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Budaun News: 150 बीघा फसल गंगा में समाई, 26 गांवों में दुश्वारियां बरकरार

Mon, 08 Sep 2025 12:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 08 Sep 2025 12:20 AM IST
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150 bigha crops submerged in Ganga, difficulties persist in 26 villages
सहसवान के तटबंध पर पन्नी और त्रिपालों के घरों में रह रहे बाढ़ पीड़ित। संवाद
बदायूं। नदियों का जलस्तर कम हुआ है, लेकिन गंगा और रामगंगा की बाढ़ में घिरे लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुईं हैं।घटते-बढ़ते जलस्तर के कारण पिछले 48 घंटे में कटान में सैकड़ों बीघा खेतिहर व खादर की भूमि बाढ़ में समा चुकी है। सहसवान में गंगा और महावा के संगम स्थल पर और गंगा-महावा के तटबंध पर कटान के कारण आसपास के ग्रामीणों में खाैफ है।
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दातागंज क्षेत्र में रामगंगा के प्रकोप से सेरहा बछलिया गांव में डेढ़ सौ बीघा से अधिक खेतिहर जमीन रामगंगा निगल चुकी है। बिहारीपुर और नगरिया खनू गांव में भी कृषि भूमि कट रही है। रामगंगा का जलस्तर लगातार घटने से प्रभावित क्षेत्र के लोग राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन बाढ़ का पानी सिमटने के साथ ही कटान में तेजी आ गई है।
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उसहैत में अटैना पुल और श्मशान भूमि पर कटान हो रहा है। प्रशासन के अनुसार, 26 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इन गांवों के कई मजरे भी हैं, जिन्हें प्रशासन ने अपनी सूची में शामिल नहीं किया है। सबसे ज्यादा प्रभावित गांव उसहैत क्षेत्र में हैं।
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रामगंगा कर रही है सेरहा बछलिया गांव में जबर्दस्त कटान
दातागंज। रामगंगा का जलस्तर घटना शुरू हो गया है, इससे कटान में तेजी आ गई है। अकेले सेरहा बछलिया गांव में डेढ़ सौ बीघा से अधिक से खेतिहर जमीन रामगंगा निगल चुकी है। बिहारीपुर और नगरिया खनू गांव में भी कृषि भूमि कट रही है। रामगंगा का जलस्तर लगातार घटने से प्रभावित क्षेत्र के लोग राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन पानी सिमटने के साथ ही कटान में तेजी आ गई है।
पिछले 48 घंटों में रामगंगा के किनारे बसे सेरहा बछलिया गांव में अवनीश कुमार सिंह की 20 बीघा गुड्डू सिंह सोलंकी की 15 बीघा, सत्येंद्र सिंह की 15 बीघा, दीनदयाल 10 बीघा, परमेश्वरी 12 बीघा, धर्मेंद्र 15 बीघा, नरेंद्र सक्सेना आठ बीघा, अनीश खान 20 बीघा, राजू आठ बीघा और मुनेंद्र सिंह की 15 बीघा जमीन अब तक रामगंगा में समा गई है। ग्राम प्रधान अवनीश सिंह के मुताबिक मुनेंद्र के पास कुल 15 बीघा ही जमीन थी, सारी जमीन कटने से यह परिवार भूमिहीन हो गया है।बिहारीपुर गांव के प्रधान आलोक सिंह ने बताया की जमीन का कटान तो हो रहा है, लेकिन सही स्थिति पानी निकलने के बाद पता लगेगी। पिछले दो बार की बाढ़ में इस गांव की 400 बीघा से अधिक जमीन को रामगंगा में समा चुकी है। नगरिया खनू के पुल के पास कृषि भमि का अभी भी कटान जारी है। संवाद

खेतों में नुकसान की निगरानी के लिए नावों से जा रहे बाढ़ पीड़ित
दातागंज। तीन जिलों बरेली, शाहजहांपुर और बदायूं की सीमा पर रामगंगा की बाढ़ में फंसे गांवों के लोग अपनी सुरक्षा के साथ अपने खेतों की सुरक्षा के प्रति बेहद परेशान हैं। पिछले दो दिनों से ग्रामीण अपने खेत देखने के लिए बाढ़ के पानी से नावों से जा रहे हैं। जिन ग्रामीणों के खेत पानी में डूब गए हैं, वे बहुत परेशान हैं। जिन धान के खेतों में पानी कम है, उनके बचने की उम्मीद हैं लेकिन जो पानी में पूरी तरह डूब गए हैं, उनके बचने की उम्मीद किसान छोड़ चुके हैं। बाजरा, उर्द और तिल की फसलें पानी में कई दिन हो जाने के कारण खराब हो चुकी है। पानी घटने पर कुछ फसलो के बचने की उम्मीद है। संवाद

