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Bijnor News: अधिकारी बोले, हमारेे हाथ में सिर्फ जुर्माना लगाना और कुछ नहीं
Sun, 17 Mar 2024 12:11 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 17 Mar 2024 12:11 AM IST
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बिजनौर के ग्राम रावली में मालन नदी में बहता कैमिकल युक्त पानी।
बिजनौर। मालन नदी में प्रदूषण थम नहीं रहा है। आलम यह है कि नदी में जलीय जीव मरने लगे हैं। इसके बावजूद भी प्रदूषण विभाग केमिकल युक्त पानी रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। इसे मिलीभगत कहें या नाकामी। अधिकारियों का कहना है हमारे हाथ में सिर्फ जुर्माना लगाना है। इसके अलावा कुछ भी नहीं।
मालन नदी बीते करीब पांच दिन से प्रदूषित हो रही है। नदी में केमिकल युक्त पानी लगातार बहाया जा रहा है। प्रदूषण विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि मालन नदी से पानी का नमूना लिया गया है। मगर अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। शनिवार को भी मालन का पानी केमिकल की वजह से काला ही रहा। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने केमिकल युक्त पानी का स्रोत किसान सहकारी चीनी मिल नजीबाबाद की आसवनी इकाई को पाया है। कुछ महीने पहले भी इसी इकाई से केमिकल युक्त पानी छोड़ा गया था। जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ ने इकाई पर 33 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बाद भी दोबारा केमिकल युक्त पानी छोड़ने की घटना घटित हुई। जो रुक नहीं रही है।
- आखिर क्यों नहीं रुक रहा केमिकल युक्त पानी
प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि आसवनी इकाई में जो यंत्र लगे हुए हैं। उनसे पानी ओवरफ्लो हो रहा है। यंत्र पानी को नियंत्रित कर पा रहे हैं। जिसकी वजह से केमिकल युक्त पानी नाले के जरिए मालन नदी में आकर मिल रहा है।
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- केमिकल पानी से मर रहे जलीय जीव
रावली के ग्रामीण वेदराम, दिनेश, नरेश, विनोद, राम सिंह ठेकेदार आदि का कहना है कि मालन नदी में केमिकल युक्त पानी आने से संक्रामक रोग पनप रहे हैं। जलीय जीव मर रहे हैं। मरी हुई मछली नदी में तैर रही हैं। इससे नदी को तो नुकसान हो ही रहा है। साथ ही पशु भी पानी पीने से बीमार पड़ रहे हैं। यह पानी फसल में जाने से फसल खराब हो रही है। नदी में बदबू आने से आसपास के लोगों का रहना दुश्वार हो रहा है।
- वर्जन :
मालन नदी में केमिकल युक्त पानी आने का स्रोत आसवनी इकाई है। इसकी रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ को भेज दी गई है। पहले भी इस पर बोर्ड ने 33 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जो उन्होंने अभी जमा नहीं कराया है। - विजय कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजनौर
- वर्जन : कर्मचारियों के आंदोलन के चलते आसवनी इकाई का संचालन पिछले छह दिनों से बंद है। ऐसे में यूनिट से केमिकल युक्त पानी कैसे निकल सकता है। सभी आरोप गलत हैं। - एसएस ढाका, गन्ना प्रबंधक, किसान सहकारी चीनी मिल, नजीबाबाद
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मालन नदी बीते करीब पांच दिन से प्रदूषित हो रही है। नदी में केमिकल युक्त पानी लगातार बहाया जा रहा है। प्रदूषण विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि मालन नदी से पानी का नमूना लिया गया है। मगर अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। शनिवार को भी मालन का पानी केमिकल की वजह से काला ही रहा। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने केमिकल युक्त पानी का स्रोत किसान सहकारी चीनी मिल नजीबाबाद की आसवनी इकाई को पाया है। कुछ महीने पहले भी इसी इकाई से केमिकल युक्त पानी छोड़ा गया था। जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ ने इकाई पर 33 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बाद भी दोबारा केमिकल युक्त पानी छोड़ने की घटना घटित हुई। जो रुक नहीं रही है।
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- आखिर क्यों नहीं रुक रहा केमिकल युक्त पानी
प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि आसवनी इकाई में जो यंत्र लगे हुए हैं। उनसे पानी ओवरफ्लो हो रहा है। यंत्र पानी को नियंत्रित कर पा रहे हैं। जिसकी वजह से केमिकल युक्त पानी नाले के जरिए मालन नदी में आकर मिल रहा है।
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- केमिकल पानी से मर रहे जलीय जीव
रावली के ग्रामीण वेदराम, दिनेश, नरेश, विनोद, राम सिंह ठेकेदार आदि का कहना है कि मालन नदी में केमिकल युक्त पानी आने से संक्रामक रोग पनप रहे हैं। जलीय जीव मर रहे हैं। मरी हुई मछली नदी में तैर रही हैं। इससे नदी को तो नुकसान हो ही रहा है। साथ ही पशु भी पानी पीने से बीमार पड़ रहे हैं। यह पानी फसल में जाने से फसल खराब हो रही है। नदी में बदबू आने से आसपास के लोगों का रहना दुश्वार हो रहा है।
- वर्जन :
मालन नदी में केमिकल युक्त पानी आने का स्रोत आसवनी इकाई है। इसकी रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ को भेज दी गई है। पहले भी इस पर बोर्ड ने 33 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जो उन्होंने अभी जमा नहीं कराया है। - विजय कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजनौर
- वर्जन : कर्मचारियों के आंदोलन के चलते आसवनी इकाई का संचालन पिछले छह दिनों से बंद है। ऐसे में यूनिट से केमिकल युक्त पानी कैसे निकल सकता है। सभी आरोप गलत हैं। - एसएस ढाका, गन्ना प्रबंधक, किसान सहकारी चीनी मिल, नजीबाबाद