनमें एक वार्ड ब्वाय पर्चा बनाता है तो दूसरा दवाएं बांटता है। मरीज नहीं होते हैं, तो आराम ही आराम है। यहां दवा लेने आए शेर सिंह ने बताया कि वह आज तीसरी बार दवा लेने आये हैं। उनके बच्चों को कोई आराम नहीं मिला है। डॉक्टर होते तो दवा लिख देते, यह क्या लिखते हैं और क्या दवा देते हैं यह भगवान ही जानता है। बस इनके भरोसे बच्चों को दवा खिलाई लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। एक वार्ड ब्वाय ने बताया कि मरीजों को हम ही दवा देते हैं। यहां ब्लड जांच नहीं होती, सफाई कर्मी भी नहीं है, शौचालय बंद पड़े हैं, वार्डों की खिड़कियां टूटी हुई हैं। परिसर में आवारा पशु आकर चरते हैं।
स्वास्थ्य शिविर में मरीजों को दवाएं बांटी
दबतोरी (बदायूं)। क्षेत्र के बिजौरी गांव में गुरुवार सुबह दस बजे आसफपुर से स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों की एक टीम पहुंची और उन्होंने बुखार पीड़ित सैकड़ों लोगों का चेकअप किया और दवाएं वितरित की।
टीम में डॉ. असरफ खान, डॉ. अभिषेक सिंह, निशाकर शर्मा, युधिष्ठर सिंह, विवेक कुमार, डॉ. जहीर, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी सुवनेश्वर सिहं आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
जरीफनगर। दहगवां कस्बा निवासी इस्लाम कुरैशी के 11 वर्षीय बेटे सकलैन को तीन दिन पहले बुखार आया था। इस्लाम कुरैशी के मुताबिक सकलैन को इतना तेज बुखार था कि उसके दिमाग को चढ़ गया, जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई। परिवार वाले उसे दिल्ली ले गए। काफी इलाज कराया, लेकिन कोई सुधार नहीं हो सका। सकलैन की बुखार से मौत हो गई। इसके अलावा जरीफनगर, दहगवां, दांदरा, वागवाला, सिरसा खुर्द, दिहौरा, केरई समेत दर्जनों गांव बुखार ग्रस्त हैं।
विज्ञापन
दातागंज। ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पापड़ निवासी रामस्वरूप की 24 वर्षीय विवाहित बेटी विटाना की बुधवार शाम बुखार से मौत हो गई। परिवार वालों के मुताबिक विटाना काफी समय पूर्व मायके आई थी। तभी से वह यहीं रह रही थी। क्षेत्र में फैले बुखार की चपेट में वह भी आ गई और उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
विज्ञापन
कुंवरगांव। सालारपुर ब्लाक क्षेत्र के ग्राम वनगढ़ निवासी राजेंद्र के दो वर्षीय बेटे हिमांशु को दो दिन पहले बुखार आया था। गुरुवार दोपहर उसकी मौत हो गई। इससे गांव वालों में डर बना हुआ है।
फिर चढ़ा दलालों को रंग, जिला अस्पताल से ले जा रहे मरीज
बदायूं। डीएम दिनेश कुमार सिंह के अथक प्रयासों और निरीक्षणों के बावजूद जिला अस्पताल पर दलाल हावी हैं। जिनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। लगातार मरीजों को भड़का कर प्राइवेट अस्पतालों में ले जा रहे हैं और वहां से मोटी कमीशन खा रहे हैं। इनमें कुछ दलाल ऐसे हैं जो खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताते हैं। फिर मौका मिलते ही मरीजों की जेब काट देते हैं। बाकी रही बची कसर मरीजों को रेफर करके यहां के डॉक्टर पूरी कर देते हैं।
