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जनता के सहयोग से भर रहा गोवंश का पेट

Wed, 06 Jan 2021 11:44 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 06 Jan 2021 11:44 PM IST
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The cow's stomach was being filled with the support of the public
बिजनौर गौशाला में बंधी गाय। - फोटो : BIJNOR
बिजनौर। गोशालाओं में रखे गए गोवंश के लिए 30 रुपये में पेट भरना संचालकों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। गोशालाओं में गोवंश का पेट भरने के लिए जनता का सहयोग लेना पड़ रहा है। कहीं चारे तो कहीं किसी अन्य रूप में जनता का सहयोग लिया जा रहा है।
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प्रदेश में भाजपा सरकार की सख्ती के बाद गोकशी की घटनाएं कम हो गई हैं। लेकिन किसान बूढ़े और नर गोवंश को दूसरे गांवों के खेतों में जाकर छोड़ रहे हैं। गोवंश छोड़ने वालों के खिलाफ भी शासन ने सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। शेरकोट में एक किसान पर गोवंश खुले में छोड़ने की रिपोर्ट भी दर्ज की गई है। जिले की गोशालाओं में रखे गए करीब 900 गोवंश के भरण पोषण के लिए सरकार ने 30 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु के हिसाब से राशि निर्धारित की है। एक व्यस्क गोवंश को एक दिन में तीन से चार किग्रा हरे चारे व पांच किग्रा भूसे की जरूरत होती है। इसके अलावा शासन ने गोवंश को समय-समय पर गुड़ व पोषाहार भी देने के निर्देश दिए हैं। लेकिन 30 रुपये में गोवंश का पेट भरना मुश्किल साबित हो रहा है। इस समय हरा चारा तीन रुपये किग्रा और भूसा पांच रुपये प्रति किग्रा मिल रहा है। 30 रुपये में केवल चारा ही दिया जा सकता है। हालांकि छोटे पशुओं के चारे की कम लागत को देखते हुए उनके हिस्से का चारा बड़े पशुओं को देकर काम चल जाता है।
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झूल, पशु आहार के लिए लिया जा रहा सहयोग
गोवंश के भरण पोषण के लिए सरकारी और गैरसरकारी दोनों तरह की संस्थाओं से मदद ली जा रही है। गोवंश की झूल के लिए पूर्ति विभाग से करीब एक हजार खाली बोरी ली गई हैं। समाजसेवियों से गुुड़ व चारे की व्यवस्था कराई जा रही है। पशुपालन विभाग पशुओं के लिए समय-समय पर पशु आहार देता है। कई उद्योगपति भी गोवंश की सेवा के लिए आगे आ रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जनता का सहयोग गोशालाओं के संचालन के लिए मांगा गया है। जनता भी लगातार गोवंश की सेवा कर रही है।
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