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वन्यजीवों के विचरण ने सुबह की सैर पर लगाया ब्रेक
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वन्यजीवों के विचरण ने सुबह की सैर पर लगाया ब्रेक
कालागढ़। शीतलहर, कोहरे व वन्यजीवों के विचरण ने सुबह की सैर पर ब्रेक लगा दिया है। सुबह नागरिकों व बच्चों से रौनक भरी रहने वाली सड़कों पर इक्का दुक्का नागरिक ही सैर पर जा रहा है। वनों से आने वाले हिंसक जीवों की वजह से सड़कें बेरौनक हो चली हैं।
कालागढ़ क्षेत्र कड़ाके की सर्दी व शीतलहर की चपेट में है। इस समय हाड़ कंपाने वाली सर्दी पड़ रही है। शुक्रवार सुबह दस बजे तक पूरा क्षेत्र कोहरे की चपेट में रहा। कोहरे में कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों से निकलने वाले हाथी, बाघ व गुलदार के सड़कों के किनारे व सूखास्रोत से होकर खेतों में आने जाने के कारण सड़क पर खतरा मंडराता रहता है। इसके अलावा रामगंगा नदी के खादर के इलाके में एक गुलदार के सक्रिय हो जाने से खेतों में गन्ने की छोल व स्कूलों में आने वाले बच्चों में दहशत है।
वन्यजीवों से नागरिकों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग के इंतजाम केवल कागजी ही साबित हो रहे हैं। गश्ती दलों की ड्यूटी लगने के बाद भी वह सुबह सैर के दौरान सड़कों से नदारद मिलते हैं। सैर पर जाने वाले नागरिकों सुनील कुमार, सलमान अहमद, नीरा देवी, सुभाष सिंह आदि का कहना है कि कोहरे के कारण खेतों व जंगल के किनारों से जंगली जानवरों के आवागमन का खतरा रहता है। कई बार नई कालोनी में इंटर कॉलेज के ढाल, सूखास्रोत, संत रविदास मंदिर, सिनेमा हाल, हनुमान मंदिर, हाथीशाला, सेंट मेरीस स्कूल के सामने मुख्य मार्ग पर बाघ व गुलदार देखे जा चुके हैं। इन स्थानों पर हमेशा खतरा बना रहता है। सुबह दौड़ की तैयारी करने वाले युवा भी घरों में ही कैद होकर रह गए हैं।
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ग्रामीण इलाके में तो गुलदार की दहशत बहुत ही अधिक है। कालागढ़ के वन क्षेत्राधिकारी आरके भट्ट का कहना है कि गश्ती दल अपने क्षेत्र में गश्त करते हैं। वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र में पहले ही बोर्ड लगाकर सतर्क रहने को कहा गया है।
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कालागढ़। शीतलहर, कोहरे व वन्यजीवों के विचरण ने सुबह की सैर पर ब्रेक लगा दिया है। सुबह नागरिकों व बच्चों से रौनक भरी रहने वाली सड़कों पर इक्का दुक्का नागरिक ही सैर पर जा रहा है। वनों से आने वाले हिंसक जीवों की वजह से सड़कें बेरौनक हो चली हैं।
कालागढ़ क्षेत्र कड़ाके की सर्दी व शीतलहर की चपेट में है। इस समय हाड़ कंपाने वाली सर्दी पड़ रही है। शुक्रवार सुबह दस बजे तक पूरा क्षेत्र कोहरे की चपेट में रहा। कोहरे में कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों से निकलने वाले हाथी, बाघ व गुलदार के सड़कों के किनारे व सूखास्रोत से होकर खेतों में आने जाने के कारण सड़क पर खतरा मंडराता रहता है। इसके अलावा रामगंगा नदी के खादर के इलाके में एक गुलदार के सक्रिय हो जाने से खेतों में गन्ने की छोल व स्कूलों में आने वाले बच्चों में दहशत है।
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वन्यजीवों से नागरिकों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग के इंतजाम केवल कागजी ही साबित हो रहे हैं। गश्ती दलों की ड्यूटी लगने के बाद भी वह सुबह सैर के दौरान सड़कों से नदारद मिलते हैं। सैर पर जाने वाले नागरिकों सुनील कुमार, सलमान अहमद, नीरा देवी, सुभाष सिंह आदि का कहना है कि कोहरे के कारण खेतों व जंगल के किनारों से जंगली जानवरों के आवागमन का खतरा रहता है। कई बार नई कालोनी में इंटर कॉलेज के ढाल, सूखास्रोत, संत रविदास मंदिर, सिनेमा हाल, हनुमान मंदिर, हाथीशाला, सेंट मेरीस स्कूल के सामने मुख्य मार्ग पर बाघ व गुलदार देखे जा चुके हैं। इन स्थानों पर हमेशा खतरा बना रहता है। सुबह दौड़ की तैयारी करने वाले युवा भी घरों में ही कैद होकर रह गए हैं।
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ग्रामीण इलाके में तो गुलदार की दहशत बहुत ही अधिक है। कालागढ़ के वन क्षेत्राधिकारी आरके भट्ट का कहना है कि गश्ती दल अपने क्षेत्र में गश्त करते हैं। वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र में पहले ही बोर्ड लगाकर सतर्क रहने को कहा गया है।