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अंग्रेजों का खजाना: लकड़ी के संदूक की तकनीक देख अफसर भी हैरान, दिलचस्प है 135 साल पुराना ये किस्सा

Wed, 06 Apr 2022 07:37 PM IST
मेरठ ब्यूरो रजनीश त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
रजनीश त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 06 Apr 2022 07:37 PM IST
सार

लकड़ी संदूक की तकनीक को देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। यह संदूक 135 साल पुराना है और अंग्रेजों के समय में खजाना लाने-ले जाने में इसका इस्तेमाल किया जाता था।

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Bijnor News: The treasure chest of the British is souring the teeth of termites
बिजनौर में जिला कोषागार - फोटो : amar ujala

विस्तार

अंग्रेजी शासनकाल में अंग्रेज अफसरों ने अपना खजाना रखने के लिए बिजनौर में जिला कोषागार बनवाया था। इसमें अंग्रेजों के समय खजाना लाने-ले जाने में इस्तेमाल होने वाला लकड़ी का संदूक है। यह संदूक 135 साल से जस का तस है, दीमक भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ पाई। आजादी के बाद से यह संदूक बिजनौर के जिला कोषागार के डबल लॉक में रखा हुआ है। 

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बिजनौर का जिला कोषागार अपने आप में कई धरोहरों को संजोए हुए हैं। इनमें से एक अंग्रेजों के समय खजाना लाने-ले जाने में इस्तेमाल होने वाला लकड़ी का संदूक है। यह संदूक 135 साल से जस का तस है, दीमक भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ पाई। छह तालों वाले इस संदूक का वजन इतना है कि चार लोग भी आसानी से इसे उठा नहीं पाएंगे। अब यह धरोहर के रूप में कोषागार में रखा हुआ है। वहीं इसकी मजबूती और तकनीक देख अफसर भी हैरान हैं।
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अंग्रेजी शासनकाल में अंग्रेज अफसरों ने अपना खजाना रखने के लिए जिला कोषागार बनवाया था। जिला कोषागार में सिंगल लॉक और डबल लॉक की व्यवस्था थी। खजाना अक्सर डबल लॉक में ही रहता था। वहीं अधिकांश बिजनौर से खजाना मेरठ लाया व ले जाया जाता था। खजाने को ढोने के लिए वर्ष 1887 में अंग्रेज अफसरों ने एक लकड़ी का संदूक बनवाया। इस संदूक में विशेष तकनीक से छह ताले लगवाए, जिससे किसी भी कोने से इस संदूक को नहीं खोला जा सकता। विशेष केमिकल का लेप भी इस पर हुआ, इसमें मजबूत लकड़ी का प्रयोग हुआ। आजादी के बाद से यह संदूक बिजनौर के जिला कोषागार के डबल लॉक में रखा हुआ है।
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लकड़ी के संदूक को 135 साल बाद भी नहीं लगी दीमक
कोषागार अफसरों के मुताबिक यह संदूक आज भी एकदम सुरक्षित है। यह करीब 135 साल पुराना होगा, लेकिन यह आज भी जस का तस है। अभी तक इसके किसी भी कोने में दीमक का असर तक नहीं देखने को मिला है। वहीं कोषागार में रखी इस धरोहर की देखरेख को भी कर्मचारी समय-समय पर निगरानी करते रहते हैं, ताकि किसी धरोहर को नुकसान न पहुंचे।

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कोषागार में रखी धरोहर की होती है देखरेख : डीएम
जिला कोषागार में खजाना लाने-जाने में इस्तेमाल होने वाला संदूक हो या अन्य धरोहर, सभी को सुरक्षित तरीके से रखा गया है। यह कोषागार की अमानत हैं। इन्हें कोई नुकसान न हो, समय-समय पर इसकी देख-रेख होती है। - उमेश मिश्रा, डीएम बिजनौर

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