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चीनी मिलों को नहीं चाहिए नए गन्ना केंद्र
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चीनी मिलों को नहीं चाहिए नए गन्ना केंद्र
बिजनौर। इस बार जिले की चीनी मिलों ने एक दूसरे के क्रय केंद्र लेने के लिए विभाग में आवेदन नहीं किया है। हर साल चीनी मिल एक दूसरे का क्षेत्र हथियाने के लिए उसका रकबा मांगते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। लंबे समय बाद ऐसा हुआ है कि मिलों ने एक दूसरे के क्रय केंद्र लेने के लिए आवेदन नहीं किया है।
आमतौर पर चीनी मिल घाटे में नहीं रहती हैं। मुनाफा होने पर मिलों का लालच बढ़ता है। अपने लालच को पूरा करने के लिए चीनी मिल दूसरी मिलों के गन्ना रकबे को देखती रहती हैं। चीनी मिल दूसरी मिलों के गन्ना क्रय केंद्रों को हथियाने के लिए पूरा जोर लगाती हैं। शासन स्तर से मिलकर क्रय केंद्रों को अपनी मिलों में समाहित करा भी लेती हैं। जिन चीनी मिलों के केंद्र कटते हैं, वे अपने केंद्र वापस पाने के लिए शासन में अपील दाखिल करती हैं या फिर दूसरी मिलों के क्रय केंद्रों को कटवाने में लग जाती हैं। बाद में शासन में गन्ना सुरक्षण की बैठक में क्रय केंद्रों का निर्धारण होता है। लेकिन इस बार अजब ही नजारा देखने को मिल रहा है। गन्ने के लगातार बढ़ते रकबे और चीनी के घटते दामों को देखकर मिलों ने अपनी रणनीति ही बदल दी है। इस साल किसी भी मिल ने दूसरी मिल के क्रय केंद्र लेने के लिए आवेदन नहीं किया है। सभी मिल अपने बढ़े रकबे से ही परेशान हैं।
चीनी मिल 2020-21 में मांग पिछले साल रकबा इस साल रकबा क्रय केंद्र
बिजनौर 63 7701 7781 07
धामपुर 252 45179 48608 209
स्योहारा 198 28898 38323 154
नजीबाबाद 51.06 16491 16295 38
बुुंदकी 110.86 26492 29838 72
चांदपुर 81 14785 15211 50
बिलाई 134.42 23965 28602 95
बरकातपुर 126 26810 28715 86
बहादरपुर 112.46 27636 29029 60
योग 1122.80 221753 247389 771
नोट : गन्ने की मांग लाख क्विंटल में और रकबा हेक्टेयर में है।
नहीं किया आवेदन
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार चीनी मिलों ने दूसरी मिलों के क्रय केंद्रों के लिए आवेदन नहीं किया है। मिलों का संचालन समय से शुरू कराने की तैयारी की जा रही है।
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बिजनौर। इस बार जिले की चीनी मिलों ने एक दूसरे के क्रय केंद्र लेने के लिए विभाग में आवेदन नहीं किया है। हर साल चीनी मिल एक दूसरे का क्षेत्र हथियाने के लिए उसका रकबा मांगते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। लंबे समय बाद ऐसा हुआ है कि मिलों ने एक दूसरे के क्रय केंद्र लेने के लिए आवेदन नहीं किया है।
आमतौर पर चीनी मिल घाटे में नहीं रहती हैं। मुनाफा होने पर मिलों का लालच बढ़ता है। अपने लालच को पूरा करने के लिए चीनी मिल दूसरी मिलों के गन्ना रकबे को देखती रहती हैं। चीनी मिल दूसरी मिलों के गन्ना क्रय केंद्रों को हथियाने के लिए पूरा जोर लगाती हैं। शासन स्तर से मिलकर क्रय केंद्रों को अपनी मिलों में समाहित करा भी लेती हैं। जिन चीनी मिलों के केंद्र कटते हैं, वे अपने केंद्र वापस पाने के लिए शासन में अपील दाखिल करती हैं या फिर दूसरी मिलों के क्रय केंद्रों को कटवाने में लग जाती हैं। बाद में शासन में गन्ना सुरक्षण की बैठक में क्रय केंद्रों का निर्धारण होता है। लेकिन इस बार अजब ही नजारा देखने को मिल रहा है। गन्ने के लगातार बढ़ते रकबे और चीनी के घटते दामों को देखकर मिलों ने अपनी रणनीति ही बदल दी है। इस साल किसी भी मिल ने दूसरी मिल के क्रय केंद्र लेने के लिए आवेदन नहीं किया है। सभी मिल अपने बढ़े रकबे से ही परेशान हैं।
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चीनी मिल 2020-21 में मांग पिछले साल रकबा इस साल रकबा क्रय केंद्र
बिजनौर 63 7701 7781 07
धामपुर 252 45179 48608 209
स्योहारा 198 28898 38323 154
नजीबाबाद 51.06 16491 16295 38
बुुंदकी 110.86 26492 29838 72
चांदपुर 81 14785 15211 50
बिलाई 134.42 23965 28602 95
बरकातपुर 126 26810 28715 86
बहादरपुर 112.46 27636 29029 60
योग 1122.80 221753 247389 771
नोट : गन्ने की मांग लाख क्विंटल में और रकबा हेक्टेयर में है।
नहीं किया आवेदन
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार चीनी मिलों ने दूसरी मिलों के क्रय केंद्रों के लिए आवेदन नहीं किया है। मिलों का संचालन समय से शुरू कराने की तैयारी की जा रही है।
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