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‘करो व सीखो’ पर चलकर आगे बढ़ेंगे छात्र

Fri, 07 Aug 2020 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2020 11:39 PM IST
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Students starting 'do and learn' will proceed
‘करो व सीखो’ पर चलकर आगे बढ़ेंगे छात्र
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बिजनौर। नई शिक्षा नीति में प्रयोगात्मक पहलू पर जोर है। शिक्षा को नौकरी से जोड़ने वाली बनाने की कोशिश है। कहा जा रहा है कि छात्रों को ट्यूशन पढ़ने की जरूरत नहीं होगी। छात्र करो व सीखो की लाइन पर आगे बढ़ेगा। इसको लेकर शिक्षाविदों का अपना अपना नजरिया है।
नई शिक्षा नीति में प्राथमिक से लेकर उच्च स्तर तक बदलाव किया गया है। इसमें छात्र को प्रयोगात्मक ज्ञान देने की कोशिश है। कहा जा रहा है कि इसके लागू होने के बाद विद्यार्थी स्कूल आएगा, छात्र को रटो वाली प्रवृत्ति से हटाकर करके देखो की ओर ले जाया जाएगा। छात्र की योग्यता का आधार केवल किताबी ज्ञान नहीं होगा। छात्रों को विषय से जुड़े प्रोजेक्ट का प्रस्तुतीकरण करके आगे बढ़ना होगा। छात्र सीमाओं में बंधकर नहीं रहेगा। रुचि के विषय लेकर बुद्धि चातुर्य का प्रदर्शन करेगा। कहा जा रहा है कि इससे छात्र की ट्यूशन की प्रवृत्ति भी कम होगी। नई शिक्षा नीति की घोषणा के बाद से ही शिक्षा क्षेत्र के लोग नीति का राष्ट्रीय परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन करने में लगे हैं।
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ईमानदारी से क्रियान्वयन हो
एसबीडी कॉलेज धामपुर में समाजशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. सारिका शर्मा का कहना है कि नई शिक्षा नीति में छात्र कक्षा में आएगा। वह नियमित पढ़ेगा। इससे छात्र को विषय स्पष्ट होगा। नई शिक्षा नीति गुणवत्तापूर्ण तथ्यात्मक शिक्षा नीति की द्योतक है। प्रयोगात्मक आधारित होने से छात्र को ट्यूशन की जरूरत ही नहीं रहेगी। जरूरत इस बात की है कि नीति का ईमानदारी से क्रियान्वयन हो।
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भविष्य सुधारने को सीखने पर जोर
एमडीएस इंटर कॉलेज नजीबाबाद के प्रधानाचार्य अनुपम माहेश्वरी के अनुसार नई शिक्षा नीति में छात्र को रुचि का विषय मिलेगा। छात्र को सफलता के लिए स्वाध्याय करना होगा। रोजगारपरक शिक्षा होने से छात्र अपना भविष्य सुधारने के लिए करके सीखने पर जोर देगा। कहा कि छात्र ट्यूशन से रटना सीखता है। नीति छात्रों के लिए वरदान साबित होगी।
पाठ्यक्रम कम होने का लाभ मिलेगा
लोकमणि मेमोरियल पीजी कॉलेज स्योहारा के प्राचार्य एके मिश्रा का कहना है कि नई शिक्षा नीति में छात्रों का पाठ्यक्रम कम हो जाएगा। इसमें छात्र के स्किल डेवलपमेंट पर जोर होने से छात्र का ट्यूशन से खुद ही मोह भंग हो जाएगा। कहा कि पाठ्यक्रम में प्रयोगात्मक कार्य बढ़ने से छात्र का दृष्टिकोण बदलेगा।
ट्यूशन को स्टेटस सिंबल न बनाएं
एसबीडी कॉलेज धामपुर में गृह विज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कनक चौहान के मुताबिक नई शिक्षा नीति बदली है। इसमें प्रयोगात्मक पहलू छात्रों की पढ़ाई में रुचि बढ़ाएगा। साथ ही कहा कि ट्यूशन को लेकर अभिभावकों व छात्रों को अपनी सोच बदलनी होगी। ट्यूशन को स्टेटस सिंबल न बनाएं।
कोर्स पूरा होने पर ट्यूशन की जरूरत नहीं
पब्लिक इंटर कॉलेज सहसपुर के प्रधानाचार्य योगेंद्र कुमार का कहना है कि छात्र स्कूलों में कक्षाएं नहीं चलने पर अपना कोर्स पूरा करने के लिए ट्यूशन पढ़ता है। नई शिक्षा नीति में छात्र को कक्षा में नियमित आना है। शिक्षक के साथ फील्ड में जाकर प्रेक्टिकल करना है। करो तथा सीखो से आगे बढ़ना है। कोर्स भी समय से पूरा होगा।

नीति धरातल पर उतरे, तब ही लाभ
एचसीएम इंटर कॉलेज कासमपुर गढ़ी के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य मुखराम सिंह का कहना है कि शिक्षा नीति ग्रामीण छात्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बननी चाहिए। ट्यूशन छात्रों की आदत बन गई है। दिल्ली में शिक्षा नीति बदली थी। परंतु धरातल पर सफल नहीं रही। जरूरत है नियमों को जमीन पर उतारने की। तभी छात्रों को फायदा पहुंच सकता है।
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