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स्वपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षक बनेंगे शोध गाइड
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स्वपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षक बनेंगे शोध गाइड
बिजनौर। अब शोध गाइड बनने के लिए कोई फीस नहीं होगी। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने शोध गाइड बनने के लिए निर्धारित फीस समाप्त कर दी है। स्वपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षक भी शोध गाइड बन सकेंगे। शोध गाइड बनने के लिए अंतिम तिथि चार फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं।
रुहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन रुटा के अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय ने शोध गाइड बनने के लिए 1000 रुपये फीस निर्धारित कर दी थी। रुटा ने फीस निर्धारण को गलत परंपरा बताकर विरोध किया था। मामले को उपकुलपति समेत शासन तक उठाया गया था। विश्वविद्यालय ने शोध गाइड के लिए निर्धारित फीस को समाप्त कर दिया है। अब हर विषय में शोध गाइड बनने के लिए वांछित शैक्षिक योग्यता रखने वाले डिग्री कॉलेजों के शिक्षक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की आखिरी तारीख चार फरवरी है। विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय के शोध विभाग से प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पीएचडी के लिए अब तक राजकीय तथा अशासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों के शिक्षक ही शोध गाइड थे। जिले में एक राजकीय व छह अशासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज हैं। अभी तक करीब 100 शिक्षक शोध कार्य करा रहे हैं। अकेले वर्धमान कॉलेज बिजनौर में करीब 40 शिक्षक शोध गाइड हैं। प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार के अनुसार नए नियमों में स्वपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षक भी शोध गाइड बन सकेंगे।
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बिजनौर। अब शोध गाइड बनने के लिए कोई फीस नहीं होगी। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने शोध गाइड बनने के लिए निर्धारित फीस समाप्त कर दी है। स्वपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षक भी शोध गाइड बन सकेंगे। शोध गाइड बनने के लिए अंतिम तिथि चार फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं।
रुहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन रुटा के अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय ने शोध गाइड बनने के लिए 1000 रुपये फीस निर्धारित कर दी थी। रुटा ने फीस निर्धारण को गलत परंपरा बताकर विरोध किया था। मामले को उपकुलपति समेत शासन तक उठाया गया था। विश्वविद्यालय ने शोध गाइड के लिए निर्धारित फीस को समाप्त कर दिया है। अब हर विषय में शोध गाइड बनने के लिए वांछित शैक्षिक योग्यता रखने वाले डिग्री कॉलेजों के शिक्षक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की आखिरी तारीख चार फरवरी है। विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय के शोध विभाग से प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पीएचडी के लिए अब तक राजकीय तथा अशासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों के शिक्षक ही शोध गाइड थे। जिले में एक राजकीय व छह अशासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज हैं। अभी तक करीब 100 शिक्षक शोध कार्य करा रहे हैं। अकेले वर्धमान कॉलेज बिजनौर में करीब 40 शिक्षक शोध गाइड हैं। प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमार के अनुसार नए नियमों में स्वपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षक भी शोध गाइड बन सकेंगे।
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