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Bijnor News: गजरौला शिव/बिजनौर - अकीदत से अदा की रमजान के पहले जुमे की नमाज
Sat, 25 Mar 2023 12:40 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sat, 25 Mar 2023 12:40 AM IST
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फोटो समाचार
- नमाज में मस्जिदों में दुआ के लिए उठे लाखों हाथ
- शहर की सभी मस्जिदों पर पुलिस व्यवस्था रही चाकचौबंद
संवाद न्यूज एजेंसी
गजरौला शिव/बिजनौर। पवित्र रमजान माह के पहले जुमे की नमाज शांति व अकीदत के साथ अदा की गई। अकीतदमंदों ने मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ी। महिलाओं ने घरों में रहकर जुमे की नमाज अदा की। मस्जिदों में मुल्क के लिए शांति व अमन की दुआ की गई। इस दौरान शहर की मस्जिदों पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस व्यवस्था चाकचौबंद रही। पहले रोजे का ठंडा दिन होने की वजह से बच्चों व बुजुर्गों ने भी रोजे रखे, तरावीह पढ़ी, मस्जिदों में नमाजियों की काफी संख्या रही।
नमाज से पूर्व सभी मस्जिदों में रमजान के पहले अशरे की फजीलत बयां की गई। उलेमा ने नमाजियों से बुराई का रास्ता छोड़ नेक काम करने की नसीहत दी। बिजनौर चाहशीरी जामा मस्जिद में नमाज से पूर्व नमाजियों को खिताब करते हुए इमाम मौलाना वरीस अहमद ने फरमाया कि यह अल्लाह का इनाम है कि उन्होंने हम सबको आज रमजान उल मुबारक के पहले रोजे व पहले जुमे की नमाज पढ़ने की तौफीक अदा फरमाई। उन्होंने कहा कि रमजान इबादत व रहमतों का खजाना है, रमजान सब्र का महीना है, सब्र का इनाम जन्नत है।
गजरौला शिव जामा मस्जिद के पेश इमाम मुफ्ती गयासुद्दीन ने फरमाया कि रमजान महीने में 29 या 30 रोजे रखे जाते हैं। इन्हें तीन अशरों में बांटा गया है। शुरुआती के दस दिन पहला अशरा कहलाते हैं, 11 वे दिन से 20 वे दिन तक दूसरा आशरा और 21 वे दिन से 29 वे या 30 वे दिन तक तीसरा अशरा होता है। उन्होंने कहा कि पहला अशरा रमजान के महीने के पहले दिनों को रहमन के दिन कहा जाता है। कहा जाता है कि इन 10 दिनों में मुसलमान जितने नेक काम करता है, जरूरतमंदों की मदद करता है, उन्हें दान देता है, लोगों के साथ प्रेम पूर्वक व्यवहार करता है, अपने उन बाशिंदों पर अल्लाह अपनी रहमत बरसाते हैं।
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बिजनौर की काजीपाड़ा मरकज वाली मस्जिद, सिविल लाइंस की तकिया वाली मस्जिद, स्टेशन वाली मस्जिद, कचहरी वाली मस्जिद, जजी चौक वाली मस्जिद आदि शहर की मस्जिदों में रमजान के पहले जुमे की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने मुल्क में अमन व शांति के लिए दुआएं मांगी। महिलाओं ने घरों में रहकर जुमे की नमाज अदा की। इस दौरान मस्जिदों में नमाजियों की काफी संख्या देखी गई। इस दौरान शहर की चाहशीरी जामा मस्जिद पर एसपी सिटी डा. प्रवीण रंजन पुलिस के साथ मौजूद रहे। सभी मस्जिदों पर पुलिस व्यवस्था चाकचौबंद रही। गजरौला शिव, जंदरपुर, मंडावली सैदू, झलरा आदि देहात क्षेत्रों की मस्जिदों में भी रमजान माह के पहले जुमे की नमाज के लिए मस्जिदों में भारी भीड़ रही, इस दौरान हजारों लोगों ने हाथ उठाकर दुआ मांगी।
