{"_id":"5772d9894f1c1be92979ad98","slug":"world-bank-team-said-wow-excellent-job","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व बैंक की टीम ने कहा, वाह, एक्सीलेंट जॉब ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व बैंक की टीम ने कहा, वाह, एक्सीलेंट जॉब
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Wed, 29 Jun 2016 01:39 AM IST
विज्ञापन
गांव में बनाए गए शौचालय के बारे में महिला से बात करते विश्व बैंक के प्रतिनिधि।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्व बैंक की टीम ने जिले में चल रहे खुले में शौच मुक्त अभियान यानि ओडीएफ की प्रगति को एक्सीलेंट बताया। बच्चों एवं महिलाओं की भूमिका की जमकर सराहना की। लंदन स्कूल ऑफ हाईजीन इन ट्रेपिकल मेडिसिन की विशेषज्ञ एमएस वाल कर्टिस ने कहा कि जिले में ओडीएफ के अंतर्गत हुए कार्य को रोल मॉडल के रूप में भारत में प्रस्तुत किया जाएगा। टीम ने तीन गांवों में अभियान की प्रगति का जायजा लिया।
केंद्र के स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में खुले में शौचमुक्त अभियान चल रहा है। विश्व बैंक के सहयोग से चलने वाले इस अभियान का स्पॉट जायजा लेने के लिए मंगलवार को दो सदस्यीय टीम बिजनौर पहुंची। टीम में शामिल विश्व बैंक के प्रतिनिधि मिस्टर रघु और हाईजीन विशेषज्ञ एमएस वाल कर्टिस ने मोहम्मदपुर देवमल ब्लाक के खेड़की हेमराज, शेखुपुरा और अकबरपुर देवीदासवाला का दौरा किया। टीम को बताया गया कि मई तक जिले में 166 गांव खुले में शौचमुक्त अर्थात ओडीएफ हो गए हैं।
26 जनवरी 2017 तक जिले के सभी गांवों को ओडीएफ बनाने का लक्ष्य है। टीम के सदस्य गांव शेखुपुरा निवासी हरिराम द्वारा झोपड़ी में बनाए गए शौचालय को देखकर बेहद प्रभावित हुए। बताया गया कि शौचालय निर्माण पर लागत मात्र 700 रुपये आई है। इस पर टीम के सदस्यों के मुंह से निकाल-वाऊ, एक्सीलेंट जॉब। स्वच्छता विशेषज्ञ एमएस वाल कर्टिस ने कम लागत में शौचालयों के मानक अनुरूप बनाने पर खुशी जताई।
विज्ञापन
डीएम बी चंद्रकला और अभियान में लगे अधिकारियों की पीठ थपथपाई। केंद्र सदस्यों ने कहा कि जिले में कम समय में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। जिले के कार्यों को रोल मॉडल बनाकर प्रस्तुत करने की जरूरत है। इस मौके पर डीएम बी चंद्रकला, सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, डीपीआरओ मनीष कुमार, डीडीओ अशोक निगम, सीवीओ डॉ. रविंद्र सिंह मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने छोड़ी अमिट छाप
विश्व बैंक टीम की सदस्य एमएस वाल कर्टिस का कहना था कि वह जिले में पहली बार आई हैं। हिंदुस्तानी परिवेश से वह प्रभावित हैं। ग्रामीणों द्वारा की गई आवभगत को वे दिल में संजोकर ले जा रहे हैं। ओडीएफ के कार्यों का शत प्रतिशत श्रेय डीएम बी चंद्रकला व अभियान से जुड़े अधिकारियों को जाता है।
बिजनौर बेहतर, अन्य क्यों नहीं
टीम सदस्यों ने कहा कि ओडीएफ में जब बिजनौर जिले में इतना अच्छा काम हो रहा है तो प्रदेश के अन्य जिलों में प्रगति संतोषजनक क्यों नहीं है? टीम लीडर ने कहा कि वे इस बिंदु को हाई लेविल मीटिंग में रखेंगे तथा जिले में अभियान में उठाए गए स्टेपों की जानकारी लेंगे।
विज्ञापन
केंद्र के स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में खुले में शौचमुक्त अभियान चल रहा है। विश्व बैंक के सहयोग से चलने वाले इस अभियान का स्पॉट जायजा लेने के लिए मंगलवार को दो सदस्यीय टीम बिजनौर पहुंची। टीम में शामिल विश्व बैंक के प्रतिनिधि मिस्टर रघु और हाईजीन विशेषज्ञ एमएस वाल कर्टिस ने मोहम्मदपुर देवमल ब्लाक के खेड़की हेमराज, शेखुपुरा और अकबरपुर देवीदासवाला का दौरा किया। टीम को बताया गया कि मई तक जिले में 166 गांव खुले में शौचमुक्त अर्थात ओडीएफ हो गए हैं।
विज्ञापन
26 जनवरी 2017 तक जिले के सभी गांवों को ओडीएफ बनाने का लक्ष्य है। टीम के सदस्य गांव शेखुपुरा निवासी हरिराम द्वारा झोपड़ी में बनाए गए शौचालय को देखकर बेहद प्रभावित हुए। बताया गया कि शौचालय निर्माण पर लागत मात्र 700 रुपये आई है। इस पर टीम के सदस्यों के मुंह से निकाल-वाऊ, एक्सीलेंट जॉब। स्वच्छता विशेषज्ञ एमएस वाल कर्टिस ने कम लागत में शौचालयों के मानक अनुरूप बनाने पर खुशी जताई।
विज्ञापन
डीएम बी चंद्रकला और अभियान में लगे अधिकारियों की पीठ थपथपाई। केंद्र सदस्यों ने कहा कि जिले में कम समय में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। जिले के कार्यों को रोल मॉडल बनाकर प्रस्तुत करने की जरूरत है। इस मौके पर डीएम बी चंद्रकला, सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, डीपीआरओ मनीष कुमार, डीडीओ अशोक निगम, सीवीओ डॉ. रविंद्र सिंह मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने छोड़ी अमिट छाप
विश्व बैंक टीम की सदस्य एमएस वाल कर्टिस का कहना था कि वह जिले में पहली बार आई हैं। हिंदुस्तानी परिवेश से वह प्रभावित हैं। ग्रामीणों द्वारा की गई आवभगत को वे दिल में संजोकर ले जा रहे हैं। ओडीएफ के कार्यों का शत प्रतिशत श्रेय डीएम बी चंद्रकला व अभियान से जुड़े अधिकारियों को जाता है।
बिजनौर बेहतर, अन्य क्यों नहीं
टीम सदस्यों ने कहा कि ओडीएफ में जब बिजनौर जिले में इतना अच्छा काम हो रहा है तो प्रदेश के अन्य जिलों में प्रगति संतोषजनक क्यों नहीं है? टीम लीडर ने कहा कि वे इस बिंदु को हाई लेविल मीटिंग में रखेंगे तथा जिले में अभियान में उठाए गए स्टेपों की जानकारी लेंगे।