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श्रम विभाग ने 710 मजदूरों को दी साइकिलें
बदायूं।
Updated Sun, 28 Dec 2014 12:38 AM IST
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मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के पंजीकृत 710 श्रमिकों को साइकिल सहायता योजना के तहत सांसद धर्मेन्द्र यादव ने साइकिलों का वितरण किया।
शनिवार को पुलिस लाइन ग्राउंड में 702 पंजीकृत पुरूष श्रमिकों एवं आठ पंजीकृत महिला श्रमिकों को साइकिलों का वितरण किया गया। 18 से 60 वर्ष की मध्य आयु के श्रमिकों जो वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक कार्य किए हों अथवा मनरेगा के तहत 50 दिनों तक मजदूरी का कार्य किया हो, ऐसे श्रमिक 50 रूपये शुल्क देकर पंजीकरण करा सकते है। पंजीकरण के छह माह बाद श्रमिक साइकिल सहायता योजना का लाभ ले सकते हैं।
सांसद धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि सपा ने हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ किया है। श्रमिकों को पूंजीपति लोग कुछ करने देना नहीं चाहते। उनका विरोध लेते हुए सपा सरकार ने श्रमिकों का ख्याल रखा है। उनके लिए कई योजनाएं हैं। भाजपा को भी उन्होंने निशाने पर लिया। कहा कि मीडिया ने डील कर उन्हें आगे बढ़ाया। उनकी सभी भरोसे खोखले निकले। सपा गरीबों के दिलों पर राज करती है। जिले में इस योजना के तहत एक हजार से अधिक साइकिलों का वितरण किया जा चुका है। गरीब मजदूरों को दूर दराज से रोजी रोटी की तलाश में पैदल चलना पड़ता था या धन व्यय करके कार्य स्थल तक पहुंचते थे। साइकिल मिलने से धन और समय दोनों की बचत होगी और इससे उनके जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने खबरों में की गई टिप्पणी पर कहा कि जल्दी ही गोद लिए गांव का विकास होगा। वह न सिर्फ दुर्गपुर जरीफनगर को ही विकसित नहीं करेंगे वल्कि उनका प्रयास रहेगा कि जिले का हर गांव आदर्श गांव बनें और सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं का लाभ जनता को मिले।
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विधान परिषद सदस्य बनवारी सिंह यादव और शहर विधायक आबिद रजा ने भी भाजपा पर कटाक्ष किए और सपा को गरीबों की हितैषी पार्टी बताया। अंत में जिलाधिकारी शंभू नाथ ने आभार व्यक्त किया। बरेली मंडल के उप श्रमायुक्त राजेश कुमार ने संचालित विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला। कहा कि पंजीकृत मजदूरों को सौर ऊर्जा लाइटों का वितरण भी कराया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक आशुतोष मौर्य, ओमकार सिंह यादव, प्रदीप यादव उर्फ गुड्डू, सुरेश पाल सिंह चौहान, हर प्रसाद सिंह पटेल, विमल कृष्ण अग्रवाल, योगेंद्र कुमार उर्फ कुन्नू बाबू, अवधेश कुमार यादव, बलवीर सिंह यादव, सर्वेस यादव, एसएसपी संतोष कुमार सिंह, सीडीओ देवेंद्र सिंह कुशवाहा, एडीएम वित्त एवं राजस्व राजेंद्र प्रसाद यादव, एडीएम प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ राजेश यादव, पीडी राम रक्षपाल सिंह यादव मौजूद रहे। संचालन आजीविका मिशन के उपायुक्त आरपी सिंह ने किया।
अधिकृत कर दिए गए थे साइकिल स्टोर
श्रम प्रवर्तन विभाग ने साइकिलों के लिए स्वराज, राम साइकिल, न्यू बत्रा, भगवती इंटर प्राइज साइकिल स्टोर तय कर दिए थे। इसके अलावा कहीं से भी मजदूरों को साइकिल खरीदने को मनाही रही। स्वराज, न्यू बत्रा और राम साइकिल स्टोर मजदूरों को साइकिलें पूरी नहीं कर सके। इस वजह से कई मजदूरों से उन्होंने दो-दो सौ रुपये एडवांस लेकर रख लिए। ऐसे कई मामले सामने आए। इनको कब साइकिल मिल सकेगी। यह भी भरोसा नहीं दिलाया गया है। कई की साइकिल ऐसी थीं जिनके कैरियर और रिमों पर अभी से काई आ रही थी। कई मजदूर साइकिल बिक्रे ताओं को कोसते नजर आए। इनमें जो सामान लगाया गया है बेहद घटियास्तर का था। हालांकि साइकिल अच्छी कं पनी की हैं।
दो सौ रुपये मजदूरों से ले रहे हैं साइकिल वाले
