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Bijnor News: पूरे साल देखी वेब सीरीज, अब परीक्षा में डिब्बा गुल
Tue, 24 Jan 2023 11:46 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 24 Jan 2023 11:46 PM IST
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बिजनौर के सरकारी अस्पताल में बच्चे और उसकी माता से बातचीत करती क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट आयुषी दीषित।
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बिजनौर। विज्ञान वरदान है या अभिशाप, छात्रों ने परीक्षा के लिए इसे याद तो किया, लेकिन अपने जीवन में इसका पालन नहीं किया। अभिभावकों ने छात्रों को पढ़ाई में मजबूत होने को जो मोबाइल ऑनलाइन क्लास के लिए दिए, उन पर कई छात्र पूरे साल वेब सीरीज देखते रहे। अब परीक्षा का समय आया तो महात्मा गांधी का चरित्र याद करना था, लेकिन दिमाग में मिर्जापुर वेब सीरीज का मुन्ना भैया ही घूम रहा है। परीक्षा पास आई तो असफल होने का डर सताने लगा और अवसाद ने घेर लिया। अभिभावक जिला अस्पताल के मनकक्ष में ले गए तो वहां चिकित्सकों ने पूरा माजरा बताया।
बोर्ड की परीक्षाएं जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं। बच्चों को परीक्षा का डर सताने लगा है। बच्चे पहले ही कम अंक आने की कल्पना कर रहे हैं। इसका कारण पूरे साल पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं करके सोशल मीडिया पर ही समय बिताना सामने आ रहा है। जिला अस्पताल में बने मन कक्ष में सप्ताह में एक से दो बच्चे इसी समस्या से ग्रसित पहुंच रहे हैं। उन्हें परीक्षा में असफल होने का भय है। जिसकी वजह से बच्चे खाना-पीना छोड़ रहे हैं। लोगों से बात करने में भी कतरा रहे हैं। इसके अलावा कुछ बच्चों में सीखने की अक्षमता दिखाई दे रही है। जो बढ़कर अब दिक्कत पैदा कर रही है।
केस नंबर एक- बिजनौर निवासी एक बच्चे ने पूरा साल वेब सीरीज देखने में निकाल दिया। मगर अब परीक्षा के समय कुछ याद नहीं होने से वह तनाव में है। परिजनों को उससे बहुत उम्मीदें थी, लेकिन पास नहीं होने के डर से उसने पिछले साल भी 12वीं कक्षा की परीक्षा छोड़ दी थी। इस बार भी उसकी यही स्थिति है। पास नहीं होने का डर उसे सता रहा है। दवाई के जरिए उसे तनाव से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।
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केस नंबर दो- बिजनौर निवासी कक्षा नौ की एक छात्रा की परीक्षा को लेकर तैयारी नहीं थी। तैयारी नहीं होने से उसे अपने साथी से कम अंक आने का डर सता रहा था। जिसकी वजह से उसे पेट की दिक्कत, खाना नहीं खाना, परेशान रहना जैसी समस्या दिखाई दे रही थी। छात्रा और उसकी माता को परामर्श देकर भेज दिया और पढ़ाई के लिए ज्यादा तनाव नहीं लेने की सलाह दी।
केस नंबर तीन- बिजनौर निवासी एक कक्षा 10 का छात्र भी परीक्षा आने पर तनाव में आ गया है। क्योंकि उस बच्चों को सीखने की अक्षमता की समस्या है। पहले तो कक्षा आठ तक स्कूल वाले बिना पढ़े ही पास करते चले गए। मगर अब उसे कुछ याद ही नहीं हो रहा है। जिसकी वजह से उसके परिजन भी परेशान हो रहे हैं।
बच्चों में तनाव के लक्षण-
-पढ़ाई में ध्यान नहीं लगना
-घबराहट महसूस होना
-नींद में समस्या
-छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा होना
-आसपास के लोगों से बात नहीं करना
बच्चों में तनाव के कारण-
-अधिक अंक पाने पर जोर देना
-पूरे साल पढ़ाई नहीं करके परीक्षा के समय परेशान होना
-विद्यार्थियों में अधिक प्रतिस्पर्धा होना
-समस्या दिखाई देने पर समय से इलाज नहीं कराना
बच्चे तनाव से ऐसे करें बचाव-
-बच्चे के साथ बातचीत करना
-बच्चे की काबिलियत के हिसाब से लक्ष्य देना
-तनाव के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक से परामर्श लें
