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साहनपुर किले में परम्परागत शस्त्र पूजन और दशहरा पर्व मनाने की तैयारी पूर्ण
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विजयदशमी पर साहनपुर किले में होगा शस्त्र पूजन
नजीबाबाद। साहनपुर किले में एक बार फिर से राजा भारतेंद्र सिंह के नेतृत्व में शस्त्र पूजन के साथ विजयदशमी पर्व की धूम रहेगी। साहनपुर में रियासत काल से दशहरा पर्व मनाने का अलग अंदाज रहा है।
एक जमाना था जब साहनपुर रियासत का नाम और दशहरा पर्व मनाने का अंदाज दूर-दूर तक मशहूर था। साहनपुर रियासत के राजा भरत सिंह विजयदशमी पर शस्त्र पूजन के साथ दशहरा पर्व आयोजित करते थे। साहनपुर रियासत से जमींदारी प्रथा के रूप में 1800 गांव जुड़े थे। जमींदारी उन्मूलन कानून लागू होने के बाद जमींदारी व्यवस्था बदली, लेकिन साहनपुर किले में दशहरा मनाने के तौर-तरीकों में परिवर्तन नहीं आया।
राजा भरत सिंह के बाद उनके पुत्र राजा चरत सिंह ने साहनपुर किले में भव्य दशहरा पर्व आयोजन की जिम्मेदारी ली। चरत सिंह से विरासत में मिले शस्त्र पूजन और दशहरा पर्व मनाने का दायित्व पूर्व राज्यमंत्री राजा देवेंद्र सिंह के कंधों पर आया और अब पूर्व सांसद एवं पूर्व राज्यमंत्री भारतेंद्र सिंह जिन्हें हाल ही के वर्षों में राजा की उपाधि मिली है। वे साहनपुर किले में दशहरा और दीपावली के अवसर पर विशेष आयोजनों को विरासत के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।
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कोरोना काल में गत दशहरा पर्व पर किला सूना रहा लेकिन इस बार परंपरागत शस्त्र पूजन किया जाएगा। साहनपुर किला परिवार से जुड़े हरिद्वार मार्ग स्थित काली के मंदिर, रानी सती मंदिर और स्वभूं सिद्घपीठ मोटा महादेव मंदिर ले जाकर शस्त्रों की पूजा-अर्चना के साथ विजयदशमी पर्व मनाया जाएगा। विजयदशमी पर्व पर साहनपुर किले में सामूहिक भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।
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नजीबाबाद। साहनपुर किले में एक बार फिर से राजा भारतेंद्र सिंह के नेतृत्व में शस्त्र पूजन के साथ विजयदशमी पर्व की धूम रहेगी। साहनपुर में रियासत काल से दशहरा पर्व मनाने का अलग अंदाज रहा है।
एक जमाना था जब साहनपुर रियासत का नाम और दशहरा पर्व मनाने का अंदाज दूर-दूर तक मशहूर था। साहनपुर रियासत के राजा भरत सिंह विजयदशमी पर शस्त्र पूजन के साथ दशहरा पर्व आयोजित करते थे। साहनपुर रियासत से जमींदारी प्रथा के रूप में 1800 गांव जुड़े थे। जमींदारी उन्मूलन कानून लागू होने के बाद जमींदारी व्यवस्था बदली, लेकिन साहनपुर किले में दशहरा मनाने के तौर-तरीकों में परिवर्तन नहीं आया।
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राजा भरत सिंह के बाद उनके पुत्र राजा चरत सिंह ने साहनपुर किले में भव्य दशहरा पर्व आयोजन की जिम्मेदारी ली। चरत सिंह से विरासत में मिले शस्त्र पूजन और दशहरा पर्व मनाने का दायित्व पूर्व राज्यमंत्री राजा देवेंद्र सिंह के कंधों पर आया और अब पूर्व सांसद एवं पूर्व राज्यमंत्री भारतेंद्र सिंह जिन्हें हाल ही के वर्षों में राजा की उपाधि मिली है। वे साहनपुर किले में दशहरा और दीपावली के अवसर पर विशेष आयोजनों को विरासत के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।
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कोरोना काल में गत दशहरा पर्व पर किला सूना रहा लेकिन इस बार परंपरागत शस्त्र पूजन किया जाएगा। साहनपुर किला परिवार से जुड़े हरिद्वार मार्ग स्थित काली के मंदिर, रानी सती मंदिर और स्वभूं सिद्घपीठ मोटा महादेव मंदिर ले जाकर शस्त्रों की पूजा-अर्चना के साथ विजयदशमी पर्व मनाया जाएगा। विजयदशमी पर्व पर साहनपुर किले में सामूहिक भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।