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सुकरो नदी पर पुल बचाने की कवायद
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
Updated Wed, 27 Jul 2016 12:48 AM IST
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नजीबाबाद/बड़िया। सुकरो नदी पर बने रेलवे पुल को बचाने की कवायद में जुटे रेलवे अधिकारियों के पसीने छूट गए हैं। रेल मजदूर जर्जर हो चुके रेल पुल के पिलरों को बचाने के लिए बोल्डर की नौकी बनाने में जुटे हैं। लोगों का मानना है कि रेल अधिकारी पहले गंभीर हुए होते, तो घटना टल सकती थी।
नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच सुकरो नदी पर बने रेल पुल का एक स्पान (पिलर) 23 जुलाई को तड़के करीब चार बजे जमींदोज हो गया था। ढहे पिलर से जुड़े पिलरों को भी खतरा बढ़ने के साथ रेल पुल कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच ट्रेनों का संचालन बंद है।
मुरादाबाद, नजीबाबाद, अमरोहा, रुड़की, अमरोहा के मजदूरों को रेल पुल बचाने में लगाया गया है। अवैध खनन से सुकरो नदी की साइडों में पानी की तेज धार से हो रहे कटान को रोकने के लिए रेल मजदूर बंदा बनाने तथा पिलरों के सामने नौकी बनाने में लगे हैं। क्षेत्रवासियों परमजीत सिंह, नरेंद्रपाल सिंह, सुशील डुकलान, जेपी रावत एडवोकेट आदि लोगों ने इस काम काे जल्द पूरा करने की मांग की है।
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नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच सुकरो नदी पर बने रेल पुल का एक स्पान (पिलर) 23 जुलाई को तड़के करीब चार बजे जमींदोज हो गया था। ढहे पिलर से जुड़े पिलरों को भी खतरा बढ़ने के साथ रेल पुल कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच ट्रेनों का संचालन बंद है।
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मुरादाबाद, नजीबाबाद, अमरोहा, रुड़की, अमरोहा के मजदूरों को रेल पुल बचाने में लगाया गया है। अवैध खनन से सुकरो नदी की साइडों में पानी की तेज धार से हो रहे कटान को रोकने के लिए रेल मजदूर बंदा बनाने तथा पिलरों के सामने नौकी बनाने में लगे हैं। क्षेत्रवासियों परमजीत सिंह, नरेंद्रपाल सिंह, सुशील डुकलान, जेपी रावत एडवोकेट आदि लोगों ने इस काम काे जल्द पूरा करने की मांग की है।
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