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चिराग बुझते ही किरदार बदल लेते हैं...

Wed, 27 Apr 2022 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Apr 2022 11:54 PM IST
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The characters change as soon as the lamp is extinguished.
चिराग बुझते ही किरदार बदल लेते हैं...
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नजीबाबाद। मेरी कलम साहित्य सेवा संस्थान की ओर से आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने सामाजिक परिवेश से जुड़ी स्वरचित रचनाएं प्रस्तुत कीं।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. मीरा राम निवास, डॉ. गोविंद नारायण शांडिल्य, संस्था की अध्यक्ष डॉ. मंजु मधुर ने संयुक्त रूप में मां सरस्वती के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर किया। कार्यक्रम में डॉ. मीरा राम निवास ने सुनाया - रामू मोची को धूप ताप नहीं सताती है, डॉ. मंजु मधुर ने कहा - कुछ लोग तो रफ्तार बदल लेते हैं, चिराग बुझते ही किरदार बदल लेते हैं। मधु प्रसाद ने सुनाया, इस महकती रात के आंचल तले इक गीत लिख दो, नीरजकांत ने अपनी रचना सुनाई, त्याग कर राज वो चल दिए इस तरह, ओस की बूंद पत्ता तजे जिस तरह.., सुमन वर्मा ने हम भी मौसम की तरह बदल जाते तो अच्छा था सुनाया, फूल माला ने सुनाया कि दो घरों को पाकर भी बेघर होती है नारी, खुशियां बांटती है जीवनभर पर मायूस होती है नारी। इसके अलावा राजकुमार वर्मा, प्रतिभा पुरोहित, कविता नामदेव, डॉ. पूनम तिवारी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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