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वनों में बढ़ रहा वन्य जीवों का कुनबा
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अमानगढ़ के जंगल में पानी पीता बाघ।
- फोटो : BIJNOR
वनों में बढ़ रहा वन्य जीवों का कुनबा
बिजनौर। कोरोना की भेंट चढ़ा पिछला साल भले ही लोगों को घरों में कैद कर गया हो, लेकिन वन्य जीवों के लिए ये शानदार रहा। बाघ से लेकर हाथी और सारस तक का कुनबा जिले में बढ़ गया है। वन्य जीवों के संरक्षण की आदर्श स्थिति होने की वजह से यहां पर वन्य जीव लगातार बढ़ रहे हैं।
अमानगढ़ जिले की प्रमुख वन रेंज है। करीब दस हजार हेक्टेयर में फैली यह वन रेंज वन्य जीवों के लिए बहुत मुफीद है। यहां पर हाथी, बाघ, गुलदार, चीतल आदि की भरमार है। साल 2019 में अमानगढ़ वन रेंज में 22 बाघ मिले थे। 2020 में इनका कुनबा बढ़कर 24 हो गया। दो साल पहले हुई गणना में जिले में 104 सारस मिले थे। पिछले साल हुई गणना में इनकी संख्या भी बढ़कर 116 हो गई। अमानगढ़ वन रेंज में हाथियों का कुनबा भी 60 से बढ़कर 82 हो गया है। रेंज में हाथियों के बड़े-बड़े झुंड दिखते हैं। उत्तराखंड के जिम कार्बेट के हाथियों के झुंड भी अपनी प्यास बुझाने के लिए अमानगढ़ में ही आते हैं। अमानगढ़ हमेशा वन्य जीवों से गुलजार रहता है।
डॉल्फिन, घड़ियान का बढ़ रहा कुनबा
वन्य जीवों ही नहीं जलीय जीवों का भी कुनबा बढ़ा है। डब्लूडब्लूएफ की हैचरी में पैदा होने वाले कछुए के बच्चे लगातार गंगा में छोड़े जा रहे हैं। घड़ियाल भी छोड़े गए हैं। गंगा में डॉल्फिन का कुनबा भी लगातार बढ़ रहा है। वन्य जीव अब तक भले ही वनों के अंदर हों लेकिन वनों से बाहर खेतों में आकर गुलदार ने आतंक मचा रखा है। गुलदार ने पिछले साल भी दो लोगों की जान ली। गुलदार के आतंक से कुछ जगह किसानों ने भी हथियार उठाए और एक साल में दो गुलदार गांव वालों के गुस्से का शिकार होकर जान गंवा बैठे। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार वन्य जीवों से ही वनों की सुंदरता है। वन्य जीवों का कुनबा बढ़ रहा है। वन्य जीवों को कोई हानि न पहुंचाए। जहां गुलदार की आवक है वहां पर सतर्कता के साथ काम करें।
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बिजनौर। कोरोना की भेंट चढ़ा पिछला साल भले ही लोगों को घरों में कैद कर गया हो, लेकिन वन्य जीवों के लिए ये शानदार रहा। बाघ से लेकर हाथी और सारस तक का कुनबा जिले में बढ़ गया है। वन्य जीवों के संरक्षण की आदर्श स्थिति होने की वजह से यहां पर वन्य जीव लगातार बढ़ रहे हैं।
अमानगढ़ जिले की प्रमुख वन रेंज है। करीब दस हजार हेक्टेयर में फैली यह वन रेंज वन्य जीवों के लिए बहुत मुफीद है। यहां पर हाथी, बाघ, गुलदार, चीतल आदि की भरमार है। साल 2019 में अमानगढ़ वन रेंज में 22 बाघ मिले थे। 2020 में इनका कुनबा बढ़कर 24 हो गया। दो साल पहले हुई गणना में जिले में 104 सारस मिले थे। पिछले साल हुई गणना में इनकी संख्या भी बढ़कर 116 हो गई। अमानगढ़ वन रेंज में हाथियों का कुनबा भी 60 से बढ़कर 82 हो गया है। रेंज में हाथियों के बड़े-बड़े झुंड दिखते हैं। उत्तराखंड के जिम कार्बेट के हाथियों के झुंड भी अपनी प्यास बुझाने के लिए अमानगढ़ में ही आते हैं। अमानगढ़ हमेशा वन्य जीवों से गुलजार रहता है।
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डॉल्फिन, घड़ियान का बढ़ रहा कुनबा
वन्य जीवों ही नहीं जलीय जीवों का भी कुनबा बढ़ा है। डब्लूडब्लूएफ की हैचरी में पैदा होने वाले कछुए के बच्चे लगातार गंगा में छोड़े जा रहे हैं। घड़ियाल भी छोड़े गए हैं। गंगा में डॉल्फिन का कुनबा भी लगातार बढ़ रहा है। वन्य जीव अब तक भले ही वनों के अंदर हों लेकिन वनों से बाहर खेतों में आकर गुलदार ने आतंक मचा रखा है। गुलदार ने पिछले साल भी दो लोगों की जान ली। गुलदार के आतंक से कुछ जगह किसानों ने भी हथियार उठाए और एक साल में दो गुलदार गांव वालों के गुस्से का शिकार होकर जान गंवा बैठे। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार वन्य जीवों से ही वनों की सुंदरता है। वन्य जीवों का कुनबा बढ़ रहा है। वन्य जीवों को कोई हानि न पहुंचाए। जहां गुलदार की आवक है वहां पर सतर्कता के साथ काम करें।

कालागढ़ में लैंटाना घास के बीच से होकर गुजरता एक हाथी।- फोटो : BIJNOR
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