{"_id":"5ab3a1bc4f1c1be83f8b45bc","slug":"181521721788-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कंदमाता के चरणों में भक्तों ने झुकाया शीश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कंदमाता के चरणों में भक्तों ने झुकाया शीश
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
Updated Thu, 22 Mar 2018 08:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नवरात्र के पांचवें दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं ने स्कंदमाता की आराधना की। श्रद्धालुओं ने सुबह घरों में पूजा अर्चना करने के बाद मंदिरों में जाकर मां स्कंदमाता के दर्शन किए। दुर्गा गामा देव मठिया मंदिर पर श्रद्धालुओं की खूब भीड़ रहीं। श्रद्धालुओं ने मां की पूजा अर्चना कर मनौतियां मांगी।
शहर के सभी देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया। शहर के प्राचीन दुर्गा गामा देव मठिया मंदिर पर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। जिस कारण सभी को घंटों लाइन में लगकर मां के दर्शन करने को मिले। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर नारियल, फल, मिठाइयां,चूनरी और घंटे मां के चरणों में अर्पित किए। सुबह शाम होने वाली आरती से आस पास का वातावरण देवीमय हो गया। शहर के आदि शक्ति मां दुर्गा मंदिर और नगला मंदिर पर दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इन मंदिरों पर पहुंचकर मां स्कंदमाता की भक्तिभाव से पूजा अर्चना की। साथ ही परिवार की सुख- समृद्धि और खुशहाली की कामना की। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिहाज से मंदिरों में पूरे दिन पुलिस फोर्स तैनात रहा।
शादी में होने वाली तेल की रस्म को यहां कराते हैं संपन्न
बदायूं। शहर में प्रवेश करने से पहले पुरानी चुंगी के पास बना दुर्गा देवी गामा मंदिर में लोगों का अटूट विश्वास है। प्रवेश द्वार पर बने शेर का भव्य स्वरूप मंदिर में चार चांद लगाता है। मंदिर के पुजारी सुरेश ने बताया कि इस मंदिर की इतिहास लगभग 150 साल पुराना है। यहां पड़े खाली मैदान पर स्वत: ही मां की पीठ निकली थी। इसके बाद आस पास के भक्तों ने मठिया का निर्माण कराया। उसके बाद धीरे-धीरे मंदिर का निर्माण हो गया। यह मंदिर शादी की रस्मों के लिए ज्यादा प्रसिद्ध है। शादी के दौरान होने वाले तेल की रस्म को इसी मंदिर पर संपन्न कराया जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों के माता या कनवर निकलते है। यहां का जल उस जगह पर लगाने से वह सही हो जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर के सभी देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया। शहर के प्राचीन दुर्गा गामा देव मठिया मंदिर पर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। जिस कारण सभी को घंटों लाइन में लगकर मां के दर्शन करने को मिले। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर नारियल, फल, मिठाइयां,चूनरी और घंटे मां के चरणों में अर्पित किए। सुबह शाम होने वाली आरती से आस पास का वातावरण देवीमय हो गया। शहर के आदि शक्ति मां दुर्गा मंदिर और नगला मंदिर पर दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इन मंदिरों पर पहुंचकर मां स्कंदमाता की भक्तिभाव से पूजा अर्चना की। साथ ही परिवार की सुख- समृद्धि और खुशहाली की कामना की। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिहाज से मंदिरों में पूरे दिन पुलिस फोर्स तैनात रहा।
विज्ञापन
शादी में होने वाली तेल की रस्म को यहां कराते हैं संपन्न
बदायूं। शहर में प्रवेश करने से पहले पुरानी चुंगी के पास बना दुर्गा देवी गामा मंदिर में लोगों का अटूट विश्वास है। प्रवेश द्वार पर बने शेर का भव्य स्वरूप मंदिर में चार चांद लगाता है। मंदिर के पुजारी सुरेश ने बताया कि इस मंदिर की इतिहास लगभग 150 साल पुराना है। यहां पड़े खाली मैदान पर स्वत: ही मां की पीठ निकली थी। इसके बाद आस पास के भक्तों ने मठिया का निर्माण कराया। उसके बाद धीरे-धीरे मंदिर का निर्माण हो गया। यह मंदिर शादी की रस्मों के लिए ज्यादा प्रसिद्ध है। शादी के दौरान होने वाले तेल की रस्म को इसी मंदिर पर संपन्न कराया जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों के माता या कनवर निकलते है। यहां का जल उस जगह पर लगाने से वह सही हो जाते हैं।
विज्ञापन