फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Wherever Jaharveer stayed, Mhadi became there.

जहां-जहां रुके जाहरवीर, वहीं बनी म्हाड़ी

Sun, 21 Aug 2022 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Aug 2022 12:21 AM IST
विज्ञापन
Wherever Jaharveer stayed, Mhadi became there.
जहां-जहां रुके जाहरवीर, वहीं बनी म्हाड़ी
विज्ञापन

बिजनौर। गुरु गोरखनाथ के संग गोगा जाहरवीर ने अफगानिस्तान से लेकर ईरान और कई अन्य देशों तक भ्रमण किया। जिन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के संदेश दिए। मुस्लिम में जाहरपीर जबकि हिंदुओं में गोगा जाहरवीर कहलाए। माना जाता है कि एक मुगल शासक की रानी को सांप ने डस लिया था, जिसे गंज में जाहरवीर की म्हाड़ी पर लाया गया तो जान बच गई थी। कहा जाता है कि वे जहां-जहां रुके, वहीं बन गई उनकी म्हाड़ी।
राजस्थान में जन्मे गोगा जाहरवीर की ननिहाल बिजनौर जिले के रेहड़ गांव में है। इनकी मां बाछल जिले जिस जगह भी गई, वहां अब मेले लगते हैं। गर्भावस्था में काफी समय बाछल अपने मायके रेहड़ में रहीं। रेहड़ के राजा कुंवरपाल की बेटी बाछल और कांछल का विवाह राजस्थान के चुरु जिले के ददरेजा गांव में राजा जेवर सिंह व उनके भाई राजकुमार नेबर सिंह से हुआ। बताया जाता है कि बाछल ने पुत्र की प्राप्ति के लिए गुरु गोरखनाथ की लंबे समय तक पूजा की। गोरखनाथ ने उन्हेें झोली से गूगल नामक औषधि दी। औषधि के नाम पर उनकी संतान का नाम गोगा हो गया। रानी बाछल ने बेटे का नाम जाहरवीर रखा। (संवाद)
विज्ञापन

शास्त्र और शस्त्र कला में निपुण थे जाहरवीर
बाछल ने जाहरवीर को वंश परंपरा के अनुसार शस्त्र कला सिखाई और विद्वान बनाया। जाहरवीर नीले घोड़े पर चढ़कर निकलते और मिल-जुलकर रहते। गुरु गोरखनाथ के ददरेजा आने पर जाहरवीर ने उनकी सेवा की और फिर उनकी जमात में निकल गए। गुरु के साथ वह काबुल, गजनी, इरान, अफगानिस्तान आदि देशों में घूमे। उनके उपदेश हिंदू-मुस्लिम एकता पर आधारित होते थे। भाषा के कारण वे मुस्लिमों में जाहरपीर हो गए। जाहरपीर का नीला घोड़ा और हाथ का निशान उनकी पहचान बन गए। मां बाछल ने किसी बात पर इन्हें घर नहीं आने की शपथ दी थी, लेकिन ये पत्नी से मिलने छिपकर महल आते। श्रावण मास की हरियाली तीज पर मां ने देख लिया और पीछा किया तो ये हनुमानगढ़ में एक जगह घोड़े समेत जमीन में समा गए। उस दिन भाद्रपद के कृष्णपक्ष की नवमी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

होती है मनोकामनाएं पूरी
जिस दंपती को संतान सुख नहीं मिलता, जाहरवीर गोगा जी की म्हाड़ी पर सच्चे मन से प्रार्थना करने पर मनकोमना पूरी हो जाती है। कहा जाता है कि जाहरवीर ने गर्भ में रहने के दौरान मां बाछल से कहा कि वह गंज में जाकर जात दें। बाछल ने जात दी। ये भी मान्यता है कि म्हाड़ी पर आकर प्रसाद चढ़ाने से सांप नहीं काटता और घर में सांप का वास नहीं होता। एक मुगल राजा की महारानी को सांप के काटने के बाद गंज की म्हाड़ी पर लाया गया था।
जात देने वालों का होता है अलग ड्रेस कोड
बारिश के मौसम में सर्प का प्रकोप ज्यादा होता है। इसलिए भी भक्त सांपों से बचाव के लिए म्हाड़ी पर प्रसाद चढ़ाने आते हैं। जात देने वाले बच्चे या व्यक्ति को सफेद या पीले कपड़े पहनाए जाते हैं। जात देने वाले के हाथ में जाहरदीवान का झंडा होता है।
गोगा जाहरवीर की ननिहाल में उमड़े श्रद्धालु
बिजनौर/रेहड़/नींदड़ू। गोगा जाहरवीर की ननिहाल में शनिवार को आस्था का संगम रहा। दरअसल रेहड़ गोगा जाहरवीर की ननिहाल रही है। रेहड़ के पास खैरादबाद में गोगा जाहरवीर की म्हाड़ी पर भाद्रप्रद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी को मेला लगता है, जबकि दारानगर गंज में श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। जिले में जहां भी गोगा जाहरवीर गए, वहां उनकी म्हाड़ी हैं और मेले का आयोजन होता है।

शनिवार को रेहड़ के पास बादीगढ़-कल्लूवाला मार्ग पर खैराबाद में स्थित जाहरवीर की म्हाड़ी पर दो दिवसीय मेला शुरू हुआ। बाबा राजेश नाथ ने बताया कि लोग दूरदराज से आते हैं। उधर, गांधी इंटर कॉलेज मनकुआं के बाग में लगने वाले एक दिवसीय वार्षिक नवमी मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने जाहरवीर की म्हाड़ी एवं पुराने शिव मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर परिवार की सुख-समृद्धि व बच्चों की दीर्घायु की कामना की।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed