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तीन महीने में चालू हो जाएगा कोटावाली नदी के नए पुल से ट्रैफिक
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नजीबाबाद-हरिद्वार के बीच कोटावाला नदी के पास क्षतिग्रस्त पुल।
- फोटो : BIJNOR
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तीन महीने में चालू हो जाएगा कोटावाली नदी के नए पुल से ट्रैफिक
बिजनौर। अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो तीन महीने में कोटावली नदी के नए पुल से ट्रैफिक चालू हो जाएगा। दरअसल पुल बनकर तैयार है, इसे सिर्फ पहुंच मार्ग बनाकर हाईवे से जोड़ा जाना बाकी रह गया है। पहुंच मार्ग के निर्माण को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी का इंतजार था जो मिल चुकी है। फिलहाल पुराने पुल के पिलर दरक जाने की वजह से नदी में रपटा बनाकर वाहनों को निकाला जा रहा है।
पहाड़ पर बारिश होते ही नजीबाबाद से हरिद्वार के बीच कोटावाली नदी पर पहुंचते ही हाईवे का ट्रैफिक थम जाता है, जिसकी वजह है, रपटे पर पानी आ जाना। यूं तो कोटावाली नदी पर साल 2001 में पुल बना लिया गया था, लेकिन साल 2017 में इस पुल के तीन पिलर अचानक दरक गए। पिलर दरकने से पुल का स्लैब की एक तरफ ढलान लिए हुए दिखाई देता है। उस वक्त आननफानन पुल से भारी वाहनों की आवाजाही बंद करते हुए नदी में रपटा बना दिया गया। तब से लेकर आज तक भारी वाहन और बस आदि रपटे से ही गुजर रहे हैं।
हालांकि फोरलेन हाईवे का निर्माण शुरू हुआ तो इसके प्रोजेक्ट में एक और नया पुल बनाया जाना प्रस्तावित था। हालांकि हाईवे प्राधिकरण ने कोटावाली में पुल का निर्माण तो चालू कर दिया, लेकिन वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी को पेंच फंस गया। अब पुल बनकर तैयार हो चुका है, जबकि एक किमी लंबा पहुंच मार्ग बनना बाकी था। पिछले दो सालों से हाईवे प्राधिकरण एनओसी के लिए प्रयास में लगा हुआ था। अब पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मिल चुुकी हैं। अब तीन महीने में ही पहुंच मार्ग बनाकर पुल से ट्रैफिक को चालू कर दिया जाएगा। पुल चालू होने से रपटे में पानी के तेज बहाव का भी डर नहीं रहेगा। नदी में उफान के बाद भी पुल से ट्रैफिक सरपट दौड़ेगा।
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खत्म हो चुकी है पुराने पुल को ठीक करने की गुंजाइश
एक नया पुल बनाने के साथ-साथ हाईवे प्राधिकरण ने साल 2001 में बने पुराने पुल को चालू करने का प्रयास किया। इसके लिए आईआईटी रुड़की के ब्रिज एक्सपर्ट की मदद ली गई। कई बार आईआईटी रुड़की की टीम भी दौरा कर चुकी थी। इस पर भारी भरकम खर्च भी हुआ। बाद में आईआईटी की टीम ने भी पुल की मरम्मत से हाथ खड़े कर दिए। माना गया कि तीन पिलर ही दरके हैं, यह भी हो सकता है कि इन तीन पिलर को ठीक किया जाए और इसके बाद दूसरे दरकने शुरू हो जाए। ऐसे में एनएचएआई ने एक और नया पुल बनाने का खाका तैयार कर लिया है।
कोटावाली नदी में पुल बनकर लगभग तैयार है। जिसके पहुंच मार्ग के निर्माण को भी काफी प्रयास के बाद पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी मिल गई है। अब तीन महीने में पहुंच मार्ग बनाकर ट्रैफिक को पुल से चालू कर दिया जाएगा।
-बीपी पाठक, परियोजना निदेशक एनएचएआई
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बिजनौर। अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो तीन महीने में कोटावली नदी के नए पुल से ट्रैफिक चालू हो जाएगा। दरअसल पुल बनकर तैयार है, इसे सिर्फ पहुंच मार्ग बनाकर हाईवे से जोड़ा जाना बाकी रह गया है। पहुंच मार्ग के निर्माण को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी का इंतजार था जो मिल चुकी है। फिलहाल पुराने पुल के पिलर दरक जाने की वजह से नदी में रपटा बनाकर वाहनों को निकाला जा रहा है।
पहाड़ पर बारिश होते ही नजीबाबाद से हरिद्वार के बीच कोटावाली नदी पर पहुंचते ही हाईवे का ट्रैफिक थम जाता है, जिसकी वजह है, रपटे पर पानी आ जाना। यूं तो कोटावाली नदी पर साल 2001 में पुल बना लिया गया था, लेकिन साल 2017 में इस पुल के तीन पिलर अचानक दरक गए। पिलर दरकने से पुल का स्लैब की एक तरफ ढलान लिए हुए दिखाई देता है। उस वक्त आननफानन पुल से भारी वाहनों की आवाजाही बंद करते हुए नदी में रपटा बना दिया गया। तब से लेकर आज तक भारी वाहन और बस आदि रपटे से ही गुजर रहे हैं।
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हालांकि फोरलेन हाईवे का निर्माण शुरू हुआ तो इसके प्रोजेक्ट में एक और नया पुल बनाया जाना प्रस्तावित था। हालांकि हाईवे प्राधिकरण ने कोटावाली में पुल का निर्माण तो चालू कर दिया, लेकिन वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी को पेंच फंस गया। अब पुल बनकर तैयार हो चुका है, जबकि एक किमी लंबा पहुंच मार्ग बनना बाकी था। पिछले दो सालों से हाईवे प्राधिकरण एनओसी के लिए प्रयास में लगा हुआ था। अब पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मिल चुुकी हैं। अब तीन महीने में ही पहुंच मार्ग बनाकर पुल से ट्रैफिक को चालू कर दिया जाएगा। पुल चालू होने से रपटे में पानी के तेज बहाव का भी डर नहीं रहेगा। नदी में उफान के बाद भी पुल से ट्रैफिक सरपट दौड़ेगा।
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खत्म हो चुकी है पुराने पुल को ठीक करने की गुंजाइश
एक नया पुल बनाने के साथ-साथ हाईवे प्राधिकरण ने साल 2001 में बने पुराने पुल को चालू करने का प्रयास किया। इसके लिए आईआईटी रुड़की के ब्रिज एक्सपर्ट की मदद ली गई। कई बार आईआईटी रुड़की की टीम भी दौरा कर चुकी थी। इस पर भारी भरकम खर्च भी हुआ। बाद में आईआईटी की टीम ने भी पुल की मरम्मत से हाथ खड़े कर दिए। माना गया कि तीन पिलर ही दरके हैं, यह भी हो सकता है कि इन तीन पिलर को ठीक किया जाए और इसके बाद दूसरे दरकने शुरू हो जाए। ऐसे में एनएचएआई ने एक और नया पुल बनाने का खाका तैयार कर लिया है।
कोटावाली नदी में पुल बनकर लगभग तैयार है। जिसके पहुंच मार्ग के निर्माण को भी काफी प्रयास के बाद पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी मिल गई है। अब तीन महीने में पहुंच मार्ग बनाकर ट्रैफिक को पुल से चालू कर दिया जाएगा।
-बीपी पाठक, परियोजना निदेशक एनएचएआई