फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   नरऊ में तो प्रधान भी खुले में शौंच करने को मजबूर

नरऊ में तो प्रधान भी खुले में शौंच करने को मजबूर

Tue, 22 Aug 2017 10:03 AM IST
Updated Tue, 22 Aug 2017 10:03 AM IST
विज्ञापन
नरऊ में तो प्रधान भी खुले में शौंच करने को मजबूर
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

उझानी (बदायूं)।
गांव नरऊ के घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं। गांव के करीब 80 फीसदी घरों की महिलाएं खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। इसके अलावा खास बात यह है कि ग्राम प्रधान भी खुल में शौच करने को मजबूर नजर आईं।
ब्लॉक मुख्यालय के नजदीक के गांव नरऊ की आबादी करीब तीन हजार है। एक हजार से अधिक वोटर संख्या वाले इस गांव की महिलाओं का दुर्भाग्य ही कहेंगे जो पिछले सालों में खासकर शौचालय को लेकर सरकारी अनुदान का लाभ उन्हें नहीं मिला। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नरऊ पहुंचकर ग्रामीणों को खुले में शौच नहीं करने के लिए प्रेरित तो किया लेकिन महिलाओं ने जब उनके सामने शौचालय बनाने में आर्थिक समस्या बताई तो कोई जवाब नहीं मिला। टीम के सदस्यों ने देखा कि प्रधान ही नहीं बल्कि अधिकतर महिलाएं शौच करने को खेतों की ओर निकल पड़ी हैं। शौच के दौरान रास्ते से होकर ग्रामीण या फिर कोई राहगीर निकल जाए तो महिलाओं को शर्मसार होना पड़ता है।
विज्ञापन

-----------------
सचिव बोले, अभी कराया है सर्वे
उझानी। नरऊ गांव में खुले में शौच की समस्या को लेकर सचिव सुधीर कुमार शर्मा ने पहले तो यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की- पिछले सप्ताह ही चार्ज मिला है। फिर बोले, सर्वे कराया जा चुका है। आवश्यकता तीन सौ से अधिक शौचालयों की है फिलहाल तीन दर्जन ग्रामीणों के नाम सूची में शामिल कर लिए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

------------------
ग्रहणी नत्थो ने बताया कि शौचालय बनवाने के लिए उसने शुरू में दो हजार रुपये जमा किए थे कि अनुदान मिलने पर वह शौचालय बनवा लेगी, लेकिन बच्चा बीमार हो गया और रकम दवा में खर्च हो गई। अब तो सरकार से ही उम्मीद है। वही अनुदान मुहैया कराएगी।
--------
ग्रामीण भजनलाल की पत्नी उर्मिला पिछले सप्ताह उस वक्त ज्यादा परेशानी हुई जब महिला रिश्तेदार घर आई। उसका कहना है कि रिश्तेदार की बेटी ने खुले में शौच को जाने से इंकार कर दिया। जैसे तैसे पड़ोसी से बात की और लड़की को उनके यहां भेजा। अगर पड़ोसी मदद नहीं करते तो उसके सामने मुंह दिखाने लायक नहीं बचती।
----------
मिथलेश कहती हैं कि खुले में शौच कोई खुशी में नहीं जाती। मजबूरी है, घर में संसाधनों का अभाव और सरकार गौर नहीं करती। अफसर आकर कह जाते हैं कि हर घर को शौचालय मिलेगा, लेकिन एक दशक में उसे भरोसे के अलावा कुछ नहीं मिला। बच्चों की पढ़ाई और खाना खर्चा से कुछ बचे तभी तो शौचालय बनेगा।
--------------
वृद्धा सूरजादेवी ने बताया कि घर की बहू-बेटियों से पूछो कि वे किस कदर परेशान हैं। शौचालय नहीं होने की वजह से सुबह और शाम को जो दिक्कत होती है, उसे सोच कर दु:ख होता है। गांव के आसपास ऐसी भी कोई जगह नहीं है जिसकी आड़ लेकर बैठ जाएं। फसलों के अलावा कोई और रास्ता भी नहीं बचता।
-------------
वर्जन
फोटो- 21 बीडीएनयूजेएचपीएच-06
शौचालय बनवाने के लिए पिछले साल सचिव से बात की थी। चूंकि वह अशिक्षित हैं, सो ज्यादातर कामकाज बेटा ही देखता है। शौच को मैं भी खेत में जाती हूं लेकिन दो-तीन महीना में हालात सुधरने लगेंगे। सचिव को भी प्रस्ताव तैयार कराने को कहा है। अनुदान कब और कैसे मिलेगा, यह भी अफसर ही जानें।- शकुंतला देवी, प्रधान, नरऊ

