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Bijnor News: सियासी दंगल में विरोधियों को पस्त कर रही परिसीमन की लकीर
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गन्ना समिति चुनाव
- जिले की नौ गन्ना समिति और सहकारी चीनी मिल में होना है चुनाव
- फिलहाल संचालक पद के निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण पर मांगी थी आपत्ति, हुआ निस्तारण
- भाजपा सभी समितियों पर सभापति पद के लिए दे चुकी है समर्थन
- परिसीमन की गुगली पर आउट हो रहे विरोधी किसान नेता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिले की नौ गन्ना समितियों और नजीबाबाद की किसान सहकारी चीनी मिल में प्रबंध समिति के लिए चुनाव का बिगुल बजा हुआ है। अबकी बार संचालक पद के निर्वाचन क्षेत्रों के लिए खिंची जा रही परिसीमन की लकीर विरोधियों को पस्त कर रही है।
दरअसल, निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण नहीं हाेने से तमाम किसान नेताओं के सपने पर पानी फेर दिया है, जबकि कुछ के लिए मैदान में आने वाले ही नहीं बचे हैं। हालांकि संचालक पद के निर्वाचन क्षेत्रों पर आपत्तियां मांगी गईं थीं। आपत्तियों के ढेर भी लगे, मगर निस्तारण की स्थिति साफ नहीं हुई है। बृहस्पतिवार से ही सहकारिता विभाग में किसान नेताओं का भी जमावड़ा लग रहा है। मगर, निर्वाचन अधिकारी शुक्रवार को सुबह से ही अपने कार्यालय से नदारद रहे।
ऐसे बिगड़ और बन रहे हार-जीत के समीकरण
केस नंबर एक
महापुर मो. अली उर्फ गांवड़ी निवासी ओमपाल सिंह उर्फ लाला ने बताया कि किसी ने उनके नाम से झूठा प्रार्थना पत्र देकर उनके गांव को नगीना खास सीट से कल्लूवाला आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र में करा दिया है। जबकि इस गांव के आसपास के गांव नगीना में ही हैं। बता दें कि इस गांव से भी संचालक पद के लिए एक नेता ने दावेदारी कर दी थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि सभापति पद पर जीत निश्चित करने के लिए उक्त नेता को संचालक पद की दौड़ से ही बाहर कर दिया गया।
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केस नंबर दो
कुंजैटा गावं नगीना समिति के निर्वाचन क्षेत्र रायपुर में 1987 से अब तक शामिल रहा है। कुंजैटा गांव के हरपाल सिंह रायपुर सीट पर संचालक पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुके थे। हरपाल सिंह के बेटे संजीव एडवोकेट ने बताया कि उनका गांव बढ़ापुर से आधा किलोमीटर की दूरी है। मगर, विभागीय सूत्रों से पता लगा है कि उनका गांव आरक्षित सीट कल्लूवाला में कर दिया गया है। सभापति पद के लिए दावेदारी करने वाले उम्मीदवार रायपुर से संचालक बनने का सपना देख हैं, उनकी राह आसान करने के लिए उनके गांव को रायपुर सीट से हटाया गया है। वहीं, वर्तमान में एक किसान नेता की पत्नी संचालक है, उनके गांव को भी कल्लूवाला में किया जा रहा है।
केस नंबर तीन
बिजनौर गन्ना समिति में शामिल चक फतेहपुर के रहने वाले रवि देशवाल ने बताया कि सभापति पद के लिए दावेदारी की थी। झालू सीट से संचालक बनने की तैयारी कर ली थी। इससे उनका समीकरण ही गड़बड़ा गया। अब मालूम हुआ है कि उनका गांव झालू से हटाकर अन्य सीट पर लगाया जा सकता है।
पूर्व सभापति ने इस बार किया किनारा
जिले में एक गन्ना समिति एवं गन्ना परिषद के पूर्व सभापति ने भी इस बार राजनीति दांवपेंच के चलते चुनाव से किनारा कर लिया है। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस बार चुनाव लड़ने की इच्छा को ही जाहिर नहीं किया। अगर मुंह खोल दिया होता तो उनका गांव भी कहीं दूर क्षेत्र में शामिल कर दिया जाता।
संभावित सभापति को डेलीगेशन में घेरने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार चांदपुर गन्ना समिति पर सभापति के लिए एक नेता ने उम्मीदवारी ठोंकी है। उन्हें सत्ता का भी समर्थन मिला है। सूत्रों का दावा है कि उन्हें विरोधी इस बार डेलीगेट के पद पर ही घेरने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे संचालक पद तक भी नहीं पहुंच पाएं। इसे लेकर उक्त विरोधी नेता का गांव दूसरे क्षेत्र में कराने की अटकलें लगती रहीं है।