-परिजनों को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए
-ज्यादा समय इंटरनेट पर न बिताएं
समय रहते पढ़ाई नहीं करना बच्चों के लिए ही समस्या बनता जा रहा है। आजकल के बच्चों में सीखने की अक्षमता दिखाई दे रही है। परीक्षा नजदीक आने से तनाव ग्रसित बच्चे आ रहे हैं। परिजनों को बच्चो को काबिलियत से अधिक अंक लाने पर जोर नहीं देना चाहिए। ..आयुषी दीक्षित, नैदानिक मनोचिकित्सक (क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट)
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बोर्ड की परीक्षाएं जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं। बच्चों को परीक्षा का डर सताने लगा है। बच्चे पहले ही कम अंक आने की कल्पना कर रहे हैं। इसका कारण पूरे साल पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं करके सोशल मीडिया पर ही समय बिताना सामने आ रहा है। जिला अस्पताल में बने मन कक्ष में सप्ताह में एक से दो बच्चे इसी समस्या से ग्रसित पहुंच रहे हैं। उन्हें परीक्षा में असफल होने का भय है। जिसकी वजह से बच्चे खाना-पीना छोड़ रहे हैं। लोगों से बात करने में भी कतरा रहे हैं। इसके अलावा कुछ बच्चों में सीखने की अक्षमता दिखाई दे रही है। जो बढ़कर अब दिक्कत पैदा कर रही है।
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केस नंबर एक- बिजनौर निवासी एक बच्चे ने पूरा साल वेब सीरीज देखने में निकाल दिया। मगर अब परीक्षा के समय कुछ याद नहीं होने से वह तनाव में है। परिजनों को उससे बहुत उम्मीदें थी, लेकिन पास नहीं होने के डर से उसने पिछले साल भी 12वीं कक्षा की परीक्षा छोड़ दी थी। इस बार भी उसकी यही स्थिति है। पास नहीं होने का डर उसे सता रहा है। दवाई के जरिए उसे तनाव से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।
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केस नंबर दो- बिजनौर निवासी कक्षा नौ की एक छात्रा की परीक्षा को लेकर तैयारी नहीं थी। तैयारी नहीं होने से उसे अपने साथी से कम अंक आने का डर सता रहा था। जिसकी वजह से उसे पेट की दिक्कत, खाना नहीं खाना, परेशान रहना जैसी समस्या दिखाई दे रही थी। छात्रा और उसकी माता को परामर्श देकर भेज दिया और पढ़ाई के लिए ज्यादा तनाव नहीं लेने की सलाह दी।
केस नंबर तीन- बिजनौर निवासी एक कक्षा 10 का छात्र भी परीक्षा आने पर तनाव में आ गया है। क्योंकि उस बच्चों को सीखने की अक्षमता की समस्या है। पहले तो कक्षा आठ तक स्कूल वाले बिना पढ़े ही पास करते चले गए। मगर अब उसे कुछ याद ही नहीं हो रहा है। जिसकी वजह से उसके परिजन भी परेशान हो रहे हैं।
बच्चों में तनाव के लक्षण-
-पढ़ाई में ध्यान नहीं लगना
-घबराहट महसूस होना
-नींद में समस्या
-छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा होना
-आसपास के लोगों से बात नहीं करना
बच्चों में तनाव के कारण-
-अधिक अंक पाने पर जोर देना
-पूरे साल पढ़ाई नहीं करके परीक्षा के समय परेशान होना
-विद्यार्थियों में अधिक प्रतिस्पर्धा होना
-समस्या दिखाई देने पर समय से इलाज नहीं कराना
बच्चे तनाव से ऐसे करें बचाव-
-बच्चे के साथ बातचीत करना
-बच्चे की काबिलियत के हिसाब से लक्ष्य देना
-तनाव के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक से परामर्श लें
-परिजनों को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए
-ज्यादा समय इंटरनेट पर न बिताएं
समय रहते पढ़ाई नहीं करना बच्चों के लिए ही समस्या बनता जा रहा है। आजकल के बच्चों में सीखने की अक्षमता दिखाई दे रही है। परीक्षा नजदीक आने से तनाव ग्रसित बच्चे आ रहे हैं। परिजनों को बच्चो को काबिलियत से अधिक अंक लाने पर जोर नहीं देना चाहिए। ..आयुषी दीक्षित, नैदानिक मनोचिकित्सक (क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट)