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Bijnor News: सगी बहनों की चिता एक साथ जली तो छलक आईं लोगों की आंखें
Sun, 07 Dec 2025 11:22 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 07 Dec 2025 11:22 PM IST
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नगीना बुंदकी मार्ग पर हुई सड़क दुर्घटना में दो बहनों की मौत के बाद अंतिम संस्कार में श्मशान घाट
नगीना। सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाली गांव झिलमिला निवासी दो सगी बहनों के शवों का गमगीन माहौल में रविवार की दोपहर अंतिम संस्कार किया गया। दोनों बहनों की चिताओं को जब उनके चाचा ने मुखाग्नि दी तो गांव के लोगों की आंखें छलक आईं।
शनिवार की दोपहर छुट्टी के समय स्कूल से पढ़कर अपने घर वापस आ रही दो सगी बहनें पायल (14) व वंशिका (12) की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। दोनों के शवों का पोस्टमार्टम होने के बाद रविवार की दोपहर गांव में स्थित श्मशान घाट पर दोनों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया। उनके चाचा केशव ने मुखाग्नि दी। सड़क दुर्घटना में बाल-बाल बचा छोटा बालक हर्ष ही अब माता-पिता का अकेला सहारा रह गया है।
स्कूल के बाद चाऊमीन का ठेला लगाती थीं दोनों बहनें
ग्रामीण बताते हैं कि दोनों बहादुर बेटियां अपने परिवार की आर्थिक खराब स्थिति को भली-भांति जानती थी। पिता की मजदूरी से जब घर का गुजारा नहीं चल रहा था तो छुट्टी के बाद घर पहुंचकर दोनों बहनें परिवार के पालन-पोषण के लिए गांव में ही चाऊमीन का ठेला लगाती थीं। दोनों बहनों की मौत के बाद जिस किसी ने भी उनकी यह दास्तां सुनी, उसकी आंखें नम हो गईं। सीओ डाॅ. अंजनी कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि वह कोशिश करेंगे कि पीड़ित परिवार को किसी भी स्तर से आर्थिक मदद दिलाई जा सके।
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शनिवार की दोपहर छुट्टी के समय स्कूल से पढ़कर अपने घर वापस आ रही दो सगी बहनें पायल (14) व वंशिका (12) की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। दोनों के शवों का पोस्टमार्टम होने के बाद रविवार की दोपहर गांव में स्थित श्मशान घाट पर दोनों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया। उनके चाचा केशव ने मुखाग्नि दी। सड़क दुर्घटना में बाल-बाल बचा छोटा बालक हर्ष ही अब माता-पिता का अकेला सहारा रह गया है।
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स्कूल के बाद चाऊमीन का ठेला लगाती थीं दोनों बहनें
ग्रामीण बताते हैं कि दोनों बहादुर बेटियां अपने परिवार की आर्थिक खराब स्थिति को भली-भांति जानती थी। पिता की मजदूरी से जब घर का गुजारा नहीं चल रहा था तो छुट्टी के बाद घर पहुंचकर दोनों बहनें परिवार के पालन-पोषण के लिए गांव में ही चाऊमीन का ठेला लगाती थीं। दोनों बहनों की मौत के बाद जिस किसी ने भी उनकी यह दास्तां सुनी, उसकी आंखें नम हो गईं। सीओ डाॅ. अंजनी कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि वह कोशिश करेंगे कि पीड़ित परिवार को किसी भी स्तर से आर्थिक मदद दिलाई जा सके।
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