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Bijnor News: बचाव पक्ष की दलीलें अदालत में नहीं टिकीं फैसले में एक-एक तर्क का दिया जवाब

Sat, 01 Aug 2026 02:17 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 02:17 AM IST
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The arguments of the defense did not stand in the court; each argument was answered in the verdict.
बिजनौर। प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में बचाव पक्ष ने सुनवाई के दौरान कई अहम दलीलें रखीं, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर उन्हें स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। फैसले में न्यायालय ने बचाव पक्ष के प्रत्येक प्रमुख तर्क पर विस्तार से अपनी टिप्पणी दर्ज की है।
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बचाव पक्ष का पहला तर्क था कि पोस्टमार्टम होने मात्र से यह सिद्ध नहीं होता कि बरामद शव प्रबल अग्रवाल का ही था। इस पर अदालत ने कहा कि गवाह अरविंद कुमार ने बताया कि 15 जनवरी 2013 को गंगा किनारे मिले शव की जेब से मोबाइल फोन मिला था।
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उसी मोबाइल से मृतक की बहन को सूचना दी गई, जिसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे और शव की पहचान प्रबल अग्रवाल के रूप में की। न्यायालय ने कहा कि इन तथ्यों के बाद यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि पोस्टमार्टम किसी अन्य व्यक्ति के शव का हुआ था।
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बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि विवेचना के दौरान जिन गवाहों ने पुलिस को बयान दिए थे, उनमें से कुछ न्यायालय में अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। अदालत ने कहा कि किसी गवाह के पक्षद्रोही हो जाने मात्र से पूरा अभियोजन असत्य नहीं हो जाता।

यदि अन्य विश्वसनीय साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाण अभियोजन की कहानी की पुष्टि करते हैं तो ऐसे गवाहों के मुकरने का लाभ आरोपियों को नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि अन्य गवाहों की गवाही, बरामदगी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।
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