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गन्ने की फसल पर व्हाइट ग्रब का हमला
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गन्ने की फसल पर व्हाइट ग्रब का हमला
हल्दौर। क्षेत्र में गन्ने की फसल व्हाइट ग्रब की चपेट में आनी शुरू हो गई है। काफी छोटे आकार का यह कीट पौधों की चोटी को खाकर नष्ट कर देता है। प्रभावित फसल से सिरके जैसी एक खास किस्म की दुर्गंध आती है। किसानों को गन्ने की फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है।
क्षेत्र में गन्ने की फसल प्रमुखता के साथ उगाई जाती है। पैजनियां, मुकरपुर सत्ती, खासपुरा, गांवड़ी, नसीरपुर, हल्दौर, नांगलजट शरीफपुर मकरंदपुर आदि गांवों में कई किसानों की गन्ने की फसल में तना भेदक लगना शुरू हो गया है। कीट गन्ने के पौधे की चोटी में प्रवेश कर गोभ को नष्ट कर देता है, जिससे फसल की चोटी सूख जाती है। इसके चलते प्रभावित फसल की बढ़ोतरी रुक जाती है। कीट से प्रभावित पौधे की चोटी को ऊपर की तरफ खींचने पर आसानी से निकल जाती है। इससे सिरके की तरह की दुर्गंध आती है। चोटी भेदक कीट का प्रकोप बहुत ही तेजी से फैलता है। समय से इसकी रोकथाम नहीं की गई तो फसल की उत्पादन क्षमता को 25 से 30 प्रतिशत तक प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। किशनू सिंह, मदन पाल सिंह, मनोज त्यागी, अतुल त्यागी, प्रमोद कुमार चौहान, राजवीर सिंह आदि किसान फसल में लगे इस रोग से चिंतित हैं।
ऐसे करें फसल का बचाव
कृषि रक्षा इकाई प्रभारी राकेश राणा ने बताया कि इस कीट से प्रभावित खेत से खरपतवार को निकाल देना चाहिए। जैविक नियंत्रण के लिए फसल में ट्राइकोग्रामा कार्ड दो प्रति एकड़ के हिसाब से लगाना मुफीद रहता है। इस कार्ड को शाम के समय लगाया जाना चाहिए और कार्ड को लगाने के बाद किसी भी कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए। कीटनाशक का प्रयोग करने से कार्ड में मौजूद मित्र कीटों को नुकसान होता है। यदि किसान रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करना चाहता है तो थायामिथाक्सम एक किलो प्रति एकड़ बिखेरकर हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड या फ्यूराडान की छह से आठ किलो प्रति एकड़ की दर से डालने से भी टॉप बोरर पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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हल्दौर। क्षेत्र में गन्ने की फसल व्हाइट ग्रब की चपेट में आनी शुरू हो गई है। काफी छोटे आकार का यह कीट पौधों की चोटी को खाकर नष्ट कर देता है। प्रभावित फसल से सिरके जैसी एक खास किस्म की दुर्गंध आती है। किसानों को गन्ने की फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है।
क्षेत्र में गन्ने की फसल प्रमुखता के साथ उगाई जाती है। पैजनियां, मुकरपुर सत्ती, खासपुरा, गांवड़ी, नसीरपुर, हल्दौर, नांगलजट शरीफपुर मकरंदपुर आदि गांवों में कई किसानों की गन्ने की फसल में तना भेदक लगना शुरू हो गया है। कीट गन्ने के पौधे की चोटी में प्रवेश कर गोभ को नष्ट कर देता है, जिससे फसल की चोटी सूख जाती है। इसके चलते प्रभावित फसल की बढ़ोतरी रुक जाती है। कीट से प्रभावित पौधे की चोटी को ऊपर की तरफ खींचने पर आसानी से निकल जाती है। इससे सिरके की तरह की दुर्गंध आती है। चोटी भेदक कीट का प्रकोप बहुत ही तेजी से फैलता है। समय से इसकी रोकथाम नहीं की गई तो फसल की उत्पादन क्षमता को 25 से 30 प्रतिशत तक प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। किशनू सिंह, मदन पाल सिंह, मनोज त्यागी, अतुल त्यागी, प्रमोद कुमार चौहान, राजवीर सिंह आदि किसान फसल में लगे इस रोग से चिंतित हैं।
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ऐसे करें फसल का बचाव
कृषि रक्षा इकाई प्रभारी राकेश राणा ने बताया कि इस कीट से प्रभावित खेत से खरपतवार को निकाल देना चाहिए। जैविक नियंत्रण के लिए फसल में ट्राइकोग्रामा कार्ड दो प्रति एकड़ के हिसाब से लगाना मुफीद रहता है। इस कार्ड को शाम के समय लगाया जाना चाहिए और कार्ड को लगाने के बाद किसी भी कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए। कीटनाशक का प्रयोग करने से कार्ड में मौजूद मित्र कीटों को नुकसान होता है। यदि किसान रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करना चाहता है तो थायामिथाक्सम एक किलो प्रति एकड़ बिखेरकर हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड या फ्यूराडान की छह से आठ किलो प्रति एकड़ की दर से डालने से भी टॉप बोरर पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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