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ऐप के माध्यम से अभिभावकों के खातों में जाएगा यूनिफार्म का पैसा
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ऐप के माध्यम से अभिभावकों के खातों में जाएगा यूनिफार्म का पैसा
बिजनौर। दो दिन पहले शासन ने डीबीटी नाम का एक और ऐप जारी कर दिया है। वहीं इस ऐप को लेकर शिक्षक परेशान नजर आ रहे हैं। डायरेक्ट बेनिफिसियल ट्रांसफर नाम के इस ऐप पर अब शिक्षकों को स्कूली बच्चों का डाटा फीड करना होगा, इसी ऐप के माध्यम से यूनिफार्म, बैग आदि का पैसा अभिभावकों को सीधे खाते में भेजा जाएगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए मशक्कत करनी शुरू कर दी है। जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, अकादमिक रिसोर्स पर्सन व संकुल शिक्षकों को इसमें दक्ष करने का काम शुरू कर दिया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में ऑनलाइन सिस्टम बढ़ने से शिक्षक पहले ही परेशान नजर आ रहे हैं। इसका एक कारण स्कूलों में शिक्षकों के पास पर्याप्त संसाधन न होना भी माना जाता है। शुरूआत में शिक्षकों को टैबलेट देने की बात तो कही जा रही थी, लेकिन अभी तक टैबलेट उपलब्ध नहीं कराए गए। शिक्षक स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षण कार्य से लेकर अन्य विभागीय कार्य अपने निजी मोबाइल के द्वारा कर रहे हैं। इतना ही नहीं बेसिक शिक्षा विभाग में पहले से ही सात ऐप चल रहे हैं। इनमें प्रेरणा एप, प्रेरणा पोर्टल, रीड एलोंग ऐप, मानव संपदा पोर्टल, दीक्षा ऐप, प्रेरणा लक्ष्य ऐप व एम स्थापना ऐप आदि पर शिक्षकों से काम लिया जा रहा है। अब शासन की ओर से डायरेक्ट बेनिफिसियल ट्रांसफर नाम से नया ऐप जारी कर दिया गया है, जिस के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों को यूनिफार्म व अन्य धनराशि भेजी जाएगी। इस ऐप को जिले में जारी कराने के लिए शिक्षा विभाग ने मशक्कत शुरू कर दी है।
बृहस्पतिवार को बीएसए जयकरन यादव ने बेसिक शिक्षा विभाग के सभागार में जिले के खंड शिक्षा अधिकारियों, अकादमिक रिसोर्स पर्सन, संकुल शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया। बेसिक शिक्षा विभाग के तकनीकी कर्मचारी भी इस मौके पर जुटे रहे। इन सब को डीबीटी एप पर दक्ष कर अन्य शिक्षकों को भी दक्ष किया जाएगा, ताकि विभागीय कार्यों में रुकावट न आए।
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शासन के ठंडे बस्ते में है टैबलेट योजना
पिछले दो वर्षों से बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रत्येक स्कूल को टैबलेट उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया जा रहा है। शिक्षकों को उम्मीद थी कि जल्द ही स्कूलों में टैबलेट आ जाएंगे। जिले में करीब 2500 परिषदीय प्राइमरी व उच्च प्राइमरी स्कूल है। इन स्कूलों में कोई भी लिपिक नहीं है। लिपिक का कार्य भी शिक्षकों को ही करना होता है। निजी मोबाइल पर किसी तरह से शिक्षक काम चला रहे हैं।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि शासन ने शिक्षकों पर कई एप थोप दिए हैं, पर अभी तक स्कूलों को टैबलेट उपलब्ध नहीं कराए हैं। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला प्रवक्ता चौधरी अंगजीत सिंह ने स्कूलों को लिपिक व टैबलेट उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि स्कूलों में संसाधन न होने से शिक्षकों की परेशानी बढ़ी है।
वर्जन
नए एप के माध्यम से अभिभावकों को सीधे यूनिफार्म, बैग आदि का पैसा भेजा जाएगा। शिक्षकों को एप का प्रशिक्षण दिया गया है। इससे इस बजट में गड़बड़ी नहीं होगी।