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- जिले की नौ गन्ना समिति और सहकारी चीनी मिल में होना है चुनाव
- फिलहाल संचालक पद के निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण पर मांगी थी आपत्ति, हुआ निस्तारण
- भाजपा सभी समितियों पर सभापति पद के लिए दे चुकी है समर्थन
- परिसीमन की गुगली पर आउट हो रहे विरोधी किसान नेता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिले की नौ गन्ना समितियों और नजीबाबाद की किसान सहकारी चीनी मिल में प्रबंध समिति के लिए चुनाव का बिगुल बजा हुआ है। अबकी बार संचालक पद के निर्वाचन क्षेत्रों के लिए खिंची जा रही परिसीमन की लकीर विरोधियों को पस्त कर रही है।
दरअसल, निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण नहीं हाेने से तमाम किसान नेताओं के सपने पर पानी फेर दिया है, जबकि कुछ के लिए मैदान में आने वाले ही नहीं बचे हैं। हालांकि संचालक पद के निर्वाचन क्षेत्रों पर आपत्तियां मांगी गईं थीं। आपत्तियों के ढेर भी लगे, मगर निस्तारण की स्थिति साफ नहीं हुई है। बृहस्पतिवार से ही सहकारिता विभाग में किसान नेताओं का भी जमावड़ा लग रहा है। मगर, निर्वाचन अधिकारी शुक्रवार को सुबह से ही अपने कार्यालय से नदारद रहे।
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ऐसे बिगड़ और बन रहे हार-जीत के समीकरण
केस नंबर एक
महापुर मो. अली उर्फ गांवड़ी निवासी ओमपाल सिंह उर्फ लाला ने बताया कि किसी ने उनके नाम से झूठा प्रार्थना पत्र देकर उनके गांव को नगीना खास सीट से कल्लूवाला आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र में करा दिया है। जबकि इस गांव के आसपास के गांव नगीना में ही हैं। बता दें कि इस गांव से भी संचालक पद के लिए एक नेता ने दावेदारी कर दी थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि सभापति पद पर जीत निश्चित करने के लिए उक्त नेता को संचालक पद की दौड़ से ही बाहर कर दिया गया।
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केस नंबर दो
कुंजैटा गावं नगीना समिति के निर्वाचन क्षेत्र रायपुर में 1987 से अब तक शामिल रहा है। कुंजैटा गांव के हरपाल सिंह रायपुर सीट पर संचालक पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुके थे। हरपाल सिंह के बेटे संजीव एडवोकेट ने बताया कि उनका गांव बढ़ापुर से आधा किलोमीटर की दूरी है। मगर, विभागीय सूत्रों से पता लगा है कि उनका गांव आरक्षित सीट कल्लूवाला में कर दिया गया है। सभापति पद के लिए दावेदारी करने वाले उम्मीदवार रायपुर से संचालक बनने का सपना देख हैं, उनकी राह आसान करने के लिए उनके गांव को रायपुर सीट से हटाया गया है। वहीं, वर्तमान में एक किसान नेता की पत्नी संचालक है, उनके गांव को भी कल्लूवाला में किया जा रहा है।
केस नंबर तीन
बिजनौर गन्ना समिति में शामिल चक फतेहपुर के रहने वाले रवि देशवाल ने बताया कि सभापति पद के लिए दावेदारी की थी। झालू सीट से संचालक बनने की तैयारी कर ली थी। इससे उनका समीकरण ही गड़बड़ा गया। अब मालूम हुआ है कि उनका गांव झालू से हटाकर अन्य सीट पर लगाया जा सकता है।
पूर्व सभापति ने इस बार किया किनारा
जिले में एक गन्ना समिति एवं गन्ना परिषद के पूर्व सभापति ने भी इस बार राजनीति दांवपेंच के चलते चुनाव से किनारा कर लिया है। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस बार चुनाव लड़ने की इच्छा को ही जाहिर नहीं किया। अगर मुंह खोल दिया होता तो उनका गांव भी कहीं दूर क्षेत्र में शामिल कर दिया जाता।
संभावित सभापति को डेलीगेशन में घेरने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार चांदपुर गन्ना समिति पर सभापति के लिए एक नेता ने उम्मीदवारी ठोंकी है। उन्हें सत्ता का भी समर्थन मिला है। सूत्रों का दावा है कि उन्हें विरोधी इस बार डेलीगेट के पद पर ही घेरने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे संचालक पद तक भी नहीं पहुंच पाएं। इसे लेकर उक्त विरोधी नेता का गांव दूसरे क्षेत्र में कराने की अटकलें लगती रहीं है।