गंगा में पानी की स्थिति
जलस्तर मीटरगेज पर 162.57 मीटर

रामगंगा में पानी की स्थिति
जलस्तर मीटरगेज पर 160.39 मीटर



गंगा में डैम से डिस्चार्ज
नरौरा डैम से डिस्चार्ज- 1,91,742 क्यूसेक
बिजनौर डैम से डिस्चार्ज- 92,492 क्यूसेक
हरिद्वार डैम से डिस्चार्ज- 88,858 क्यूसेक

कटान के कारण बढ़ा जीएम तटबंध कटने का खतरा



सहसवान। गंगा और महावा के मिलन स्थल पर पिछले कई दिनों से रुक-रुककर दोनों नदियां कटान कर रहीं हैं। इससे ऊसर और खेतिहर दोनों तरह की भूमि पानी में समा रही है। जमीनें काट-काटकर पानी आगे बढ़ता जा रहा है। करीब 200 बीघा जमीन यहां कट चुकी है।

कटान के चलते गंगा-महावा तटबंध पर खतरा बढ़ गया है। इससे प्रशासन और बाढ़ खंड विभाग के अधिकारी परेशान हैं।वहीं बांध से सुरक्षित करीब डेढ़ किमी के क्षेत्र के सात गांवों में भी खलबली मच गई है। तटबंध अगर, टूटता है तो इन गांवों का बचना मुश्किल हो जाएगा। डीएम अवनीश राय ने दो दिन पहले जामुनी गांव का दौरा भी किया था।
तटबंध के भीतर के चार गांव तेलिया नगला, खागी नगला, भमरौलिया व तोफिया नगला अब भी पानी से घिरे हुए हैं। इन गांवों में बिना पानी पार किए नहीं जा सकते। इन गांवों के ग्रामीण तटबंध पर परिवार के साथ डेरा जमाए हुए हैं। कुछ ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर गांव से अपने पशु निकाल लाए हैं, वहीं कुछ ग्रामीणों के पशु अब भी गांवों में ही हैं। तीसरे दिन रविवार को भी गंगा-महावा तटबंध को बचाने के लिए दर्जनों श्रमिक लगे रहे। अगर, यह बांध गंगा ने तोड़ा तो बांध के डेढ़ किमी के दायरे में जामुनी, खिरकबारी, मानपुर पुख्ता, औरंगाबाद, धापड़, नगलावरन, जरीफपुर गड़िया, सिठौलिया पुख्ता को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा। यह सभी गांव आपस में 500 मीटर के फासले पर हैं।






एक माह से आश्रय स्थल पर हैं बाढ़ पीड़ितों के 55 परिवार



उसहैत। नगला शिंभू में बनाए गए आश्रय स्थल पर करीब एक माह से बाढ़ ग्रस्त 55 परिवार परेशान हाल हैं। उन्हें अपने घर और गांव की चिंता सता रही है। हालांकि प्रशासन ने उनको राहत सामग्री के अलावा उनके पशुओं के लिए भूसा भी उपलब्ध कराया है। गांव जटा और प्रेमी नगला गांवों के आसपास अत्याधिक पानी है। कुछ ग्रामीणों के पशु गांव में ही रह गए हैं। लोग नावों से उन्हें देखने जाते हैं।




अहमदनगर बछौरा में गंगा का कटान लंबे समय से जारी है, जो कभी तेज और कभी हल्का हो जाता है। अटैना पुल के पास श्मशान घाट कटान की चपेट में आ गया है। यहां कटान न हो इसके लिए लोग पेड़ों की टहनियां और बालू भरे बोरे डालकर कटान पर काबू पाने का प्रयास कर रहे हैं। संवाद

सहसवान के तटबंध पर पन्नी और त्रिपालों के घरों में रह रहे बाढ़ पीड़ित। संवाद

सहसवान के तटबंध पर पन्नी और त्रिपालों के घरों में रह रहे बाढ़ पीड़ित। संवाद

सहसवान के तटबंध पर पन्नी और त्रिपालों के घरों में रह रहे बाढ़ पीड़ित। संवाद

सहसवान के तटबंध पर पन्नी और त्रिपालों के घरों में रह रहे बाढ़ पीड़ित। संवाद

सहसवान के तटबंध पर पन्नी और त्रिपालों के घरों में रह रहे बाढ़ पीड़ित। संवाद

सहसवान के तटबंध पर पन्नी और त्रिपालों के घरों में रह रहे बाढ़ पीड़ित। संवाद

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