वैसे इस तरह के मामले अक्सर महिला अस्पताल में देखने को मिलते थे। जहां महिला दलाल डिलीवरी कराने से लेकर गर्भपात कराने तक का ठेका लेती हैं। मरीज को भड़काती हैं, उन्हें असुविधाएं बताती हैं। कई बातें ऐसी पढ़ातीं हैं, जिससे मरीज और उसके घर वाले डर जाएं फिर उसके कहे अनुसार अस्पताल में भर्ती कराएं। यह महिला दलालों की कमाई का जरिया है। इसी तरह कुछ दलाल जिला अस्पताल में अपना धंधा जमा रहे हैं। उन्होंने कुछ प्राइवेट अस्पतालों में सेटिंग कर रखी है। उनका मर्ज के मुताबिक कमीशन तय है। वह किसी न किसी बहाने अस्पताल के वार्डों में या इमरजेंसी के बाहर घूमते मिलेंगे। ऐसा नहीं है कि यह एक दिन आए और चार दिन गायब रहे। रोजाना वार्डों में आकर घूमते हैं और मरीज को सरकारी अव्यवस्थाओं के अंबार गिनाते हैं। जिस अस्पताल से सेटिंग होती है, वहां की सुविधाएं और इलाज का झूठा बखान करते हैं। बातों में फंस जाए तो मरीज को ले जाते हैं। इस समय बुखार से जिले के हालात खराब हैं। ऐसे में दो दलाल नियमित रूप से रोजाना रात को आ रहे हैं। फिर सीधे वार्डों में चले जाते हैं। वहीं मरीजों और तीमारदारों को झूठी अफवाह फैलाकर चले जाते हैं। इसमें डॉक्टरों की लापरवाही इनको बढ़ावा दे रही है। झंझटों से बचने के लिए डॉक्टर भी मरीज को रेफर करने से नहीं चूक रहे हैं।
वार्ड ब्वाय के सहारे चल रहा गिधौल का नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
मूसाझाग (बदायूं)। संवेदनशील ब्लॉक जगत क्षेत्र का नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इस समय भगवान भरोसे है। यहां कर्मचारी तो तैनात हैं लेकिन कोई डॉक्टर नहीं है। आधी-अधूरी दवाएं हैं, जिनके बल पर यह स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। अधिकतर मरीज तो डॉक्टर के नहीं होने पर ही लौट जाते हैं। बाकी मरीजों का यहां के वार्ड ब्वाय ट्रीटमेंट करते हैं। उनका ब्लड प्रेशर नापते हैं और दवाएं देते हैं।
इनमें एक वार्ड ब्वाय पर्चा बनाता है तो दूसरा दवाएं बांटता है। मरीज नहीं होते हैं, तो आराम ही आराम है। यहां दवा लेने आए शेर सिंह ने बताया कि वह आज तीसरी बार दवा लेने आये हैं। उनके बच्चों को कोई आराम नहीं मिला है। डॉक्टर होते तो दवा लिख देते, यह क्या लिखते हैं और क्या दवा देते हैं यह भगवान ही जानता है। बस इनके भरोसे बच्चों को दवा खिलाई लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। एक वार्ड ब्वाय ने बताया कि मरीजों को हम ही दवा देते हैं। यहां ब्लड जांच नहीं होती, सफाई कर्मी भी नहीं है, शौचालय बंद पड़े हैं, वार्डों की खिड़कियां टूटी हुई हैं। परिसर में आवारा पशु आकर चरते हैं।
स्वास्थ्य शिविर में मरीजों को दवाएं बांटी
दबतोरी (बदायूं)। क्षेत्र के बिजौरी गांव में गुरुवार सुबह दस बजे आसफपुर से स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों की एक टीम पहुंची और उन्होंने बुखार पीड़ित सैकड़ों लोगों का चेकअप किया और दवाएं वितरित की।
टीम में डॉ. असरफ खान, डॉ. अभिषेक सिंह, निशाकर शर्मा, युधिष्ठर सिंह, विवेक कुमार, डॉ. जहीर, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी सुवनेश्वर सिहं आदि मौजूद रहे।