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महिलाओं की नहीं आईटीआई में दिलचस्पी
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महिलाओं की नहीं आईटीआई में दिलचस्पी
बिजनौर। महिलाओं की आईटीआई कोर्सेज में दाखिला लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है। कम पढ़ी लिखी महिलाओं के लिए आईटीआई में कई कोर्स चल रहे हैं। परंतु महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें भी बड़ी संख्या में खाली रह जाती हैं। विभाग अब इन योजनाओं की जानकारी पंचायतों के माध्यम से गांव के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है।
आईटीआई में महिलाओं को हुनरमंद बनाने के लिए विभिन्न कोर्स चल रहे हैं। इनमें स्टेनो हिंदी, सिविंग टेक्नोलॉजी, बेसिक कोस्टोमोटोलॉजी अर्थात ब्यूटी पार्लर, कंप्यूटर टेक्नालॉजी, फैशन डिजाइनिंग, आदि कोर्स केवल महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इसके साथ पुरुषों के साथ अर्थात सह शिक्षा में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत सीट आरक्षित हैं। जिले में बिजनौर, नजीबाबाद, धामपुर, नगीना तथा अफजलगढ में आईटीआई संचालित हैं। अफजलगढ आईटीआई का भवन निर्माणाधीन है। इसलिए अफजलगढ आईटीआई के छात्र-छात्राएं राजकीय आईटीआई बिजनौर से संबद्ध हैं। पांचों आईटीआई में केवल महिलाओं के लिए विभिन्न ट्रेड में 504 सीट तथा सहशिक्षा में 298 सीट, कुल 802 सीट आरक्षित हैं।
आईटीआई बिजनौर के प्रधानाचार्य एवं आईटीआई के जिला नोडल अधिकारी मुकेश कुमार शर्मा बताते हैं कि सिविंग टेक्नोलॉजी अर्थात सिलाई कढ़ाई में दाखिला लेने की योग्यता कक्षा आठ पास है। अनुसूचित जाति की महिलाओं की सभी कोर्स में कोई फीस नहीं है। ओबीसी व जनरल के अभ्यर्थियों की फीस 40 रुपये प्रति माह है। प्रधान सहायक राकेश कुमार शर्मा के अनुसार महिलाओं की आरक्षित सीटें भी हर साल बड़ी संख्या में खाली रह जाती हैं। महिला सिलाई कढ़ाई कोर्स में आवेदन करती ही नहीं हैं। इसलिए सभी सीट खाली रह जाती हैं। अन्य सीट पर भी कमोबेश यही स्थिति है। विभाग पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से गांव-गांव महिलाओं को जागरूक करने की योजना बना रहा है।
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दाखिलों पर कोरोना का असर
आईटीआई के दाखिलों पर कोरोना का असर है। महिलाएं दाखिला लेने नहीं आ रही हैं। अभिभावक बालिकाओं को भी दाखिला नहीं दिला रहे हैं। कोरोना के कारण काफी सीटों पर पिछले साल दाखिले नहीं हुए थे। अभी कोरोना का खतरा टला नहीं है। शासन ने इस साल आईटीआई में 100 प्रतिशत जॉब गारंटी वाले कोर्स शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों में में अगस्त में दाखिले शुरू हो जाएंगे।
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बिजनौर। महिलाओं की आईटीआई कोर्सेज में दाखिला लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है। कम पढ़ी लिखी महिलाओं के लिए आईटीआई में कई कोर्स चल रहे हैं। परंतु महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें भी बड़ी संख्या में खाली रह जाती हैं। विभाग अब इन योजनाओं की जानकारी पंचायतों के माध्यम से गांव के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है।
आईटीआई में महिलाओं को हुनरमंद बनाने के लिए विभिन्न कोर्स चल रहे हैं। इनमें स्टेनो हिंदी, सिविंग टेक्नोलॉजी, बेसिक कोस्टोमोटोलॉजी अर्थात ब्यूटी पार्लर, कंप्यूटर टेक्नालॉजी, फैशन डिजाइनिंग, आदि कोर्स केवल महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इसके साथ पुरुषों के साथ अर्थात सह शिक्षा में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत सीट आरक्षित हैं। जिले में बिजनौर, नजीबाबाद, धामपुर, नगीना तथा अफजलगढ में आईटीआई संचालित हैं। अफजलगढ आईटीआई का भवन निर्माणाधीन है। इसलिए अफजलगढ आईटीआई के छात्र-छात्राएं राजकीय आईटीआई बिजनौर से संबद्ध हैं। पांचों आईटीआई में केवल महिलाओं के लिए विभिन्न ट्रेड में 504 सीट तथा सहशिक्षा में 298 सीट, कुल 802 सीट आरक्षित हैं।
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आईटीआई बिजनौर के प्रधानाचार्य एवं आईटीआई के जिला नोडल अधिकारी मुकेश कुमार शर्मा बताते हैं कि सिविंग टेक्नोलॉजी अर्थात सिलाई कढ़ाई में दाखिला लेने की योग्यता कक्षा आठ पास है। अनुसूचित जाति की महिलाओं की सभी कोर्स में कोई फीस नहीं है। ओबीसी व जनरल के अभ्यर्थियों की फीस 40 रुपये प्रति माह है। प्रधान सहायक राकेश कुमार शर्मा के अनुसार महिलाओं की आरक्षित सीटें भी हर साल बड़ी संख्या में खाली रह जाती हैं। महिला सिलाई कढ़ाई कोर्स में आवेदन करती ही नहीं हैं। इसलिए सभी सीट खाली रह जाती हैं। अन्य सीट पर भी कमोबेश यही स्थिति है। विभाग पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से गांव-गांव महिलाओं को जागरूक करने की योजना बना रहा है।
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दाखिलों पर कोरोना का असर
आईटीआई के दाखिलों पर कोरोना का असर है। महिलाएं दाखिला लेने नहीं आ रही हैं। अभिभावक बालिकाओं को भी दाखिला नहीं दिला रहे हैं। कोरोना के कारण काफी सीटों पर पिछले साल दाखिले नहीं हुए थे। अभी कोरोना का खतरा टला नहीं है। शासन ने इस साल आईटीआई में 100 प्रतिशत जॉब गारंटी वाले कोर्स शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों में में अगस्त में दाखिले शुरू हो जाएंगे।