‘सबने मिलकर ठाना है, शौचालय जरूर बनाना है’
विधायक बिल्सी और ब्लॉक प्रमुख ने दो अक्तूबर तक अंबियापुर को ओडीएफ कराने का लिया संकल्प
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं/बिल्सी। संपूर्ण अंबियापुर ब्लॉक क्षेत्र को दो अक्तूबर तक ओडीएफ करा दिया जाएगा। बिल्सी विधानसभा क्षेत्र के विधायक पंडित आरके शर्मा एवं ब्लॉक प्रमुख विजेता यादव ने अपने ब्लॉक क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त कराने का लक्ष्य स्वयं निर्धारित किया। डीएम ने कहा कि यदि दो अक्तूबर तक पूरा ब्लॉक खुले में शौच से आजाद हो जाएगा तो जनपद का यह पहला ओडीएफ ब्लॉक होगा।

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत खुले में शौच से आजादी कार्यक्रम के तहत सोमवार को ब्लॉक अंबियापुर में जागरूकता कार्यक्रम हुआ। विधायक बिल्सी शर्मा ने कहा कि आजादी के 70 वर्षों बाद भी खुले में शौच की कुप्रथा बरकरार है। अब प्रत्येक नागरिक को अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। सब मिलकर प्रयास करें तो कोई भी व्यक्ति खुले में शौच को नहीं जा सकेगा। डीएम ने कहा कि स्कूलों में प्रार्थना के समय बच्चों को जागरूक किया जाए। बच्चे अपने अभिभावकों से शौचालय निर्माण की जिद करेंगे तो उन्हें शौचालय बनवाना ही होगा। जिन घरों में शौचालय बने हुए हैं, उन बच्चों की प्रशंसा के तौर पर प्रार्थना के समय तालियां बजवाकर प्रोत्साहित किया जाए। डीएम ने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर, आशा वर्कर्स, शिक्षा प्रेरकों, रोजगार सेवक को 25-25 शौचालय बनवाने का लक्ष्य दिया गया। यह कर्मी आर्थिक रूप से संपन्न लोगों के शौचालय बनवाएंगे। ब्लॉक प्रमुख विजेता यादव ने कहा कि खुले में शौच की कुप्रथा से सबसे अधिक समस्याएं महिलाओं को ही होती हैं। इसलिए ब्लॉक को ओडीएफ कराने में महिलाओं को आगे आकर प्रयास करना चाहिए। खुले में शौच के कारण शरीर अस्वस्थ होता है, बीमारियों से घिरा रहता है। जागरूकता कार्यक्रम में नगर मजिस्ट्रेट राजकुमार द्विवेदी, एसडीएम बिल्सी हरिशंकर लाल शुक्ला, जिला उद्यान अधिकारी/प्रभारी अंबियापुर बीडीओ आरएन वर्मा, डीपीआरओ राजीव कुमार मौर्य सहित अन्य अधिकारी, ग्राम प्रधान, शिक्षकगण, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, शिक्षा प्रेरक, आशा वर्कर्स, लेखपाल एवं सचिव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed