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श्री मुक्तेश्वरनाथ मंदिर में मनोकामनाएं होती हैं पूरी
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नगीना में स्थित श्री मुक्तेश्वर नाथ मंदिर
- फोटो : BIJNOR
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श्री मुक्तेश्वरनाथ मंदिर में मनोकामनाएं होती हैं पूरी
नगीना। श्री मुक्तेश्वरनाथ मंदिर शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है। इसको बड़ा मंदिर भी कहते हैं। यहां शिवभक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाशिवरात्रि पर यहां लगभग एक लाख से अधिक कांवड़ चढ़ती रही हैं। मंदिर का इतिहास पांच सौ साल पुराना है। स्वयंभू शिवलिंग भूमिगत होने लगा था, जिस वजह से चांदी की परत से ढका गया है।
एक समय ऐसा भी था जब नगीना के श्रीमुक्तेश्वरनाथ मंदिर में मुरादाबाद बरेली तक के शिव भक्त पूजा अर्चना और कांवड़ लाकर जलाभिषेक करने के लिए पहुंचते थे। मान्यता है कि सच्चे मन से जो श्रद्धालु यहां आकर मन्नत मांगता है, वह अवश्य पूरी होती है। मौजूदा समय में भी 30 से 40 हजार कांवड़िये महाशिवरात्रि के मौके पर हरिद्वार से गंगाजल लाकर यहां चढ़ाते हैं। मंदिर के प्रबंधक लाला हरि गोपाल अग्रवाल, दीपक अग्रवाल आदि बताते हैं कि यह मंदिर करीब 500 वर्ष से भी अधिक पुराना है। मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। यह जनपद बिजनौर व मंडल का सबसे पहला एक मात्र शिवालय है, जहां पर वर्षों से ही जनपद व दूर-दराज के श्रद्धालु जलाभिषेक करते चले आ रहे हैं। वर्तमान में शिवलिंग भूमिगत होता जा रहा है, जिस कारण शिवलिंग पर चांदी का पत्र चढ़ाया गया है। श्रावण मास में यहां पर कुछ हरिद्वार निवासी श्रद्धालु भी जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
बर्फानी सेवा समिति के अध्यक्ष शितांशु अग्रवाल बताते है कि मंदिर प्रांगण में महाशिवरात्रि के अवसर पर बर्फानी सेवा समिति के कार्यकर्ताओं द्वारा मंदिर को सजाने के अलावा विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। बड़ा मंदिर श्रीमुक्तेश्वर नाथ के पुजारी डॉक्टर विपिन चंद्र त्रिपाठी बताते हैं की मंदिर सेवा में वह तीसरी पीढ़ी के रूप में पुजारी का कार्य कर रहे है। मान्यता रही है कि यहां जो भी श्रद्धालु मन्नत लेकर आता है, वह अवश्य पूरी होती है। मंदिर के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं को सुख की अनुभूति व मन की शांति मिलती है। वह बताते हैं कि महाशिवरात्रि पर शिव भक्तों के जलाभिषेक से पहले विशेष पूजा अर्चना व रुद्राभिषेक किया जाता है।
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नगीना। श्री मुक्तेश्वरनाथ मंदिर शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है। इसको बड़ा मंदिर भी कहते हैं। यहां शिवभक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाशिवरात्रि पर यहां लगभग एक लाख से अधिक कांवड़ चढ़ती रही हैं। मंदिर का इतिहास पांच सौ साल पुराना है। स्वयंभू शिवलिंग भूमिगत होने लगा था, जिस वजह से चांदी की परत से ढका गया है।
एक समय ऐसा भी था जब नगीना के श्रीमुक्तेश्वरनाथ मंदिर में मुरादाबाद बरेली तक के शिव भक्त पूजा अर्चना और कांवड़ लाकर जलाभिषेक करने के लिए पहुंचते थे। मान्यता है कि सच्चे मन से जो श्रद्धालु यहां आकर मन्नत मांगता है, वह अवश्य पूरी होती है। मौजूदा समय में भी 30 से 40 हजार कांवड़िये महाशिवरात्रि के मौके पर हरिद्वार से गंगाजल लाकर यहां चढ़ाते हैं। मंदिर के प्रबंधक लाला हरि गोपाल अग्रवाल, दीपक अग्रवाल आदि बताते हैं कि यह मंदिर करीब 500 वर्ष से भी अधिक पुराना है। मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। यह जनपद बिजनौर व मंडल का सबसे पहला एक मात्र शिवालय है, जहां पर वर्षों से ही जनपद व दूर-दराज के श्रद्धालु जलाभिषेक करते चले आ रहे हैं। वर्तमान में शिवलिंग भूमिगत होता जा रहा है, जिस कारण शिवलिंग पर चांदी का पत्र चढ़ाया गया है। श्रावण मास में यहां पर कुछ हरिद्वार निवासी श्रद्धालु भी जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
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बर्फानी सेवा समिति के अध्यक्ष शितांशु अग्रवाल बताते है कि मंदिर प्रांगण में महाशिवरात्रि के अवसर पर बर्फानी सेवा समिति के कार्यकर्ताओं द्वारा मंदिर को सजाने के अलावा विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। बड़ा मंदिर श्रीमुक्तेश्वर नाथ के पुजारी डॉक्टर विपिन चंद्र त्रिपाठी बताते हैं की मंदिर सेवा में वह तीसरी पीढ़ी के रूप में पुजारी का कार्य कर रहे है। मान्यता रही है कि यहां जो भी श्रद्धालु मन्नत लेकर आता है, वह अवश्य पूरी होती है। मंदिर के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं को सुख की अनुभूति व मन की शांति मिलती है। वह बताते हैं कि महाशिवरात्रि पर शिव भक्तों के जलाभिषेक से पहले विशेष पूजा अर्चना व रुद्राभिषेक किया जाता है।

नगीना के श्री मुक्तेश्वर नाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग- फोटो : BIJNOR
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