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नोट न बदलने पर हंगामा
अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:17 AM IST
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बिजनौर के स्योहारा में बैंकों से रकम निकालने और पुराने नोट जमा करने को लेकर भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। बृहस्पतिवार को बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा पर दिनभर हंगामा होता रहा। लोगों ने गेट तोड़ने का प्रयास किया। वहीं बुढ़नपुर के एसबीआई में एक महिला कैश के लिए लाइन में लगी थी। अचानक धक्कामुक्की होने से महिला गिर गई और उसके ऊपर कई लोग भी गिर पड़े। वह बेहोश हो गई। बैंक स्टाफ ने उसका नोट बदलकर उसे निजी चिकित्सक के यहां इलाज कराया। यही स्थिति अमूमन सारे बैंकों में रही।
बैंक ऑफ बड़ौदा में खाताधारकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंक के बाहर भीड़ देखकर बैंक ने मुख्य गेट बंद कर दिया गया। गेट बंद होने पर लोगों का गुस्सा भड़क उठा और जमकर हंगामा शुरू कर दिया। यहां तक की लोगों ने गेट तोड़ने की कोशिश की गई। वहीं दोपहर करीब डेढ़ बजे कैश खत्म होने की सूचना बैंक ने दी तो महिलाओं ने भी हंगामा शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि काफी देर तक लाइन में खड़े होने के बाद अचानक कैश खत्म होेने की बात कहना, पूरे दिन खराब करना है। फिर से अगले दिन रुपये बदलने के लिए लाइन लगनी होगी। महिला पुलिस कर्मियों ने महिलाओं को समझाबुझा कर शांत किया। उपशाखा प्रबंधक केपी सिंह का कहना है कि दस दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी। जिन महिलाओं के खातों में लेनदेन नहीं हुआ है उनमें भी 50 हजार रुपये तक जमा किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि खाताधारकों को करीब 10 हजार तक पेमेंट किया गया। वहीं गांव बहादरपुर की एक महिला ऊषा देवी (52) पत्नी मन्नू सिंह स्टेट बैंक बुढ़नपुर में लाइन में लगी थी जैसे ही उसका नंबर आया धक्का देने से वह नीचे गिर गई। धक्कामुक्की में कई लोग उसके ऊपर ही गिर गए और कुछ तो उसके ऊपर चढ़कर बैंक में घुस गए। इस कारण वह बेहोश हो गई। सूचना पर महिला को स्टाफ ने उठाकर बैंच पर लेटाया और उसे पेमेंट देकर प्राइवेट चिकित्सक के यहां इलाज कराया। महिला दोपहर बाद अपने गांव पहुंची। वहीं नगीना में बैकों में कैश खत्म होने से उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। एसबीआई में उपभोक्ताओं को पांच व दस के सिक्के बांटे जा रहे हैं। बाकी बैंकों में कुछ देर बाद ही नो कैश का बोर्ड टांग दिया जाता है। बैंकों के खुलने से पहले ही लोगों की लंबी लाइन लग जाती हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा में खाताधारकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंक के बाहर भीड़ देखकर बैंक ने मुख्य गेट बंद कर दिया गया। गेट बंद होने पर लोगों का गुस्सा भड़क उठा और जमकर हंगामा शुरू कर दिया। यहां तक की लोगों ने गेट तोड़ने की कोशिश की गई। वहीं दोपहर करीब डेढ़ बजे कैश खत्म होने की सूचना बैंक ने दी तो महिलाओं ने भी हंगामा शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि काफी देर तक लाइन में खड़े होने के बाद अचानक कैश खत्म होेने की बात कहना, पूरे दिन खराब करना है। फिर से अगले दिन रुपये बदलने के लिए लाइन लगनी होगी। महिला पुलिस कर्मियों ने महिलाओं को समझाबुझा कर शांत किया। उपशाखा प्रबंधक केपी सिंह का कहना है कि दस दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी। जिन महिलाओं के खातों में लेनदेन नहीं हुआ है उनमें भी 50 हजार रुपये तक जमा किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि खाताधारकों को करीब 10 हजार तक पेमेंट किया गया। वहीं गांव बहादरपुर की एक महिला ऊषा देवी (52) पत्नी मन्नू सिंह स्टेट बैंक बुढ़नपुर में लाइन में लगी थी जैसे ही उसका नंबर आया धक्का देने से वह नीचे गिर गई। धक्कामुक्की में कई लोग उसके ऊपर ही गिर गए और कुछ तो उसके ऊपर चढ़कर बैंक में घुस गए। इस कारण वह बेहोश हो गई। सूचना पर महिला को स्टाफ ने उठाकर बैंच पर लेटाया और उसे पेमेंट देकर प्राइवेट चिकित्सक के यहां इलाज कराया। महिला दोपहर बाद अपने गांव पहुंची। वहीं नगीना में बैकों में कैश खत्म होने से उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। एसबीआई में उपभोक्ताओं को पांच व दस के सिक्के बांटे जा रहे हैं। बाकी बैंकों में कुछ देर बाद ही नो कैश का बोर्ड टांग दिया जाता है। बैंकों के खुलने से पहले ही लोगों की लंबी लाइन लग जाती हैं।
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