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टीचर कॉलोनी, यहां हर वक्त खतरे में जान
Updated Tue, 28 Nov 2017 11:47 PM IST
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जर्जर कालोनी का एक आवास।
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। जिला अस्पताल के सामने स्थित टीचर्स कॉलोनी में शिक्षा विभाग का स्टाफ जान जोखिम में डालकर रह रहा है। माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के कई लोग यहां परिवार समेत रहते हैं। यहां अक्सर छज्जे टूटकर गिरते रहते हैं। मेंटीनेंस के नाम पर कर्मचारियों के वेतन से कटौती के बावजूद विभाग ने बरसों से भवनों की मरम्मत नहीं कराई है। कर्मचारियों के परिवार खुद जरूरी मरम्मत करा लेते हैं।
टीचर्स कॉलोनी में माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मचारी संयुक्त रूप से रहते हैं। यहां करीब 23 आवास हैं। इनमें पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तो बाकी इससे उच्च श्रेणी के लिए आवंटित किए गए हैं। दोनों विभागों के कई द्वितीय और तृतीय श्रेणी कर्मचारी भी यहां परिवार के साथ रहते हैं। करीब पचास साल पुराने भवनों की हालत अब जीर्णशीर्ण है। अधिकतर की छत छटपकती है तो कई का प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। बरसात के मौसम में पुराने छज्जे अक्सर धड़ाम से गिर जाते हैं। फर्श भी ऊबड़खाबड़ हो चला है। दीवारों पर सीलन छाई रहती है। इसे दूर करने के तमाम उपाय बेकार जाते हैं। कर्मचारी निजी खर्च से हर साल पेंट कराते हैं पर सीलन की वजह से यह बेकार हो जाता है।
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नंदिनी की जान पर बन आई थी
पिछले साल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजेंद्र सिंह के घर के बाहरी हिस्से का छज्जा गिर गया था। अचानक हुई घटना में उनकी बेटी नंदिनी के सिर पर कई ईटें गिर गईं थीं। इससे सिर और कान के पास गहरी चोट लगी थी। उसे 12 टांके लगाए गए। नंदिनी की मां सरस्वती ने दिखाया कि बेटी के शरीर पर चोट के निशान आज भी मौजूद हैं।
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तबेला भी बना लिया है यहां
कैंपस के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपने कुनबे के साथ सरकारी आवास में रह रहे हैं। उन्होंने यहां कुछ भैंसें खरीदकर तबेला बना लिया है और दूध का व्यवसाय कर रहे हैं।
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एचआरए नहीं मिलता, मेंटीनेंस अलग देते हैं
कर्मचारियों ने बताया कि कॉलोनी में रहने की वजह से उनका हाउस एलाउंस नियमानुसार काट लिया जाता है। इसके अलावा उन्हें मेंटीनेंस चार्ज वेतन में अलग से कटवाना पड़ता है। चार्ज लेने के बावजूद सुविधा कोई नहीं है। बिजली का बिल सभी अपने मीटर के मुताबिक देते हैं। आजादी बस इतनी है कि मकान मालिक की चिकचिक से बचे हुए हैं।
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वर्जन
काफी समय से बजट न आने की वजह से मेंटीनेंस नहीं हो पाया है। भवन काफी पुराने हैं। इस बार मेंटीनेंस का एस्टीमेट बनाकर भेजेंगे। स्वीकृति मिली तो काम कराया जाएगा।
-मुन्ने अली, डीआईओएस
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टीचर्स कॉलोनी में माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मचारी संयुक्त रूप से रहते हैं। यहां करीब 23 आवास हैं। इनमें पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तो बाकी इससे उच्च श्रेणी के लिए आवंटित किए गए हैं। दोनों विभागों के कई द्वितीय और तृतीय श्रेणी कर्मचारी भी यहां परिवार के साथ रहते हैं। करीब पचास साल पुराने भवनों की हालत अब जीर्णशीर्ण है। अधिकतर की छत छटपकती है तो कई का प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। बरसात के मौसम में पुराने छज्जे अक्सर धड़ाम से गिर जाते हैं। फर्श भी ऊबड़खाबड़ हो चला है। दीवारों पर सीलन छाई रहती है। इसे दूर करने के तमाम उपाय बेकार जाते हैं। कर्मचारी निजी खर्च से हर साल पेंट कराते हैं पर सीलन की वजह से यह बेकार हो जाता है।
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नंदिनी की जान पर बन आई थी
पिछले साल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजेंद्र सिंह के घर के बाहरी हिस्से का छज्जा गिर गया था। अचानक हुई घटना में उनकी बेटी नंदिनी के सिर पर कई ईटें गिर गईं थीं। इससे सिर और कान के पास गहरी चोट लगी थी। उसे 12 टांके लगाए गए। नंदिनी की मां सरस्वती ने दिखाया कि बेटी के शरीर पर चोट के निशान आज भी मौजूद हैं।
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तबेला भी बना लिया है यहां
कैंपस के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपने कुनबे के साथ सरकारी आवास में रह रहे हैं। उन्होंने यहां कुछ भैंसें खरीदकर तबेला बना लिया है और दूध का व्यवसाय कर रहे हैं।
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एचआरए नहीं मिलता, मेंटीनेंस अलग देते हैं
कर्मचारियों ने बताया कि कॉलोनी में रहने की वजह से उनका हाउस एलाउंस नियमानुसार काट लिया जाता है। इसके अलावा उन्हें मेंटीनेंस चार्ज वेतन में अलग से कटवाना पड़ता है। चार्ज लेने के बावजूद सुविधा कोई नहीं है। बिजली का बिल सभी अपने मीटर के मुताबिक देते हैं। आजादी बस इतनी है कि मकान मालिक की चिकचिक से बचे हुए हैं।
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वर्जन
काफी समय से बजट न आने की वजह से मेंटीनेंस नहीं हो पाया है। भवन काफी पुराने हैं। इस बार मेंटीनेंस का एस्टीमेट बनाकर भेजेंगे। स्वीकृति मिली तो काम कराया जाएगा।
-मुन्ने अली, डीआईओएस