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Bijnor News: एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी से खराब कूल्हे की हुई सर्जरी
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बिजनौर के मेडिकल कॉलेज में पूरा कूल्हा प्रत्यारोपण करने वाली हड्डी रोग विभाग की टीम। स्रोत चिकि
- मेडिकल कॉलेज की टीम ने की जटिल सर्जरी, मरीज को मिली राहत-कूल्हे की हड्डी गलने से पिछले आठ साल से बिस्तर पर था नईम
फोटो..
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग की टीम ने एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी से खराब हुए कूल्हे का प्रत्यारोपण किया। दरअसल, इस बीमारी की वजह से खेड़की निवासी नईम (42) की कूल्हे की हड्डी गल गई थी। जिसके चलते चलने-फिरने में परेशानी की वजह से वह पिछले आठ साल से बिस्तर पर था। अब ऑपरेशन के बाद नईम फिर से चलने लगा है।
मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल यादव ने बताया कि नईम पिछले कई वर्षों से एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित थे। इस बीमारी के कारण उनके दोनों कूल्हों के जोड़ गंभीर रूप से प्रभावित हो गए थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि वे न तो खड़े हो पा रहे थे और न ही चलने में सक्षम थे। मेरठ और दिल्ली के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में उपचार के लिए संपर्क किया, जहां ऑपरेशन पर लगभग 10 से 12 लाख रुपये खर्च होने की बात कही। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे कई वर्षों तक ऑपरेशन नहीं करा सके। ऐसे में अब मेडिकल कॉलेज में मरीज के कूल्हे की जटिल सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ है। जिससे अब वह चलने में सक्षम हैं। इससे उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने की नई उम्मीद मिली है।
प्राचार्या डॉ. ललिता चौधरी ने कहा कि इस प्रकार की जटिल शल्य चिकित्सा का सफलतापूर्वक संपन्न होना संस्थान की बढ़ती चिकित्सा क्षमताओं, चिकित्सकों की दक्षता और टीमवर्क का कार्य है। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. शितांशु, डॉ. गौरव, डॉ. नितिन, डॉ. देवांश, एनेस्थीसिया टीम में डॉ. नीलम शर्मा, डॉ. प्रवीण पेटसन, डॉ. रश्मि, सिस्टर इंचार्ज रजनी शर्मा, सिस्टर शैली, शिवम, प्रशांत, भोगेंद्र, कपिल, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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-- -- क्या होता है टोटल हिप रिप्लेसमेंट
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल यादव ने बताया कि टोटल हिप रिप्लेसमेंट एक शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है। जिसमें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कूल्हे के जोड़ के हिस्सों को हटाकर उनकी जगह कृत्रिम जोड़ लगाया जाता है। इससे मरीज को दर्द से राहत मिलने और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार होने में मदद मिलती है।
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क्या है एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी
यह एक प्रकार का दीर्घकालिक गठिया है, जो मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी और सैक्रोइलियक (पेट और कूल्हे के जोड़) को प्रभावित करती है। एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी में पीठ के निचले हिस्से या कूल्हों में लगातार दर्द और सूजन, जो रात में या देर तक बैठने पर बढ़ जाता है। समय पर इलाज नहीं होने पर मरीज चलने-फिरने में असमर्थ रहता है। कूल्हा प्रत्यारोपण के बाद ही बीमारी ठीक होती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग की टीम ने एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी से खराब हुए कूल्हे का प्रत्यारोपण किया। दरअसल, इस बीमारी की वजह से खेड़की निवासी नईम (42) की कूल्हे की हड्डी गल गई थी। जिसके चलते चलने-फिरने में परेशानी की वजह से वह पिछले आठ साल से बिस्तर पर था। अब ऑपरेशन के बाद नईम फिर से चलने लगा है।
मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल यादव ने बताया कि नईम पिछले कई वर्षों से एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित थे। इस बीमारी के कारण उनके दोनों कूल्हों के जोड़ गंभीर रूप से प्रभावित हो गए थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि वे न तो खड़े हो पा रहे थे और न ही चलने में सक्षम थे। मेरठ और दिल्ली के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में उपचार के लिए संपर्क किया, जहां ऑपरेशन पर लगभग 10 से 12 लाख रुपये खर्च होने की बात कही। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे कई वर्षों तक ऑपरेशन नहीं करा सके। ऐसे में अब मेडिकल कॉलेज में मरीज के कूल्हे की जटिल सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ है। जिससे अब वह चलने में सक्षम हैं। इससे उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने की नई उम्मीद मिली है।
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प्राचार्या डॉ. ललिता चौधरी ने कहा कि इस प्रकार की जटिल शल्य चिकित्सा का सफलतापूर्वक संपन्न होना संस्थान की बढ़ती चिकित्सा क्षमताओं, चिकित्सकों की दक्षता और टीमवर्क का कार्य है। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. शितांशु, डॉ. गौरव, डॉ. नितिन, डॉ. देवांश, एनेस्थीसिया टीम में डॉ. नीलम शर्मा, डॉ. प्रवीण पेटसन, डॉ. रश्मि, सिस्टर इंचार्ज रजनी शर्मा, सिस्टर शैली, शिवम, प्रशांत, भोगेंद्र, कपिल, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल यादव ने बताया कि टोटल हिप रिप्लेसमेंट एक शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है। जिसमें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कूल्हे के जोड़ के हिस्सों को हटाकर उनकी जगह कृत्रिम जोड़ लगाया जाता है। इससे मरीज को दर्द से राहत मिलने और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार होने में मदद मिलती है।
क्या है एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी
यह एक प्रकार का दीर्घकालिक गठिया है, जो मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी और सैक्रोइलियक (पेट और कूल्हे के जोड़) को प्रभावित करती है। एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी में पीठ के निचले हिस्से या कूल्हों में लगातार दर्द और सूजन, जो रात में या देर तक बैठने पर बढ़ जाता है। समय पर इलाज नहीं होने पर मरीज चलने-फिरने में असमर्थ रहता है। कूल्हा प्रत्यारोपण के बाद ही बीमारी ठीक होती है।