{"_id":"5a48d3e44f1c1b8b688bb6e2","slug":"151514722276-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएमएस भी महिला अस्पताल में करा रहे हैं शुगर की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीएमएस भी महिला अस्पताल में करा रहे हैं शुगर की जांच
Updated Mon, 01 Jan 2018 12:05 AM IST
विज्ञापन
जिला अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बदायूं। जिला अस्पताल की शुगर जांच मशीन तीन साल से खराब पड़ी है। इस वजह से यहां ऑपरेशन भी तुक्के से किए जा रहे हैं या फिर मरीजों से कहकर बाहर से जांच कराई जा रही है। हाल यह है कि जिला अस्पताल के सीएमएस खुद महिला अस्पताल की लैब से शुगर जांच कराते हैं।
जिला अस्पताल में पैथोलाजी लैब बुरे हालात से जूझ रही है। सरकार ने जहां अधिकतर रक्त जांचें नि:शुल्क कर दी हैं, वहीं अस्पताल में संसाधन कम होने की वजह से महत्वपूर्ण जांचें भी नहीं हो पा रहीं। यही वजह है कि अस्पताल प्रबंधन को अधिकतर जांचें कराने के लिए प्राइवेट पैथोलाजी लैब से अनुबंध करना पड़ा है। हालांकि इसके लिए रोगी से उसका आधार कार्ड की प्रति लेने जैसी औपचारिकताएं पूरी कराई जाती हैं और सामान्य रिपोर्ट भी तीन दिन बाद ही मिल पाती है। ऐसे में अधिकतर मरीज इसे झंझट मानकर वहां जांच नहीं कराते।
शुगर की समस्या अधिकतर मरीजों को रहती है। किसी भी गंभीर मरीज का उपचार करने या आपरेशन से पहले शुगर की जांच जरूरी होती है। बड़े अस्पतालों में तो पर्चा ही शुगर और बीपी चेक करने के बाद डॉक्टर के केबिन में पहुंचता है। ऐसे में जिला अस्पताल में शुगर जांच की मशीन लंबे समय से खराब होने से समस्या बनी हुई है। ब्लड सीरम से होने वाली यह जांच ज्यादा सटीक होती है। हालांकि अब स्टिक वाली ऐसी सामान्य मशीनें भी शुगर जांच के लिए चलन में हैं जो डॉक्टरों की टेबिल पर होनी ही चाहिए। अस्पताल में ऐसी मशीनों की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इससे सर्वाधिक परेशानी सर्जन को हो रही है। फिजीशियन तो मरीज का हाल देखकर अंदाज से दवा दे देते हैं पर बिना शुगर जांच ऑपरेशन खतरे को दावत देना है। अधिकतर मरीज बाहर से शुगर परीक्षण कराकर ले आते हैं पर कुछ इसे अस्पताल की जिम्मेदारी बताकर अड़ जाते हैं। तब डॉक्टर की मजबूरी होती है कि वह उनकी फिटनेस से शुगर का आकलन कर तुक्के से ऑपरेशन करे। सीएमएस डॉ. आरएस यादव को भी अक्सर अपनी शुगर जांच कराने की जरूरत पड़ती है। तीन दिन पहले उन्होंने महिला अस्पताल की लैब में जाकर अपनी शुगर जांच कराई। जिला अस्पताल के दूसरे डॉक्टर और कर्मचारी भी महिला अस्पताल या प्राइवेट लैब में जाकर शुगर की जांच कराते हैं।
विज्ञापन
---
वर्जन
शुगर की जांच वाली मशीन खराब है। हम कई बार इसके लिए लिखापढ़ी कर चुके हैं पर न तो इसकी मरम्मत हो पा रही है और न ही नई मशीन मिली है। हालांकि बराबर में ही महिला अस्पताल की लैब में लगी मशीन ठीक है, हम तो वहीं जांच करा लेते हैं।
