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Budaun News: सोनबूढ़ी और जामनी के 130 परिवार बेघर, तिरपाल के नीचे गुजारी रात
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जरीफनगर के सोन बूढ़ी में तिरपाल लगाकर रहते अग्नि पीड़ित परिवार के लोग। संवाद
- फोटो : संवाद
जरीफनगर/सहसवान। सोनबूढ़ी और जामनी गांव में आग लगने से 130 घरों राख गए। घटना के तीसरे दिन इन घरों में रहने वाले लोग तिरपाल में पड़ोसी के घर में रात गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन स्तर से मदद नहीं मिल रही है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
सोनाबूढ़ी गांव के राकेश ने बताया कि आग लगने के बाद तहसील प्रशासन की टीम आई थी। उन्होंने सर्वे किया है, लेकिन तत्काल कोई सहायता नहीं दी है। गांव में 18 लोग ऐसे हैं, जिनके घर पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। वह तिरपाल के नीचे गुजारा कर रहे हैं। प्रधान मुनीश कश्यप का आरोप है कि तहसील की टीम ने ठीक से सर्वे नहीं किया है। गांव में 18 लोगों के घर पूरी तरह से जल गए हैं, लेकिन टीम ने सिर्फ सात लोगों के ही नाम दर्ज किए हैं। बताया कि गांव में समाजसेवी खाने की व्यवस्था कर रहे हैं।
इसी तरह जामनी गांव में भी लोगों को ठहरने व खाने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई। शुक्रवार को समाजसेवी डॉ. आईपी सिंह, तिलक सिंह भारती, ताराचंद, डॉ. स्वराज की ओर से मदद दी गई। इसके अलावा अन्य ग्रामीण भी अपने स्तर से पीड़ितों को सहायता दे रहे हैं। इधर, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा विभाग की टीम शुक्रवार को भी गांव में डटी रही। उन्होंने ग्रामीणों और पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया व दवाइयां वितरित कीं। अग्निपीड़ित परिवारों के नाते रिश्तेदार व अन्य गांवों के लोग उनको सांत्वना दे रहे हैं। रिश्तेदारों को अपनी बरबादी की दास्तां सुनाते ग्रामीणों की आंखों से कभी आंसू छलक जाते हैं या उनके चेहरे पर हादसे की भयावहता का खौफ दिखने लगता है।
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विधायक बोले, रात को किया था निरीक्षण
सहसवान विधानसभा क्षेत्र में सोनबूढ़ी गांव आता है। यहां पर सपा के विधायक बृजेश यादव ने बताया कि घटना वाली रात को ही निरीक्षण किया था। तहसील की टीम ने सर्वे किया है। उनकी मदद कराई जाएगी।
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जामनी के 69 पीड़ितों और सोनबूढ़ी के 20 लोगों को आर्थिक सहायता देने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। कोषागार से पीड़ितों के खातों में रुपये भी भेजे जा रहे हैं। कोटेदोरों को खाद्य सामग्री देने का निर्देश दिया है। - प्रेमपाल शर्मा, एसडीएम, सहसवान
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सोनाबूढ़ी गांव के राकेश ने बताया कि आग लगने के बाद तहसील प्रशासन की टीम आई थी। उन्होंने सर्वे किया है, लेकिन तत्काल कोई सहायता नहीं दी है। गांव में 18 लोग ऐसे हैं, जिनके घर पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। वह तिरपाल के नीचे गुजारा कर रहे हैं। प्रधान मुनीश कश्यप का आरोप है कि तहसील की टीम ने ठीक से सर्वे नहीं किया है। गांव में 18 लोगों के घर पूरी तरह से जल गए हैं, लेकिन टीम ने सिर्फ सात लोगों के ही नाम दर्ज किए हैं। बताया कि गांव में समाजसेवी खाने की व्यवस्था कर रहे हैं।
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इसी तरह जामनी गांव में भी लोगों को ठहरने व खाने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई। शुक्रवार को समाजसेवी डॉ. आईपी सिंह, तिलक सिंह भारती, ताराचंद, डॉ. स्वराज की ओर से मदद दी गई। इसके अलावा अन्य ग्रामीण भी अपने स्तर से पीड़ितों को सहायता दे रहे हैं। इधर, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा विभाग की टीम शुक्रवार को भी गांव में डटी रही। उन्होंने ग्रामीणों और पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया व दवाइयां वितरित कीं। अग्निपीड़ित परिवारों के नाते रिश्तेदार व अन्य गांवों के लोग उनको सांत्वना दे रहे हैं। रिश्तेदारों को अपनी बरबादी की दास्तां सुनाते ग्रामीणों की आंखों से कभी आंसू छलक जाते हैं या उनके चेहरे पर हादसे की भयावहता का खौफ दिखने लगता है।
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विधायक बोले, रात को किया था निरीक्षण
सहसवान विधानसभा क्षेत्र में सोनबूढ़ी गांव आता है। यहां पर सपा के विधायक बृजेश यादव ने बताया कि घटना वाली रात को ही निरीक्षण किया था। तहसील की टीम ने सर्वे किया है। उनकी मदद कराई जाएगी।
जामनी के 69 पीड़ितों और सोनबूढ़ी के 20 लोगों को आर्थिक सहायता देने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। कोषागार से पीड़ितों के खातों में रुपये भी भेजे जा रहे हैं। कोटेदोरों को खाद्य सामग्री देने का निर्देश दिया है। - प्रेमपाल शर्मा, एसडीएम, सहसवान

जरीफनगर के सोन बूढ़ी में तिरपाल लगाकर रहते अग्नि पीड़ित परिवार के लोग। संवाद- फोटो : संवाद

जरीफनगर के सोन बूढ़ी में तिरपाल लगाकर रहते अग्नि पीड़ित परिवार के लोग। संवाद- फोटो : संवाद