बिजनौर। मुकद्दस रमजान माह के पहले जुमे की नमाज शांति के साथ अदा की गई। सवेरे से ही मस्जिदों में साफ-सफाई की गई थी, नमाजियों के लिए सफें बिछाई गईं, मस्जिदों के रास्तों पर चूना डाला गया था। मुस्लिमों ने मस्जिदों में नमाज अदा की। वहीं महिलाओं ने घरों में रहकर नमाज पढ़ी।
उलमाओं द्वारा मस्जिदों में पहले अशरे की फजीलत बयां की गई। उलमाओं ने नमाजियों से बुराई का रास्ता छोड़ नेक रास्ते पर चलने हिदायत दी। बिजनौर चाहशीरी जामा मस्जिद में नमाज से पूर्व नमाजियों को खिताब करते हुए इमाम मौलाना वरीस अहमद ने कहा रोजा भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं ब्लकि रोजा आंख, कान, नाक व जबान का भी होता है। रोजे के समय बुराई करना, गलत निगाहों से देखना आदि इन सब चीजों से परहेज करें। रमजान इबादत व रहमतों का खजाना है, रमजान सब्र का महीना है, सब्र का इनाम जन्नत है । रोजा बिजनौर की काजीपाड़ा मरकज वाली मस्जिद में मुफ्ती शमशुद्दीन, सिविल लाइंस की तकिया वाली मस्जिद, स्टेशन वाली मस्जिद में कारी अरशद, कचहरी वाली मस्जिद, जजी चौक वाली मस्जिद में मुफ्ती शाहिद ने जुमे की नमाज अदा कराई। नमाज के बाद लोगों ने मुल्क में अपनोअमान व खुशहाली के लिए दुआएं मांगी।