- डॉ. आरएस यादव, सीएमएस जिला अस्पताल
---
वर्जन
प्राइवेट पैथोलाजी से जिला अस्पताल का अनुबंध हो चुका है और शुगर समेत सभी आवश्यक जांचें वहां से कराई जा रही हैं। वैसे अस्पताल को भी नई मशीन दिलाने के लिए शासन को लिखा जाएगा।
- डॉ. नेमीचंद्रा, सीएमओ
जिला अस्पताल में पैथोलाजी लैब बुरे हालात से जूझ रही है। सरकार ने जहां अधिकतर रक्त जांचें नि:शुल्क कर दी हैं, वहीं अस्पताल में संसाधन कम होने की वजह से महत्वपूर्ण जांचें भी नहीं हो पा रहीं। यही वजह है कि अस्पताल प्रबंधन को अधिकतर जांचें कराने के लिए प्राइवेट पैथोलाजी लैब से अनुबंध करना पड़ा है। हालांकि इसके लिए रोगी से उसका आधार कार्ड की प्रति लेने जैसी औपचारिकताएं पूरी कराई जाती हैं और सामान्य रिपोर्ट भी तीन दिन बाद ही मिल पाती है। ऐसे में अधिकतर मरीज इसे झंझट मानकर वहां जांच नहीं कराते।
विज्ञापन
शुगर की समस्या अधिकतर मरीजों को रहती है। किसी भी गंभीर मरीज का उपचार करने या आपरेशन से पहले शुगर की जांच जरूरी होती है। बड़े अस्पतालों में तो पर्चा ही शुगर और बीपी चेक करने के बाद डॉक्टर के केबिन में पहुंचता है। ऐसे में जिला अस्पताल में शुगर जांच की मशीन लंबे समय से खराब होने से समस्या बनी हुई है। ब्लड सीरम से होने वाली यह जांच ज्यादा सटीक होती है। हालांकि अब स्टिक वाली ऐसी सामान्य मशीनें भी शुगर जांच के लिए चलन में हैं जो डॉक्टरों की टेबिल पर होनी ही चाहिए। अस्पताल में ऐसी मशीनों की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इससे सर्वाधिक परेशानी सर्जन को हो रही है। फिजीशियन तो मरीज का हाल देखकर अंदाज से दवा दे देते हैं पर बिना शुगर जांच ऑपरेशन खतरे को दावत देना है। अधिकतर मरीज बाहर से शुगर परीक्षण कराकर ले आते हैं पर कुछ इसे अस्पताल की जिम्मेदारी बताकर अड़ जाते हैं। तब डॉक्टर की मजबूरी होती है कि वह उनकी फिटनेस से शुगर का आकलन कर तुक्के से ऑपरेशन करे। सीएमएस डॉ. आरएस यादव को भी अक्सर अपनी शुगर जांच कराने की जरूरत पड़ती है। तीन दिन पहले उन्होंने महिला अस्पताल की लैब में जाकर अपनी शुगर जांच कराई। जिला अस्पताल के दूसरे डॉक्टर और कर्मचारी भी महिला अस्पताल या प्राइवेट लैब में जाकर शुगर की जांच कराते हैं।
विज्ञापन
---
वर्जन
शुगर की जांच वाली मशीन खराब है। हम कई बार इसके लिए लिखापढ़ी कर चुके हैं पर न तो इसकी मरम्मत हो पा रही है और न ही नई मशीन मिली है। हालांकि बराबर में ही महिला अस्पताल की लैब में लगी मशीन ठीक है, हम तो वहीं जांच करा लेते हैं।
- डॉ. आरएस यादव, सीएमएस जिला अस्पताल
---
वर्जन
प्राइवेट पैथोलाजी से जिला अस्पताल का अनुबंध हो चुका है और शुगर समेत सभी आवश्यक जांचें वहां से कराई जा रही हैं। वैसे अस्पताल को भी नई मशीन दिलाने के लिए शासन को लिखा जाएगा।
- डॉ. नेमीचंद्रा, सीएमओ