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जरा संभलकर चलें, मक्का सूख रही है सड़क पर
Updated Sun, 18 Jun 2017 05:59 PM IST
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उझानी (बदायूं)।
इलाके में बिल्सी रोड समेत करीब एक दर्जन संपर्क मार्ग इन दिनों किसानों के कब्जे में है। सुबह से ही मक्का को सड़क पर फैलाकर सुखाने के लिए डाल दिया तो जरूर जाता है, लेकिन किसी को बाइक समेत वाहन सवार लोगों की जिंदगी की परवाह नहीं। सड़क के आधे हिस्से पर फैली मक्का से बचने के लिए बाइक चालक को खुद ही बचना होगा। जरा सी भी चूक हुई तो जिंदगी खतरे में पड़ते देर नहीं लगेगी।
मक्का सुखाने के लिए सड़क पर कब्जा जमाने में कोई एक नहीं बल्कि अनगिनत किसान हैं। तड़के ही मक्का लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डनलप-बैलगाड़ियों को अनलोड कर दिए जाने को सिलसिला पिछले दिनों शुरू हुआ। संजरपुर रोड पर उझानी से चलकर बिल्सी की ओर निकलते ही सड़क पर मक्का के सिवाय कुछ और नजर नहीं आता। कई स्थानों पर तो मक्का फैलाकर बाकी बचे सड़क के हिस्से पर ईंट-पत्थर के अवरोधक लगे मिलेंगे। कमोबेश ऐसा ही नजारा इलाके के करीब एक दर्जन संपर्क मार्गों पर देखने को मिल जाता है। बाइक चालक की नजर अवरोधक पर नहीं पड़ी तो फिसलकर मक्का पर गिरेंगे। ऐसे में बाइक सवारों का लहूलुहान होना भी लाजिमी समझिए। चोट ज्यादा गंभीर लगने पर जान भी जा सकती है। रविवार को बिल्सी की ओर निकले बाइक सवार दंपति अढौली निवासी हरीओम और रेखा ने बताया कि उन्हें रोहान तक आठ किलोमीटर का सफर तय करने में करीब आधा घंटा लग गया। जरा सा चूक जाते तो फिसलने से कोई बचा नहीं पाता। राहगीरों की जान पर जोखिम के बाद भी अफसर गौर नहीं करते।
इंसेट
पिछले साल फिसलकर घायल हुए थे कई बाइक सवार
उझानी। सड़क पर मक्का सुखाने को लेकर पिछले साल खासकर उझानी-बिल्सी रोड पर सर्वाधिक हादसे हुए। बाइक फिसलने से घायल रिसौली के तीन युवकों को तो बरेली तक जाकर इलाज कराना पड़ा। उघैती का दंपति और संजरपुर का छात्र भी घायल हो गया था। घायलों ने मक्का के सीजन में उस वक्त भी सड़क को कब्जामुक्त कराने की आवाज उठाई। तत्कालीन एसडीएम जंग बहादुर सिंह ने पीडब्ल्यूडी को कार्रवाई का आदेश भी दिया था, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
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इलाके में बिल्सी रोड समेत करीब एक दर्जन संपर्क मार्ग इन दिनों किसानों के कब्जे में है। सुबह से ही मक्का को सड़क पर फैलाकर सुखाने के लिए डाल दिया तो जरूर जाता है, लेकिन किसी को बाइक समेत वाहन सवार लोगों की जिंदगी की परवाह नहीं। सड़क के आधे हिस्से पर फैली मक्का से बचने के लिए बाइक चालक को खुद ही बचना होगा। जरा सी भी चूक हुई तो जिंदगी खतरे में पड़ते देर नहीं लगेगी।
मक्का सुखाने के लिए सड़क पर कब्जा जमाने में कोई एक नहीं बल्कि अनगिनत किसान हैं। तड़के ही मक्का लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डनलप-बैलगाड़ियों को अनलोड कर दिए जाने को सिलसिला पिछले दिनों शुरू हुआ। संजरपुर रोड पर उझानी से चलकर बिल्सी की ओर निकलते ही सड़क पर मक्का के सिवाय कुछ और नजर नहीं आता। कई स्थानों पर तो मक्का फैलाकर बाकी बचे सड़क के हिस्से पर ईंट-पत्थर के अवरोधक लगे मिलेंगे। कमोबेश ऐसा ही नजारा इलाके के करीब एक दर्जन संपर्क मार्गों पर देखने को मिल जाता है। बाइक चालक की नजर अवरोधक पर नहीं पड़ी तो फिसलकर मक्का पर गिरेंगे। ऐसे में बाइक सवारों का लहूलुहान होना भी लाजिमी समझिए। चोट ज्यादा गंभीर लगने पर जान भी जा सकती है। रविवार को बिल्सी की ओर निकले बाइक सवार दंपति अढौली निवासी हरीओम और रेखा ने बताया कि उन्हें रोहान तक आठ किलोमीटर का सफर तय करने में करीब आधा घंटा लग गया। जरा सा चूक जाते तो फिसलने से कोई बचा नहीं पाता। राहगीरों की जान पर जोखिम के बाद भी अफसर गौर नहीं करते।
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पिछले साल फिसलकर घायल हुए थे कई बाइक सवार
उझानी। सड़क पर मक्का सुखाने को लेकर पिछले साल खासकर उझानी-बिल्सी रोड पर सर्वाधिक हादसे हुए। बाइक फिसलने से घायल रिसौली के तीन युवकों को तो बरेली तक जाकर इलाज कराना पड़ा। उघैती का दंपति और संजरपुर का छात्र भी घायल हो गया था। घायलों ने मक्का के सीजन में उस वक्त भी सड़क को कब्जामुक्त कराने की आवाज उठाई। तत्कालीन एसडीएम जंग बहादुर सिंह ने पीडब्ल्यूडी को कार्रवाई का आदेश भी दिया था, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
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