बिजनौर: एक दिन के लिए डीएम बनी उपासना, आकांक्षा बनी एसपी, बेहिचक होकर निभाई जिम्मेदारी
- एक दिन के लिए अफसर बनीं बेटियों ने बेहिचक होकर निभाई जिम्मेदारी
- उपासना ने दिव्यांग को दी ट्राई साइकिल, मतदाता दिवस की शपथ भी दिलाई
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दोनों बेटियों ने बेहिचक होकर अपनी जिम्मेदारी निभाई। फरियादियों की समस्याओं को सुना और अधीनस्थों को संबंधित समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए। इसके अलावा शासन के निर्देश पर जिले भर में बेटियों को एक दिन के अलग-अलग विभागों में अधिकारी बनाया गया और विभाग की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया।
डीएम बनी गांव धर्मनगरी की बंगाली कॉलोनी निवासी उत्तम सिंह की बेटी उपासना सिंह बिजनौर के केपीएस इंटर कॉलेज में कक्षा 12 की छात्रा है। सुबह दस बजे कॉलेज से डीएम की गाड़ी उसे लेने कॉलेज पहुंची। उपासना सिंह कॉलेज की शिक्षिका एकता गुप्ता के साथ डीएम कार्यालय पहुंची।
वहां डीएम रमाकांत पांडेय ने उपासना को फूल देने के साथ डायरी व पेन दिया। सवा दस बजे उपासना डीएम की कुर्सी पर बैठी व फरियादियों की समस्याएं सुनीं। डीएम के अलावा एडीएम प्रशासन विनोद गौड़, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट परमानंद झा भी इस दौरान मौजूद रहे। उपासना सिंह ने करीब 15 शिकायतें सुनीं। उपासना सिंह ने एक दिव्यांग को तत्काल ट्राई साइकिल भी मंगाकर सौंपी।
एडीएम वित्त एवं राजस्व बनी आर्य वैदिक कन्या इंटर कॉलेज की छात्रा दीपा सैनी, एडीएम प्रशासन बनी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की इंटर की छात्रा शिफाली खान भी डीएम कार्यालय में बैठी रहीं।
तीनों छात्राएं अधिकारियों के साथ डीएम कोर्ट पहुंचीं और मतदाता दिवस की अधिकारियों व कर्मचारियों को शपथ दिलाई। तहसील में एसडीएम सदर केपीएसइंटर कॉलेज की छात्रा खुशबू भारद्वाज व सीओ सिटी बीनुल रानी बनी। उपासना सिंह को डीएम ने ट्रॉफी देकर गाड़ी से उनके घर भिजवाया। सामिया नाज एक दिन की जिला पूर्ति अधिकारी बनी।
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उधर, बिजनौर के चक्कर रोड निवासी अनिल कुमार की पुत्री आकांक्षा राजकीय इंटर कॉलेज में इंटर की छात्रा है। उसे एक दिन के लिए जिले के पुलिस अधीक्षक का चार्ज सौंपा गया। एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह के साथ आकांक्षा एसपी कार्यालय पहुंची।
एसपी की कुर्सी पर बैठकर आकांक्षा ने कई शिकायतें सुनीं। महादेवपुरम में रहने वाली ज्याति ने पति के उसे पीटने की शिकायत की। एक पुलिस कर्मी ने 45 दिन की छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र दिया। आकांक्षा ने गणतंत्र दिवस पर छुट्टी देने से मना कर दिया। इसके बाद आकांक्षा ने पुलिस कार्यालय का निरीक्षण किया। बाद में एसपी ने आकांक्षा को ट्रॉफी देकर उसके घर पहुंचवाया।
डीएम बनी उपासना सिंह आईएएस तो आकांक्षा आईपीएस अधिकारी बनाना चाहती है। दोनों डीएम व एसपी की भूमिका निभा कर बेहद खुश हैं। उपासना के पिता फेरी लगाते हैं तो आकांक्षा के पिता मजदूरी करते हैं। दोनों का कहना है कि डीएम व एसपी की कुर्सी पर बैठकर उन्हें इस जिम्मेदारी का पता चला।
सीडीओ बनी कशिश गुप्ता
कशिश गुप्ता प्रतीक मुख्य विकास अधिकारी बनी। सीडीओ केपी सिंह ने कशिश को चार्ज सौंपने की प्रक्रिया पूरी की। कशिश ने स्टेनो अरविंद कुमार से मजदूरों को रोजगार देने की स्थिति देखी। इससे जुड़ी प्रगति की फाइल देखी। जनसाधारण की लंबित शिकायतों के बारे में पूछा। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के बारे में बताया गया।
इस समस्त प्रक्रिया में सीडीओ केपी सिंह ने मदद की। एक दिन की सीडीओ ने मतदान करने की शपथ दिलाई। समय सीमा पूरा होने पर सभी का आभार जताया। बाद में कशिश ने कहा कि वह मध्यम वर्गीय परिवार से है। सीडीओ बनने का अनुभव उनके जीवन को नई दिशा देगा। सीडीओ केपी सिंह की विनम्रता को वह कभी नहीं भूलेगी।
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