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Bijnor News: एनआरएलएम में 35 लाख का घोटाला, बैंक से तलब किया लेनदेन का ब्यौरा
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बिजनौर का विकास भवन।
- बद्रीनाथ सीएलएफ ने एक ही ग्राम संगठन को दिया 35 लाख का कर्ज, नहीं लिया वापस
- दो टीमें कर रहीं हैं एनआरएलएम में हुए अलग-अलग घोटालों की जांच
- घोटाले की परतें खुलने से महकमे में मचा हुआ है हड़कंप
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में हुए 35 लाख के घोटाले की जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। बैंक से लेनदेन का ब्योरा तलब किया है। हालांकि प्राथमिक जांच में घोटाले की पुष्टि हो चुकी है। घोटाले की परत खुलने से महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जिन्हें गाज गिरने का डर सता रहा है।
उपायुक्त एनआरएलएम मनोज कुमार ने बद्रीनाथ सीएलएफ का निरीक्षण कर दस्तावेज की जांच की। जांच में सामने आया था कि सीएलएफ से एक संगठन को करीब 35 लाख रुपये का कर्ज दिया गया है। जबकि उसने कर्ज वापस नहीं किया। इसके अलावा सीएलएफ के बाद ग्राम संगठन को कर्ज देने के लिए पर्याप्त दस्तावेज भी नहीं मिले। इस सीएलएफ से करीब 35 लाख रुपये का भुगतान घोटाले का इशारा कर गया।
मामले की जांच के लिए डीडीओ रचना गुप्ता की अध्यक्षता में तीन सदस्य कमेटी गठित की गई थी। अब घोटाले की जांच तेज हो गई है। कमेटी ने बैंक से सीएलएफ के लेनदेन का ब्योरा मांगा है। ताकि, पता चल सके कि सीएलएफ से किस-किस खाते में पैसा भेजा गया है। साथ ही दिए गए कर्ज कितना वापस मिला।
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- जांच के बाद घोटाले की रकम बढ़ने की संभावना
प्राथमिक जांच में एनआरएलएम के बद्रीनाथ सीएलएफ द्वारा 35 लाख रुपये के घोटाले की बात सामने आई है, लेकिन सूत्रों की मानें तो घोटाले की रकम बढ़ने की संभावना है। टीम को दस्तावेज की शुरुआती जांच में 35 लाख से अधिक भुगतान संदिग्ध नजर आया है।
- कर्ज बिना लौटाए ही बार-बार दिया कर्ज
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बद्रीनाथ सीएलएफ ने समूहों के एक ग्राम संगठन को कर्ज दे दिया। उसने कर्ज वापस नहीं किया। इसके बावजूद सीएलएफ ने कई बार ग्राम संगठन को कर्ज दिया है। इससे वित्तीय अनियमितता साफ झलक रही है। कमेटी की प्राथमिक जांच में घोटाले की पुष्टि हुई है।
- विदुर आउटलेट बनाने में भी हुआ था घोटाला
मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक के एडीओ (आईएसबी) महेश शर्मा ने नमामि गंगे सीएलएफ तैमूरपुर दीपा का निरीक्षण किया था। जांच में पाया गया कि नुमाइश ग्राउंड और विकास भवन में बने आउटलेट के लिए 17-17 यानी 34 लाख रुपये का भुगतान मिशन में तैनात प्रबंधकों ने मौखिक आदेश से ही कराया था। इसकी जांच उपायुक्त वीबी-जी राम जी की अध्यक्षता वाली टीम कर रही है। इस टीम ने भुगतान संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं।
- वर्जन :
बद्रीनाथ सीएलएफ ने नियमों को दरकिनार कर एक ही ग्राम संगठन को कई बार कर्ज दिया है। बैंकों से सीएलएफ के लेनदेन का ब्योरा मांगा गया है। संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। दस्तावेज की जांच और बयान दर्ज होने के बाद ही जांच पूरी होगी। फिलहाल प्राथमिक जांच में घोटाला नजर आ रहा है। - रचना गुप्ता, जिला विकास अधिकारी, बिजनौर