पहले जुमे को मस्जिदों में उमड़े नमाजी
नींदडू। रमजान के पहले रोजे में जुमे की नमाज अदा करने के लिए बड़ी तादाद में नमाजी मस्जिदों में उमडे़। जामा मस्जिद, मस्जिद जीनतुल इस्लाम, मदीना मस्जिद, मस्जिद पीर फतह अली शाह, मस्जिद अबुबक्र, मोती मस्जिद, बिलाल मस्जिद, मस्जिद सादात, सुनहरी मस्जिद, शाही मस्जिद और मोहम्मदी मस्जिद आदि में मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआ मांगी गई। जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मुजम्मिल हुसैन कासमी ने कहा कि नमाज, जकात, फितरा, सदका और हज आदि सभी इबादतों का बदला अल्लाह तआला फरिश्तों के माध्यम से दिलवाएंगे, लेकिन रोजा एकमात्र ऐसी इबादत है, जिसका बदला स्वयं देंगे। ऐसा इसलिए कि नमाज पढ़ने, जकात देने, खैरात करने और हज अदा करने को लोग देखते हैं। सदका व जकात को कोई न भी देखे, तो जिसे दिया जा रहा है, वह देखता है, लेकिन रोजे को न तो कोई देखता है और नही इसमें किसी प्रकार का दिखावा होता है। रोजे का इल्म रोजेदार या अल्लाह के अलावा किसी दूसरे को नहीं होता।
जकात निकालने पर दिया जोर
कासमपुर गढ़ी। जामा मस्जिद में मुफ्ती मोहम्मद शाहिद ने जुमे की नमाज अदा कराई। मुफ्ती मोहम्मद शाहिद ने नमाज से पूर्व अपने बयान में जकात के ऊपर रोशनी डालते हुए कहा कि खैरात, जकात निकालने, खर्च करने से दौलत में कमी नहीं होती है, बल्कि उसमें बढ़ोतरी होती है।शाहिबे माल यानी जो मालदार लोग हैं अपनी हैसियत के अनुसार एक लाख रुपये पर ढाई हजार रुपये गरीब, मजबूर लोगों पर खर्च करें जिससे वह भी रमजान में अपने परिवार पर अच्छी तरह से खर्च कर सकें।
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- नमाज में मस्जिदों में दुआ के लिए उठे लाखों हाथ
- शहर की सभी मस्जिदों पर पुलिस व्यवस्था रही चाकचौबंद
संवाद न्यूज एजेंसी
गजरौला शिव/बिजनौर। पवित्र रमजान माह के पहले जुमे की नमाज शांति व अकीदत के साथ अदा की गई। अकीतदमंदों ने मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ी। महिलाओं ने घरों में रहकर जुमे की नमाज अदा की। मस्जिदों में मुल्क के लिए शांति व अमन की दुआ की गई। इस दौरान शहर की मस्जिदों पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस व्यवस्था चाकचौबंद रही। पहले रोजे का ठंडा दिन होने की वजह से बच्चों व बुजुर्गों ने भी रोजे रखे, तरावीह पढ़ी, मस्जिदों में नमाजियों की काफी संख्या रही।
नमाज से पूर्व सभी मस्जिदों में रमजान के पहले अशरे की फजीलत बयां की गई। उलेमा ने नमाजियों से बुराई का रास्ता छोड़ नेक काम करने की नसीहत दी। बिजनौर चाहशीरी जामा मस्जिद में नमाज से पूर्व नमाजियों को खिताब करते हुए इमाम मौलाना वरीस अहमद ने फरमाया कि यह अल्लाह का इनाम है कि उन्होंने हम सबको आज रमजान उल मुबारक के पहले रोजे व पहले जुमे की नमाज पढ़ने की तौफीक अदा फरमाई। उन्होंने कहा कि रमजान इबादत व रहमतों का खजाना है, रमजान सब्र का महीना है, सब्र का इनाम जन्नत है।
