{"_id":"5bf70a4ebdec22416c13d99c","slug":"151542916686-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिल्सी में मनाया गया अरहनाथ स्वामी का ज्ञान कल्याणक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिल्सी में मनाया गया अरहनाथ स्वामी का ज्ञान कल्याणक
Updated Fri, 23 Nov 2018 01:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
(फोटो-28
बिल्सी में मनाया अरहनाथ
स्वामी का ज्ञान कल्याणक
भगवान की पूजा-अर्चना के साथ अर्घ्य समर्पित
अमर उजाला ब्यूरो
बिल्सी। नगर के मोहल्ला दो स्थित चंद्र प्रभू दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को जैन धर्म के 18 वें तीर्थंकर भगवान श्री अरहनाथ स्वामी का ज्ञान कल्याणक धूमधाम से मनाया गया। यहां सबसे पहले भक्तों द्वारा जलाभिषेक के साथ शांति धारा की गई। उसके बाद भगवान की पूजा-अर्चना के साथ अर्घ्य समर्पित किया गया।
महिला मंडल की अध्यक्षा रीता जैन ने बताया कि भगवान अरहनाथ स्वामी का जन्म हस्तिनापुर के इक्ष्वाकुवंश में मार्ग शीर्ष कृष्ण पक्ष दशमी को रेवती नक्षत्र में हुआ था। माता मित्रा देवी रानी और पिता राजा सुदर्शन थे। दीक्षा प्राप्ति के बाद तीन वर्ष तक कठोर तप करने के बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वादशी को हस्तिनापुर में आम के वृक्ष के नीचे भगवान श्री अरनाथ को कैवल्यज्ञान की प्राप्ति हुई थी। मार्ग शीर्ष मास के दशमी तिथि को भगवान श्री अरहनाथ ने सम्मेद शिखर पर एक हजार साधुओं के साथ निर्वाण को प्राप्त किया था। इस मौके पर डॉ आरती जैन, स्वीटी जैन, मोना जैन, रेखा जैन, बबिता जैन, नीलम जैन, चुन्नी देवी जैन, सुनील जैन, बंटी जैन, पीयूष जैन, मयंक जैन, प्रशांत जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
बिल्सी में मनाया अरहनाथ
स्वामी का ज्ञान कल्याणक
भगवान की पूजा-अर्चना के साथ अर्घ्य समर्पित
अमर उजाला ब्यूरो
बिल्सी। नगर के मोहल्ला दो स्थित चंद्र प्रभू दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को जैन धर्म के 18 वें तीर्थंकर भगवान श्री अरहनाथ स्वामी का ज्ञान कल्याणक धूमधाम से मनाया गया। यहां सबसे पहले भक्तों द्वारा जलाभिषेक के साथ शांति धारा की गई। उसके बाद भगवान की पूजा-अर्चना के साथ अर्घ्य समर्पित किया गया।
महिला मंडल की अध्यक्षा रीता जैन ने बताया कि भगवान अरहनाथ स्वामी का जन्म हस्तिनापुर के इक्ष्वाकुवंश में मार्ग शीर्ष कृष्ण पक्ष दशमी को रेवती नक्षत्र में हुआ था। माता मित्रा देवी रानी और पिता राजा सुदर्शन थे। दीक्षा प्राप्ति के बाद तीन वर्ष तक कठोर तप करने के बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वादशी को हस्तिनापुर में आम के वृक्ष के नीचे भगवान श्री अरनाथ को कैवल्यज्ञान की प्राप्ति हुई थी। मार्ग शीर्ष मास के दशमी तिथि को भगवान श्री अरहनाथ ने सम्मेद शिखर पर एक हजार साधुओं के साथ निर्वाण को प्राप्त किया था। इस मौके पर डॉ आरती जैन, स्वीटी जैन, मोना जैन, रेखा जैन, बबिता जैन, नीलम जैन, चुन्नी देवी जैन, सुनील जैन, बंटी जैन, पीयूष जैन, मयंक जैन, प्रशांत जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन