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Bijnor News: फर्जी वेबसाइट के जरिए साइबर ठगी में दो और आरोपी गिरफ्तार
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वाहनों की फर्जी नम्बर प्लेट बनाने के अपराधी दबोचे। स्रोत पुलिस
सात आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी, पांच की तलाश जारी
-आरोपियों के खाते में आया था साइबर ठगी का पैसा
संवाद न्यूज एजेंसी
नूरपुर। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी एचएसआरपी की फर्जी वेबसाइट के जरिये साइबर ठगी में दो और आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया है। इस गिरोह के पांच अन्य की तलाश जारी है। बिजनौर पुलिस अब तक 37 आरोपियों को जेल भेज चुकी है।
अपर पुलिस अधीक्षक देहात प्रकाश कुमार ने बताया कि धामपुर थाना के गांव लांबाखेड़ा निवासी मोहम्मद इकराम और मुरादाबाद थाना कांठ के मुख्तियारपुर निवासी विकास को गिरफ्तार किया है। वहीं मोहम्मद फहीम निवासी बूढ़नपुर थाना स्योहारा, मोहम्मद शानू निवासी हीमपुर बुजुर्ग, नितेश निवासी रतनगढ़, विकास निवासी अलाउद्दीनपुर भोगी और वरुण यादव का पकड़ा जाना बाकी है। बताया कि आरोपियों ने परिवहन विभाग की वेबसाइट से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट तैयार की थीं। वेबसाइट तैयार करने में चैट जीपीटी जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का इस्तेमाल किया।
साइट पर दिए गए हेल्पलाइन नंबर, लोगों और भाषा को भी एआई की मदद से प्रोफेशनल बनाया गया था। जब लोग इन फर्जी वेबसाइटों पर एचएसआरपी प्लेट की बुकिंग के लिए ऑनलाइन भुगतान करते थे, तो पैसा सीधे गिरोह के सदस्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर हो जाता था। पुलिस ने बताया कि बैंक खातों को फ्रीज कराकर लेनदेन का ब्योरा खंगाला जा रहा है। पकड़े गए आरोपियों के पास से 10200 रुपये और एक मोबाइल भी बरामद किया है।
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-आरोपियों के खाते में आया था साइबर ठगी का पैसा
संवाद न्यूज एजेंसी
नूरपुर। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी एचएसआरपी की फर्जी वेबसाइट के जरिये साइबर ठगी में दो और आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया है। इस गिरोह के पांच अन्य की तलाश जारी है। बिजनौर पुलिस अब तक 37 आरोपियों को जेल भेज चुकी है।
अपर पुलिस अधीक्षक देहात प्रकाश कुमार ने बताया कि धामपुर थाना के गांव लांबाखेड़ा निवासी मोहम्मद इकराम और मुरादाबाद थाना कांठ के मुख्तियारपुर निवासी विकास को गिरफ्तार किया है। वहीं मोहम्मद फहीम निवासी बूढ़नपुर थाना स्योहारा, मोहम्मद शानू निवासी हीमपुर बुजुर्ग, नितेश निवासी रतनगढ़, विकास निवासी अलाउद्दीनपुर भोगी और वरुण यादव का पकड़ा जाना बाकी है। बताया कि आरोपियों ने परिवहन विभाग की वेबसाइट से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट तैयार की थीं। वेबसाइट तैयार करने में चैट जीपीटी जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का इस्तेमाल किया।
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साइट पर दिए गए हेल्पलाइन नंबर, लोगों और भाषा को भी एआई की मदद से प्रोफेशनल बनाया गया था। जब लोग इन फर्जी वेबसाइटों पर एचएसआरपी प्लेट की बुकिंग के लिए ऑनलाइन भुगतान करते थे, तो पैसा सीधे गिरोह के सदस्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर हो जाता था। पुलिस ने बताया कि बैंक खातों को फ्रीज कराकर लेनदेन का ब्योरा खंगाला जा रहा है। पकड़े गए आरोपियों के पास से 10200 रुपये और एक मोबाइल भी बरामद किया है।
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