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गजरौला शिव जामा मस्जिद के पेश इमाम मुफ्ती गयासुद्दीन ने फरमाया कि रमजान महीने में 29 या 30 रोजे रखे जाते हैं। इन्हें तीन अशरों में बांटा गया है। शुरुआती के दस दिन पहला अशरा कहलाते हैं, 11 वे दिन से 20 वे दिन तक दूसरा आशरा और 21 वे दिन से 29 वे या 30 वे दिन तक तीसरा अशरा होता है। उन्होंने कहा कि पहला अशरा रमजान के महीने के पहले दिनों को रहमन के दिन कहा जाता है। कहा जाता है कि इन 10 दिनों में मुसलमान जितने नेक काम करता है, जरूरतमंदों की मदद करता है, उन्हें दान देता है, लोगों के साथ प्रेम पूर्वक व्यवहार करता है, अपने उन बाशिंदों पर अल्लाह अपनी रहमत बरसाते हैं।
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बिजनौर की काजीपाड़ा मरकज वाली मस्जिद, सिविल लाइंस की तकिया वाली मस्जिद, स्टेशन वाली मस्जिद, कचहरी वाली मस्जिद, जजी चौक वाली मस्जिद आदि शहर की मस्जिदों में रमजान के पहले जुमे की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने मुल्क में अमन व शांति के लिए दुआएं मांगी। महिलाओं ने घरों में रहकर जुमे की नमाज अदा की। इस दौरान मस्जिदों में नमाजियों की काफी संख्या देखी गई। इस दौरान शहर की चाहशीरी जामा मस्जिद पर एसपी सिटी डा. प्रवीण रंजन पुलिस के साथ मौजूद रहे। सभी मस्जिदों पर पुलिस व्यवस्था चाकचौबंद रही। गजरौला शिव, जंदरपुर, मंडावली सैदू, झलरा आदि देहात क्षेत्रों की मस्जिदों में भी रमजान माह के पहले जुमे की नमाज के लिए मस्जिदों में भारी भीड़ रही, इस दौरान हजारों लोगों ने हाथ उठाकर दुआ मांगी।
पहले जुमे को मस्जिदों में उमड़े नमाजी
नींदडू। रमजान के पहले रोजे में जुमे की नमाज अदा करने के लिए बड़ी तादाद में नमाजी मस्जिदों में उमडे़। जामा मस्जिद, मस्जिद जीनतुल इस्लाम, मदीना मस्जिद, मस्जिद पीर फतह अली शाह, मस्जिद अबुबक्र, मोती मस्जिद, बिलाल मस्जिद, मस्जिद सादात, सुनहरी मस्जिद, शाही मस्जिद और मोहम्मदी मस्जिद आदि में मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआ मांगी गई। जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मुजम्मिल हुसैन कासमी ने कहा कि नमाज, जकात, फितरा, सदका और हज आदि सभी इबादतों का बदला अल्लाह तआला फरिश्तों के माध्यम से दिलवाएंगे, लेकिन रोजा एकमात्र ऐसी इबादत है, जिसका बदला स्वयं देंगे। ऐसा इसलिए कि नमाज पढ़ने, जकात देने, खैरात करने और हज अदा करने को लोग देखते हैं। सदका व जकात को कोई न भी देखे, तो जिसे दिया जा रहा है, वह देखता है, लेकिन रोजे को न तो कोई देखता है और नही इसमें किसी प्रकार का दिखावा होता है। रोजे का इल्म रोजेदार या अल्लाह के अलावा किसी दूसरे को नहीं होता।
जकात निकालने पर दिया जोर
कासमपुर गढ़ी। जामा मस्जिद में मुफ्ती मोहम्मद शाहिद ने जुमे की नमाज अदा कराई। मुफ्ती मोहम्मद शाहिद ने नमाज से पूर्व अपने बयान में जकात के ऊपर रोशनी डालते हुए कहा कि खैरात, जकात निकालने, खर्च करने से दौलत में कमी नहीं होती है, बल्कि उसमें बढ़ोतरी होती है।शाहिबे माल यानी जो मालदार लोग हैं अपनी हैसियत के अनुसार एक लाख रुपये पर ढाई हजार रुपये गरीब, मजबूर लोगों पर खर्च करें जिससे वह भी रमजान में अपने परिवार पर अच्छी तरह से खर्च कर सकें।