- जयकरन यादव, बीएसए बिजनौर
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बिजनौर। दो दिन पहले शासन ने डीबीटी नाम का एक और ऐप जारी कर दिया है। वहीं इस ऐप को लेकर शिक्षक परेशान नजर आ रहे हैं। डायरेक्ट बेनिफिसियल ट्रांसफर नाम के इस ऐप पर अब शिक्षकों को स्कूली बच्चों का डाटा फीड करना होगा, इसी ऐप के माध्यम से यूनिफार्म, बैग आदि का पैसा अभिभावकों को सीधे खाते में भेजा जाएगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए मशक्कत करनी शुरू कर दी है। जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, अकादमिक रिसोर्स पर्सन व संकुल शिक्षकों को इसमें दक्ष करने का काम शुरू कर दिया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में ऑनलाइन सिस्टम बढ़ने से शिक्षक पहले ही परेशान नजर आ रहे हैं। इसका एक कारण स्कूलों में शिक्षकों के पास पर्याप्त संसाधन न होना भी माना जाता है। शुरूआत में शिक्षकों को टैबलेट देने की बात तो कही जा रही थी, लेकिन अभी तक टैबलेट उपलब्ध नहीं कराए गए। शिक्षक स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षण कार्य से लेकर अन्य विभागीय कार्य अपने निजी मोबाइल के द्वारा कर रहे हैं। इतना ही नहीं बेसिक शिक्षा विभाग में पहले से ही सात ऐप चल रहे हैं। इनमें प्रेरणा एप, प्रेरणा पोर्टल, रीड एलोंग ऐप, मानव संपदा पोर्टल, दीक्षा ऐप, प्रेरणा लक्ष्य ऐप व एम स्थापना ऐप आदि पर शिक्षकों से काम लिया जा रहा है। अब शासन की ओर से डायरेक्ट बेनिफिसियल ट्रांसफर नाम से नया ऐप जारी कर दिया गया है, जिस के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों को यूनिफार्म व अन्य धनराशि भेजी जाएगी। इस ऐप को जिले में जारी कराने के लिए शिक्षा विभाग ने मशक्कत शुरू कर दी है।
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बृहस्पतिवार को बीएसए जयकरन यादव ने बेसिक शिक्षा विभाग के सभागार में जिले के खंड शिक्षा अधिकारियों, अकादमिक रिसोर्स पर्सन, संकुल शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया। बेसिक शिक्षा विभाग के तकनीकी कर्मचारी भी इस मौके पर जुटे रहे। इन सब को डीबीटी एप पर दक्ष कर अन्य शिक्षकों को भी दक्ष किया जाएगा, ताकि विभागीय कार्यों में रुकावट न आए।
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शासन के ठंडे बस्ते में है टैबलेट योजना
पिछले दो वर्षों से बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रत्येक स्कूल को टैबलेट उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया जा रहा है। शिक्षकों को उम्मीद थी कि जल्द ही स्कूलों में टैबलेट आ जाएंगे। जिले में करीब 2500 परिषदीय प्राइमरी व उच्च प्राइमरी स्कूल है। इन स्कूलों में कोई भी लिपिक नहीं है। लिपिक का कार्य भी शिक्षकों को ही करना होता है। निजी मोबाइल पर किसी तरह से शिक्षक काम चला रहे हैं।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि शासन ने शिक्षकों पर कई एप थोप दिए हैं, पर अभी तक स्कूलों को टैबलेट उपलब्ध नहीं कराए हैं। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला प्रवक्ता चौधरी अंगजीत सिंह ने स्कूलों को लिपिक व टैबलेट उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि स्कूलों में संसाधन न होने से शिक्षकों की परेशानी बढ़ी है।
वर्जन
नए एप के माध्यम से अभिभावकों को सीधे यूनिफार्म, बैग आदि का पैसा भेजा जाएगा। शिक्षकों को एप का प्रशिक्षण दिया गया है। इससे इस बजट में गड़बड़ी नहीं होगी।
- जयकरन यादव, बीएसए बिजनौर