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जिले में तीन और नई टीबी यूनिट की होंगी स्थापना
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जिले में तीन और नई टीबी यूनिट की होंगी स्थापना
बिजनौर। जिले में तीन और नई टीबी यूनिट की स्थापना की जाएगी। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंदक, शेरकोट और बढ़ापुर का चयन किया गया है। अभी तक जिला अस्पताल समेत जनपद के अन्य सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच की जाती है। इस कारण इन क्षेत्रों के लोगों को जिला मुख्यालय अथवा अन्य अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
केंद्र सरकार की मंशा है कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी रोग से मुक्त किया जा सके। इसके लिए तेजी से अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार ने रोगियों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चला रखी हैं, जिससे लोग जागरूक होकर इलाज कराने के बाद पूर्णत: ठीक हो सकें। अफसरों के मुताबिक टीबी के अधिकांश मरीज मजदूर तबके के हैं, जो दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में निवास करते हैं। ऐसे लोग लापरवाही के चलते टीबी रोग की जांच कराने या तो अस्पताल नहीं पहुंच पाते या फिर उनके नजदीकी अस्पतालों में यह टीबी जांच की मशीन नहीं होती। जांच के बाद गंभीर रोगियों को दवा का वितरण किया जाएगा। फिलहाल जनपद मेें 3811 मरीज इलाज पर हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि वर्तमान में जनपद में 19 टीबी यूनिटों के माध्यम से मरीजों को क्षय रोग की दवाइयां एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 33 स्वास्थ्य केंद्रों पर बलगम की जांच जा रही है, जबकि तीन सीबीनॉट मशीनों के अलावा सात ट्रूनॉट मशीनों द्वारा टीबी की उच्च स्तरीय जांच होती है। क्षय रोगियों की शुगर एवं एचआईवी जांच भी मुफ्त में कराई जाती है। उन्होंने बताया कि शासन से तीन नई क्षय रोग यूनिट स्थापित करने के निर्देश मिले हैं। इसके अनुसार अब जनपद के शेरकोट, बढ़ापुर और चंदक में नई क्षय रोग यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव मुख्यालय को लखनऊ भेजा गया है।
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बिजनौर। जिले में तीन और नई टीबी यूनिट की स्थापना की जाएगी। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंदक, शेरकोट और बढ़ापुर का चयन किया गया है। अभी तक जिला अस्पताल समेत जनपद के अन्य सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच की जाती है। इस कारण इन क्षेत्रों के लोगों को जिला मुख्यालय अथवा अन्य अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
केंद्र सरकार की मंशा है कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी रोग से मुक्त किया जा सके। इसके लिए तेजी से अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार ने रोगियों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चला रखी हैं, जिससे लोग जागरूक होकर इलाज कराने के बाद पूर्णत: ठीक हो सकें। अफसरों के मुताबिक टीबी के अधिकांश मरीज मजदूर तबके के हैं, जो दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में निवास करते हैं। ऐसे लोग लापरवाही के चलते टीबी रोग की जांच कराने या तो अस्पताल नहीं पहुंच पाते या फिर उनके नजदीकी अस्पतालों में यह टीबी जांच की मशीन नहीं होती। जांच के बाद गंभीर रोगियों को दवा का वितरण किया जाएगा। फिलहाल जनपद मेें 3811 मरीज इलाज पर हैं।
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जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि वर्तमान में जनपद में 19 टीबी यूनिटों के माध्यम से मरीजों को क्षय रोग की दवाइयां एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 33 स्वास्थ्य केंद्रों पर बलगम की जांच जा रही है, जबकि तीन सीबीनॉट मशीनों के अलावा सात ट्रूनॉट मशीनों द्वारा टीबी की उच्च स्तरीय जांच होती है। क्षय रोगियों की शुगर एवं एचआईवी जांच भी मुफ्त में कराई जाती है। उन्होंने बताया कि शासन से तीन नई क्षय रोग यूनिट स्थापित करने के निर्देश मिले हैं। इसके अनुसार अब जनपद के शेरकोट, बढ़ापुर और चंदक में नई क्षय रोग यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव मुख्यालय को लखनऊ भेजा गया है।
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