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Bijnor News: गलखा देवी मंदिर को कटान से बचाने के लिए काट दिए परिसर के पेड़

Wed, 12 Jul 2023 12:44 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Wed, 12 Jul 2023 12:44 AM IST
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To save the Galkha Devi temple from felling, the trees of the campus were cut
- भूमि कटान को रोकने के बारिश से पहले नहीं किए जाते कोई प्रबंध
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- जलस्तर बढ़ने और भूमि कटान के बाद टूटती है विभाग की नींद
- प्राचीन मंदिर परिसर में लगे पेड़ों को काटकर कटान रोकने का प्रयास
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
चंदक। महाभारतकालीन मां गलखा देवी का मंदिर इन दिनों गंगा की धारा के मुहाने पर है। लगातार हो रहे कटान और धारा के रुख से इस प्राचीन स्थल को बचाने के लिए मंदिर परिसर के ही पेड़ काट दिए गए हैं। इन पेड़ों को काटकर गंगा की धारा में डाला जा रहा है, जिससे कटान रोका जा सके। हालांकि आनन फानन में किए जा रहे ये इंतजाम मंदिर परिसर के पेड़ विहीन होने पर भविष्य के लिए खतरा पैदा कर देंगे।

मंडावर थाना क्षेत्र के दर्जनों गांव गंगा कटान से प्रभावित हैं। इस साल सबसे अधिक भूमि कटान गलखा देवी मंदिर के नजदीक हो रहा है। वहीं इस भूमि कटान को रोकने के लिए प्रशासन हरसंभव प्रयास कर रहा है, लेकिन गंगा के रौद्र रूप के सामने सभी प्रयास विफल हो रहे हैं। इस भूमि कटान को रोकने के लिए जियोट्यूब का सहारा लिया गया, लेकिन जलस्तर अधिक बढ़ने से जियोट्यूब भी गंगा में समा गई। ग्रामीणों के अनुसार गंगा प्रत्येक वर्ष इसी तरह से कहर बरपाती है। शासन इस ओर कोई ध्यान नही देता। बरसात से पहले भूमि कटान को लेकर कोई प्रबंध नहीं किया जाता, लेकिन जलस्तर बढ़ने के बाद ही सिंचाई विभाग की नींद टूटती है। जहां मिट्टी कटान को रोकने के लिए अधिक से अधिक संख्या में पेड़ लगाने चाहिए, वहीं विभाग इसके विपरीत काम कर रहा है। गलखा देवी मंदिर की भूमि को गंगा कटान से बचाने के लिए मंदिर के पेड़ काटकर गंगा में डाले जा रहे हैं। मंदिर परिसर में खड़े नीम, वैकन के विशालकाय पेड़ों को काटा जा रहा है। मंदिर परिसर में खड़े पेड़ो को कटता देख लोगों ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।
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