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कलियुग में भगवत चरणों को प्राप्त करने का साधन एकमात्र हरी नाम
Updated Thu, 29 Nov 2018 06:59 PM IST
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कलियुग में भगवत चरणों को प्राप्त करने का एकमात्र साधन हरि नाम
वजीरगंज। श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को कथा व्यास ब्रह्मस्वरूप ने श्रीकृष्ण जन्म की लीला का मनोहारी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है तब सज्जनों का कल्याण और राक्षसों का वध करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं।
उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवत चरणों को प्राप्त करने का साधन एकमात्र साधन हरि नाम है। हमें भगवान से भक्ति के अतिरिक्त और कुछ नहीं मांगना चाहिए। कथा के दौरान फल, फूल, गुब्बारों और टॉफियों से सजे सत्संग पंडाल में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। सबने पुष्प वर्षा की।
इस अवसर पर नारायण स्वामी, रोहतास गिरी, विष्णु दास, आचार्य रविकांत, शिवओम शास्त्री, आचार्य शशिकांत, मोहित शास्त्री आदि रहे। ब्यूरो
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कलियुग में भगवत चरणों को प्राप्त करने का एकमात्र साधन हरि नाम
वजीरगंज। श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को कथा व्यास ब्रह्मस्वरूप ने श्रीकृष्ण जन्म की लीला का मनोहारी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है तब सज्जनों का कल्याण और राक्षसों का वध करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं।
उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवत चरणों को प्राप्त करने का साधन एकमात्र साधन हरि नाम है। हमें भगवान से भक्ति के अतिरिक्त और कुछ नहीं मांगना चाहिए। कथा के दौरान फल, फूल, गुब्बारों और टॉफियों से सजे सत्संग पंडाल में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। सबने पुष्प वर्षा की।
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इस अवसर पर नारायण स्वामी, रोहतास गिरी, विष्णु दास, आचार्य रविकांत, शिवओम शास्त्री, आचार्य शशिकांत, मोहित शास्त्री आदि रहे। ब्यूरो