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बिना नीलामी के मंडी में बिक रहा गेहूं
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बदायूं। मंडी समिति के अधिकारियों और कर्मचारियों की आढ़तियों से सांठगांठ के चलते किसानों को जमकर लूटा जा रहा है। बिना मंडी क्रय केंद्र पर तौल कराए, बिना बोली लगाए किसानों का गेहूं आढ़तियों के यहां खरीदा जा रहा है। विभागीय सरपरस्ती का आलम ये है कि अधिकारी व कर्मचारी किसानों को नकद पेमेंट मिलने का लालच देकर गेहूं बिकवा रहे हैं, वहीं मंडी निरीक्षक अन्य कामों में खुद को व्यस्त दिखाकर अपने दायित्व से पल्ला झाड़ रहे हैं।
मजबूरी किसी को कुछ भी करा सकती है। यहीं हाल किसानों का भी है। परिवार, रिश्तेदारी में शादी होने को है, उनके पास धन का अभाव है, ऐसे में उनकी पूरी उम्मीद अपनी फसलों से है। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों का गेहूं खरीदा नहीं जा रहा है। अगर लिया भी जा रहा है तो पेमेंट के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में उनकी फसल के वाजिब दाम मिल सकें, इसके लिए किसानों ने मंडी समिति का रुख किया है, ताकि यदि मंडी समिति में पंजीकृत आढ़तियों के यहां पर किसानों की फसल की बोली लगेगी और उन्हें ठीक पैसे मिल जाएंगे, लेकिन बदायूं मंडी में ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। यहां पर किसानों से खुलेआम लूट हो रही है, क्योंकि मंडी में आढ़तियों से मिली भगत के चलते अधिकारी, कर्मचारी कमरों में आराम फरमा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले भर में 543 व्यापारियों का पंजीकरण है। इनमें से 10 आढ़ती बदायूं मंडी के भी पंजीकृत है, जो यहां पर खरीदारी करते हैं। हालांकि इनमें से अभी दो से तीन ही आढ़ती सक्रिय है, जो इस समय गेहूं की खरीद कर रहे हैं।
रोजाना हो रही दो सौ क्विंटल की खरीद
-मंडी समिति में दो सरकारी क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिन पर पंजीकृत किसानों से गेहूं की खरीद की जाती है। अगर कहीं दिक्कत न आए तो दो से तीन दिन के अंदर किसानों को पेमेंट कर दिया जाता है। हालांकि जिले में काफी किसानों को 10 से 15 दिनों से पेमेंट नहीं हो पा रहा है। ऐसे में किसान नकद पेमेंट के चक्कर में आढ़तियों के यहां गेहूं बेचने को मजबूर हैं। ऐसे में मंडी में रोजाना करीब डेढ़ से दो सौ क्विंटल गेहूं की खरीद आढ़तियों द्वारा की जा रही है।
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स्टाफ की कमी के चलते किसानों के गेहूं की बोली नहीं लग पा रही है। शुक्रवार से इस ओर ध्यान दिया जाएगा कि कोई भी किसान, जो आढ़तियों के यहां पर गेहूं बेचेगा, उनकी फसल की बोली लगवाई जाएगी।
जाए।
-केपी सिंह, मंडी निरीक्षक
आढ़तियों के यहां पर न के बराबर गेहूं आ रहा है। अगर किसान शिकायत करेगा, तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-प्रवीण कुुमार अवस्थी, सचिव, कृषि उत्पादन मंडी समिति
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मजबूरी किसी को कुछ भी करा सकती है। यहीं हाल किसानों का भी है। परिवार, रिश्तेदारी में शादी होने को है, उनके पास धन का अभाव है, ऐसे में उनकी पूरी उम्मीद अपनी फसलों से है। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों का गेहूं खरीदा नहीं जा रहा है। अगर लिया भी जा रहा है तो पेमेंट के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में उनकी फसल के वाजिब दाम मिल सकें, इसके लिए किसानों ने मंडी समिति का रुख किया है, ताकि यदि मंडी समिति में पंजीकृत आढ़तियों के यहां पर किसानों की फसल की बोली लगेगी और उन्हें ठीक पैसे मिल जाएंगे, लेकिन बदायूं मंडी में ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। यहां पर किसानों से खुलेआम लूट हो रही है, क्योंकि मंडी में आढ़तियों से मिली भगत के चलते अधिकारी, कर्मचारी कमरों में आराम फरमा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले भर में 543 व्यापारियों का पंजीकरण है। इनमें से 10 आढ़ती बदायूं मंडी के भी पंजीकृत है, जो यहां पर खरीदारी करते हैं। हालांकि इनमें से अभी दो से तीन ही आढ़ती सक्रिय है, जो इस समय गेहूं की खरीद कर रहे हैं।
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रोजाना हो रही दो सौ क्विंटल की खरीद
-मंडी समिति में दो सरकारी क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिन पर पंजीकृत किसानों से गेहूं की खरीद की जाती है। अगर कहीं दिक्कत न आए तो दो से तीन दिन के अंदर किसानों को पेमेंट कर दिया जाता है। हालांकि जिले में काफी किसानों को 10 से 15 दिनों से पेमेंट नहीं हो पा रहा है। ऐसे में किसान नकद पेमेंट के चक्कर में आढ़तियों के यहां गेहूं बेचने को मजबूर हैं। ऐसे में मंडी में रोजाना करीब डेढ़ से दो सौ क्विंटल गेहूं की खरीद आढ़तियों द्वारा की जा रही है।
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स्टाफ की कमी के चलते किसानों के गेहूं की बोली नहीं लग पा रही है। शुक्रवार से इस ओर ध्यान दिया जाएगा कि कोई भी किसान, जो आढ़तियों के यहां पर गेहूं बेचेगा, उनकी फसल की बोली लगवाई जाएगी।
जाए।
-केपी सिंह, मंडी निरीक्षक
आढ़तियों के यहां पर न के बराबर गेहूं आ रहा है। अगर किसान शिकायत करेगा, तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-प्रवीण कुुमार अवस्थी, सचिव, कृषि उत्पादन मंडी समिति