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Bijnor News: दौड़कर नहीं मिली मंजिल तो कबड्डी में मारा दांव, पाया मुकाम

Tue, 23 Sep 2025 12:26 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Tue, 23 Sep 2025 12:26 AM IST
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When running failed to reach its destination, it took a chance on kabaddi and achieved its goal.
कबड्डी ​खिलाड़ी नेहा दक्ष। स्रोत स्वयं
बिजनौर। एथलेटिक्स में अपना भविष्य देखने वाली नेहा दक्ष की किस्मत में कुछ और ही लिखा था। ज्यादा सफलता हाथ नहीं लगने पर एथलेटिक्स का दामन छोड़ दिया। इसके बाद नेहा ने कबड्डी में कड़ी मेहनत और शानदार प्रदर्शन से मुकाम हासिल किया। नेहा ने भारतीय महिला कबड्डी टीम में 12 खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई है।
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बिजनौर के गांव करौली से निकलकर नेहा ने भारतीय टीम तक का सफर तय किया। नेहा के पिता अनिल कुमार हार्डवेयर का काम करते हैं। स्कूल से ही खेल में मन था। पहले 100 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती थी। 100 मीटर दौड़ में उन्होंने राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में करीब 100 पदक जीते। लेकिन, आगे का रास्ता नहीं दिखाई दिया। इसके बाद कबड्डी खेलनेे का फैसला किया। बिजनौर के नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोच अंशु सिंह के नेतृत्व में कुश्ती के दांवपेच सीखें और अपनी प्रतिभा निखारी।बेहतर प्रदर्शन की वजह से चार साल में ही नेहा चयन साईं गुजरात के लिए हुआ। इसके बाद नेहा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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मार्च 2025 में ईरान में हुई ओपन सीनियर एशियन चैपिंयनशिप में भारतीय टीम की तरफ से प्रतिभाग किया। टीम ने इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। अभी वह वर्ल्ड कप के तीन कैंप कर चुकी हैं। फाइनल कैंप के लिए भी उनका नाम है।
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इन प्रतियोगिता में लिया हिस्सा
नेहा ने यूपी टीम की ओर से दो जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया। इसके बाद 2024 में साईं गुजरात की ओर से जूनियर नेशनल खेलकर स्वर्ण पदक जीता। इसी साल यूपी टीम की ओर से सीनियर नेशनल में प्रतिभाग किया। वहीं, 2024, 25 में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में प्रतिभाग कर स्वर्ण पदक जीते।

आर्थिक स्थिति कमजोर होने से आई बाधा
नेहा बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ अच्छी नहीं थी। जिस वजह से परिवार के लोग खेलने के लिए रोकथाम करते थे। वहीं, उनके क्षेत्र से कोई खिलाड़ी नहीं है। परिजन कहते थे कि अकेली लड़की कहां जाएगी। परिवार में लड़की के बाहर जाने का डर भी उनके खेलने में बाधा बन रहा था। जब, उनका चयन साईं गुजरात के लिए हो गया तो फिर परिवार के लोगों ने हौंसला बढ़ाया।
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