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शून्य बजट खेती से घटेगा किसानों का खर्च
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शून्य बजट खेती से घटेगा किसानों का खर्च
बिजनौर। जनपद में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। शून्य बजट खेती से फसलों के उत्पादन में आने वाला खर्च कम होने से किसानों की बचत बढ़ेगी। फसलों के लिए खेती में देशी बीज का प्रयोग किया जाएगा। प्राकृतिक खेती से उत्पादन में रासायनिक दवाइयों को प्रयोग नहीं होने से पर्यावरण भी अच्छा रहेगा। इसके लिए शासन व कृषि विभाग की ओर से लखनऊ में मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया गया है। जनपद में लौटने के लिए ये किसानों को जागरूक करेंगे।
जनपद में जैविक खेती के बाद प्राकृतिक खेती पर जोर दिया जाएगा। नमामि गंगे अभियान के तहत जनपद में करीब 42 गांवों की जमीन में जैविक खेती की जा रही है। जैविक खेती के उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही है। इसी क्रम में शासन व कृषि विभाग प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहा है। प्राकृतिक खेती में रासायनिक व जैविक उत्पादों का प्रयोग न होकर सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों से ही उत्पादन किया जाता है। अफसरों का कहना है कि पहले उत्पादन कम होता है, लेकिन खर्च शून्य होने के कारण बचत ज्यादा होती है। पर्यावरण भी अच्छा होता है। इसके लिए जनपद से तीन कृषि अधिकारियों को प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। ताकि वह जनपदों में अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर किसानों तक इस विधि को पहुंचाएं और अमल कराएं।
देशी बीज का किया जाएगा प्रयोग
प्रशिक्षण प्राप्त करके लौटे एसडीओ कृषि मनोज रावत ने बताया कि प्राकृतिक खेती में पारंपरिक व देशी बीजों का प्रयोग किया जाएगा। फसलों की बीमारी की रोकथाम के लिए कीटनाशकों के रूप में गोबर की खाद, कंपोस्ट, जीवाणु खाद, फसल अवशेष आदि का प्रयोग किया जाएगा। जीवाणुओं, मित्र कीट और जैविक कीटनाशक द्वारा फसलों को हानिकारक जीवाणुओं से बचाया जाता है।
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बिजनौर। जनपद में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। शून्य बजट खेती से फसलों के उत्पादन में आने वाला खर्च कम होने से किसानों की बचत बढ़ेगी। फसलों के लिए खेती में देशी बीज का प्रयोग किया जाएगा। प्राकृतिक खेती से उत्पादन में रासायनिक दवाइयों को प्रयोग नहीं होने से पर्यावरण भी अच्छा रहेगा। इसके लिए शासन व कृषि विभाग की ओर से लखनऊ में मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया गया है। जनपद में लौटने के लिए ये किसानों को जागरूक करेंगे।
जनपद में जैविक खेती के बाद प्राकृतिक खेती पर जोर दिया जाएगा। नमामि गंगे अभियान के तहत जनपद में करीब 42 गांवों की जमीन में जैविक खेती की जा रही है। जैविक खेती के उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही है। इसी क्रम में शासन व कृषि विभाग प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहा है। प्राकृतिक खेती में रासायनिक व जैविक उत्पादों का प्रयोग न होकर सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों से ही उत्पादन किया जाता है। अफसरों का कहना है कि पहले उत्पादन कम होता है, लेकिन खर्च शून्य होने के कारण बचत ज्यादा होती है। पर्यावरण भी अच्छा होता है। इसके लिए जनपद से तीन कृषि अधिकारियों को प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। ताकि वह जनपदों में अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर किसानों तक इस विधि को पहुंचाएं और अमल कराएं।
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देशी बीज का किया जाएगा प्रयोग
प्रशिक्षण प्राप्त करके लौटे एसडीओ कृषि मनोज रावत ने बताया कि प्राकृतिक खेती में पारंपरिक व देशी बीजों का प्रयोग किया जाएगा। फसलों की बीमारी की रोकथाम के लिए कीटनाशकों के रूप में गोबर की खाद, कंपोस्ट, जीवाणु खाद, फसल अवशेष आदि का प्रयोग किया जाएगा। जीवाणुओं, मित्र कीट और जैविक कीटनाशक द्वारा फसलों को हानिकारक जीवाणुओं से बचाया जाता है।
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