श्रम प्रवर्तन विभाग तीन हजार रुपये साइकिल को दे रहा है। साइकिल स्टोर्स पर साईकिल की कीमत 3200 रुपये लगाई गई है। यही बात बताकर साइकिल स्टोर वाले 200 रुपये मजदूरों से ले रहे हैं। कई मजदूरों को हजारों रुपया साईकिल बेचने वालों के यहां पड़ा है।
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शनिवार को पुलिस लाइन ग्राउंड में 702 पंजीकृत पुरूष श्रमिकों एवं आठ पंजीकृत महिला श्रमिकों को साइकिलों का वितरण किया गया। 18 से 60 वर्ष की मध्य आयु के श्रमिकों जो वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक कार्य किए हों अथवा मनरेगा के तहत 50 दिनों तक मजदूरी का कार्य किया हो, ऐसे श्रमिक 50 रूपये शुल्क देकर पंजीकरण करा सकते है। पंजीकरण के छह माह बाद श्रमिक साइकिल सहायता योजना का लाभ ले सकते हैं।
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सांसद धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि सपा ने हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ किया है। श्रमिकों को पूंजीपति लोग कुछ करने देना नहीं चाहते। उनका विरोध लेते हुए सपा सरकार ने श्रमिकों का ख्याल रखा है। उनके लिए कई योजनाएं हैं। भाजपा को भी उन्होंने निशाने पर लिया। कहा कि मीडिया ने डील कर उन्हें आगे बढ़ाया। उनकी सभी भरोसे खोखले निकले। सपा गरीबों के दिलों पर राज करती है। जिले में इस योजना के तहत एक हजार से अधिक साइकिलों का वितरण किया जा चुका है। गरीब मजदूरों को दूर दराज से रोजी रोटी की तलाश में पैदल चलना पड़ता था या धन व्यय करके कार्य स्थल तक पहुंचते थे। साइकिल मिलने से धन और समय दोनों की बचत होगी और इससे उनके जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने खबरों में की गई टिप्पणी पर कहा कि जल्दी ही गोद लिए गांव का विकास होगा। वह न सिर्फ दुर्गपुर जरीफनगर को ही विकसित नहीं करेंगे वल्कि उनका प्रयास रहेगा कि जिले का हर गांव आदर्श गांव बनें और सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं का लाभ जनता को मिले।
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विधान परिषद सदस्य बनवारी सिंह यादव और शहर विधायक आबिद रजा ने भी भाजपा पर कटाक्ष किए और सपा को गरीबों की हितैषी पार्टी बताया। अंत में जिलाधिकारी शंभू नाथ ने आभार व्यक्त किया। बरेली मंडल के उप श्रमायुक्त राजेश कुमार ने संचालित विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला। कहा कि पंजीकृत मजदूरों को सौर ऊर्जा लाइटों का वितरण भी कराया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक आशुतोष मौर्य, ओमकार सिंह यादव, प्रदीप यादव उर्फ गुड्डू, सुरेश पाल सिंह चौहान, हर प्रसाद सिंह पटेल, विमल कृष्ण अग्रवाल, योगेंद्र कुमार उर्फ कुन्नू बाबू, अवधेश कुमार यादव, बलवीर सिंह यादव, सर्वेस यादव, एसएसपी संतोष कुमार सिंह, सीडीओ देवेंद्र सिंह कुशवाहा, एडीएम वित्त एवं राजस्व राजेंद्र प्रसाद यादव, एडीएम प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ राजेश यादव, पीडी राम रक्षपाल सिंह यादव मौजूद रहे। संचालन आजीविका मिशन के उपायुक्त आरपी सिंह ने किया।
अधिकृत कर दिए गए थे साइकिल स्टोर
श्रम प्रवर्तन विभाग ने साइकिलों के लिए स्वराज, राम साइकिल, न्यू बत्रा, भगवती इंटर प्राइज साइकिल स्टोर तय कर दिए थे। इसके अलावा कहीं से भी मजदूरों को साइकिल खरीदने को मनाही रही। स्वराज, न्यू बत्रा और राम साइकिल स्टोर मजदूरों को साइकिलें पूरी नहीं कर सके। इस वजह से कई मजदूरों से उन्होंने दो-दो सौ रुपये एडवांस लेकर रख लिए। ऐसे कई मामले सामने आए। इनको कब साइकिल मिल सकेगी। यह भी भरोसा नहीं दिलाया गया है। कई की साइकिल ऐसी थीं जिनके कैरियर और रिमों पर अभी से काई आ रही थी। कई मजदूर साइकिल बिक्रे ताओं को कोसते नजर आए। इनमें जो सामान लगाया गया है बेहद घटियास्तर का था। हालांकि साइकिल अच्छी कं पनी की हैं।
दो सौ रुपये मजदूरों से ले रहे हैं साइकिल वाले
श्रम प्रवर्तन विभाग तीन हजार रुपये साइकिल को दे रहा है। साइकिल स्टोर्स पर साईकिल की कीमत 3200 रुपये लगाई गई है। यही बात बताकर साइकिल स्टोर वाले 200 रुपये मजदूरों से ले रहे हैं। कई मजदूरों को हजारों रुपया साईकिल बेचने वालों के यहां पड़ा है।