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- दो टीमें कर रहीं हैं एनआरएलएम में हुए अलग-अलग घोटालों की जांच
- घोटाले की परतें खुलने से महकमे में मचा हुआ है हड़कंप
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में हुए 35 लाख के घोटाले की जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। बैंक से लेनदेन का ब्योरा तलब किया है। हालांकि प्राथमिक जांच में घोटाले की पुष्टि हो चुकी है। घोटाले की परत खुलने से महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जिन्हें गाज गिरने का डर सता रहा है।
उपायुक्त एनआरएलएम मनोज कुमार ने बद्रीनाथ सीएलएफ का निरीक्षण कर दस्तावेज की जांच की। जांच में सामने आया था कि सीएलएफ से एक संगठन को करीब 35 लाख रुपये का कर्ज दिया गया है। जबकि उसने कर्ज वापस नहीं किया। इसके अलावा सीएलएफ के बाद ग्राम संगठन को कर्ज देने के लिए पर्याप्त दस्तावेज भी नहीं मिले। इस सीएलएफ से करीब 35 लाख रुपये का भुगतान घोटाले का इशारा कर गया।
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मामले की जांच के लिए डीडीओ रचना गुप्ता की अध्यक्षता में तीन सदस्य कमेटी गठित की गई थी। अब घोटाले की जांच तेज हो गई है। कमेटी ने बैंक से सीएलएफ के लेनदेन का ब्योरा मांगा है। ताकि, पता चल सके कि सीएलएफ से किस-किस खाते में पैसा भेजा गया है। साथ ही दिए गए कर्ज कितना वापस मिला।
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- जांच के बाद घोटाले की रकम बढ़ने की संभावना
प्राथमिक जांच में एनआरएलएम के बद्रीनाथ सीएलएफ द्वारा 35 लाख रुपये के घोटाले की बात सामने आई है, लेकिन सूत्रों की मानें तो घोटाले की रकम बढ़ने की संभावना है। टीम को दस्तावेज की शुरुआती जांच में 35 लाख से अधिक भुगतान संदिग्ध नजर आया है।
- कर्ज बिना लौटाए ही बार-बार दिया कर्ज
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बद्रीनाथ सीएलएफ ने समूहों के एक ग्राम संगठन को कर्ज दे दिया। उसने कर्ज वापस नहीं किया। इसके बावजूद सीएलएफ ने कई बार ग्राम संगठन को कर्ज दिया है। इससे वित्तीय अनियमितता साफ झलक रही है। कमेटी की प्राथमिक जांच में घोटाले की पुष्टि हुई है।
- विदुर आउटलेट बनाने में भी हुआ था घोटाला
मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक के एडीओ (आईएसबी) महेश शर्मा ने नमामि गंगे सीएलएफ तैमूरपुर दीपा का निरीक्षण किया था। जांच में पाया गया कि नुमाइश ग्राउंड और विकास भवन में बने आउटलेट के लिए 17-17 यानी 34 लाख रुपये का भुगतान मिशन में तैनात प्रबंधकों ने मौखिक आदेश से ही कराया था। इसकी जांच उपायुक्त वीबी-जी राम जी की अध्यक्षता वाली टीम कर रही है। इस टीम ने भुगतान संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं।
- वर्जन :
बद्रीनाथ सीएलएफ ने नियमों को दरकिनार कर एक ही ग्राम संगठन को कई बार कर्ज दिया है। बैंकों से सीएलएफ के लेनदेन का ब्योरा मांगा गया है। संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। दस्तावेज की जांच और बयान दर्ज होने के बाद ही जांच पूरी होगी। फिलहाल प्राथमिक जांच में घोटाला नजर आ रहा है। - रचना गुप्ता, जिला विकास अधिकारी, बिजनौर