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Budaun News: 14 मीट्रिक टन गैस का प्रतिदिन होता है उत्पादन
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मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव सैजनी के पास स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीस
बदायूं। सूत्रों के अनुसार प्लांट में धान की पराली से संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) का उत्पादन किया जाता है। इसकी प्रोसेसिंग क्षमता लगभग 100 मीट्रिक टन प्रतिदिन पराली की है, जिससे करीब 14 मीट्रिक टन प्रतिदिन गैस का उत्पादन होता है।
यह गैस सीएनजी के विकल्प के रूप में वाहनों के ईंधन और अन्य ऊर्जा जरूरतों में उपयोग की जाती है। इसके साथ ही प्लांट से प्रतिदिन करीब 65 टन ठोस जैविक खाद भी तैयार होती है, जिसका उपयोग कृषि कार्यों में किया जाता है। इस प्लांट में पंजाब, पीलीभीत समेत विभिन्न जिलों से धान की पराली लाकर उसका प्रसंस्करण किया जाता था।
पराली प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा की बड़ी परियोजना
एचपीसीएल का यह बायोगैस प्लांट पराली प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इस परियोजना से क्षेत्र में करीब 17,500 से 20,000 एकड़ खेतों में पराली जलाने की समस्या को कम करने में भी मदद मिलती है। संवाद
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प्लांट में अब भी चल रहा है निर्माणकार्य
इस प्लांट में अभी भी निर्माण कार्य चल रहा है। इसका हिस्सा अधूरा पड़ा है। प्लांट तक तो रास्ता पक्का बना है लेकिन उसके किनारे कच्चा रास्ता है।
पीएम मोदी भी कर चुके है प्लांट का जिक्र
पीएम मोदी ने भी बीते साल इस प्लांट का जिक्र एक कार्यक्रम के दौरान किया था। इसके साथ ही बीते साल यहां पर आग लगने भी घटना सामने आ चुकी है।
निवेशकों का भरोसा प्रभावित होने का खतरा
बदायूं। जहां यह बायोगैस प्लांट स्थापित है, उससे लगभग छह किलोमीटर की दूरी से गंगा एक्सप्रेस-वे गुजर रहा है। प्रदेश सरकार एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। लेकिन प्लांट में हुई इस घटना के बाद व्यापारिक और औद्योगिक जगत में जिले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर सख्ती से अंकुश नहीं लगाया गया तो निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। संवाद
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यह गैस सीएनजी के विकल्प के रूप में वाहनों के ईंधन और अन्य ऊर्जा जरूरतों में उपयोग की जाती है। इसके साथ ही प्लांट से प्रतिदिन करीब 65 टन ठोस जैविक खाद भी तैयार होती है, जिसका उपयोग कृषि कार्यों में किया जाता है। इस प्लांट में पंजाब, पीलीभीत समेत विभिन्न जिलों से धान की पराली लाकर उसका प्रसंस्करण किया जाता था।
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पराली प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा की बड़ी परियोजना
एचपीसीएल का यह बायोगैस प्लांट पराली प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इस परियोजना से क्षेत्र में करीब 17,500 से 20,000 एकड़ खेतों में पराली जलाने की समस्या को कम करने में भी मदद मिलती है। संवाद
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प्लांट में अब भी चल रहा है निर्माणकार्य
इस प्लांट में अभी भी निर्माण कार्य चल रहा है। इसका हिस्सा अधूरा पड़ा है। प्लांट तक तो रास्ता पक्का बना है लेकिन उसके किनारे कच्चा रास्ता है।
पीएम मोदी भी कर चुके है प्लांट का जिक्र
पीएम मोदी ने भी बीते साल इस प्लांट का जिक्र एक कार्यक्रम के दौरान किया था। इसके साथ ही बीते साल यहां पर आग लगने भी घटना सामने आ चुकी है।
निवेशकों का भरोसा प्रभावित होने का खतरा
बदायूं। जहां यह बायोगैस प्लांट स्थापित है, उससे लगभग छह किलोमीटर की दूरी से गंगा एक्सप्रेस-वे गुजर रहा है। प्रदेश सरकार एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। लेकिन प्लांट में हुई इस घटना के बाद व्यापारिक और औद्योगिक जगत में जिले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर सख्ती से अंकुश नहीं लगाया गया तो निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। संवाद

मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव सैजनी के पास स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीस