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सरकारी स्कूलों के छात्र भी हुए हाईटेक
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सरकारी स्कूलों के छात्र भी हुए हाईटेक
बिजनौर। शिक्षा ही सर्वांगीण विकास का माध्यम है। कोरोनाकाल में शिक्षण संस्थान बंद होने से छात्रों की पढ़ाई भी बाधित हो गई थी। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा ही पढ़ाई का माध्यम बनी। सरकारी व निजी विद्यालय बंद होने के दौरान शिक्षकों ने छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर या ऑनलाइन, जूम आदि तकनीकी माध्यम पढ़ाई कराई। परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प कोरोनाकाल में चुना गया। प्रारंभ में उक्त व्यवस्था को धरातल पर उतारने में कठिनाई आई, लेकिन आज यह स्कूल भी हाईटेक हो रहे हैं। इनमें भी स्मार्ट क्लासों के संचालन पर जोर दिया जा रहा है।
कोरोना काल के बाद खुले शिक्षण संस्थान नियमों के साथ खुलने लगे। वर्तमान में कोरोना का असर शून्य होने पर काफी नियमों में ढील हुई है। निजी स्कूलों में पहले भी ऑनलाइन व स्मार्ट क्लास का प्रयोग होता था, लेकिन सरकारी विद्यालयों के छात्र इस व्यवस्था से काफी दूर थे। कोरोनाकाल में व्हाट्सएप अन्य माध्यमों से पढ़ाई कराई गई। परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों के करीब 30 प्रतिशत छात्रों के सामने संसाधनों का अभाव ेबड़ी बाधा बना। ऐसे छात्र व उनके अभिभावकों के पास इंटरनेट मोबाइल नहीं होने से वह पढ़ाई करने में असमर्थ रहे। इन छात्रों को जोड़ने के लिए गांव के अन्य सहपाठी छात्रों के साथ जोड़ा गया या गांव के अन्य व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर स्कूल का वर्क भेजा गया। यही नहीं बेसिक विभाग ने स्टाफ को स्कूलों में बुलाकर ऐसे छात्रों को वर्कशीट बनाकर घर घर भिजवाई गई, ताकि छात्र पढ़ाई से जुड़े रहे।
मोहल्ला क्लास ने जगाए रखी अलख
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 40 प्रतिशत छात्र ऑनलाइन पढ़ाई से नहीं जुड़ पाए। ऐसे छात्रों की पढ़ाई के लिए बेसिक विभाग ने मोहल्ला क्लास का संचालन किया। शिक्षक-शिक्षिकाएं गांवों में एक स्थान पर कुछ बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराई। बेसिक व माध्यमिक विभाग व सरकार की ओर से बच्चों को जोड़ने के लिए टीवी और रेडियो पर भी कई कार्यक्रम संचालित किए गए थे। इन पर आने वाले कार्यक्रमों के लिंक व्हट्सएप ग्रुप पर भेजे जाते थे।
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- ग्रामीण अंचल के बच्चों ने जानी तकनीकी
मजबूरी ही सही, लेकिन कोरोनाकाल में तकनीकी का आविष्कार हुआ है। इन संसाधनों से शतप्रतिशत छात्र तो नहीं जुड़ पाए, लेकिन अधिकांश छात्र ऑनलाइन पढ़ाई का महत्व जान गए। आने वाले समय के लिए यह व्यवस्था नियमित व्यवस्था बन गई है।
कोरोनाकाल में सब कुछ पटरी से उतर गया था, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई एक बड़ा माध्यम निकलकर सामने आया है। आज परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों के छात्र भी ऑनलाइन पढ़ाई के बारे में जान गए हैं और उसका प्रयोग भी करना सीख गए हैं।
-ताजवीर सिंह शिक्षक
-----
स्कूल बंद होने पर ऑनलाइन पढ़ाई अच्छा माध्यम बनी है। उस समय और आज भी शिक्षकों के नवाचार प्रशिक्षण भी ऑनलाइन होने लगे हैं। इससे समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है। प्रारंभ में संसाधन कम होने के परेशानी सामने आई थी।
-संजू राणा, शिक्षिका
वर्जन
कोरोनाकाल में पढ़ाई में बड़ा बदलाव आया है। काफी छात्रों के पास संसाधन न होने से परेशानी हुई थी, लेकिन उन्हें सहपाठी के साथ जोड़कर या मोहल्ला क्लास के माध्यम से शिक्षा से जोड़े रखा। क्लास में पढ़ने के दौरान शिक्षक के भाव से बच्चे सीखते हैं। उस संकट के दौरा में ऑनलाइन पढ़ाई के माध्यम से शिक्षा से जुड़े रहे।
-जयकरन यादव, बीएसए।
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बिजनौर। शिक्षा ही सर्वांगीण विकास का माध्यम है। कोरोनाकाल में शिक्षण संस्थान बंद होने से छात्रों की पढ़ाई भी बाधित हो गई थी। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा ही पढ़ाई का माध्यम बनी। सरकारी व निजी विद्यालय बंद होने के दौरान शिक्षकों ने छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर या ऑनलाइन, जूम आदि तकनीकी माध्यम पढ़ाई कराई। परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प कोरोनाकाल में चुना गया। प्रारंभ में उक्त व्यवस्था को धरातल पर उतारने में कठिनाई आई, लेकिन आज यह स्कूल भी हाईटेक हो रहे हैं। इनमें भी स्मार्ट क्लासों के संचालन पर जोर दिया जा रहा है।
कोरोना काल के बाद खुले शिक्षण संस्थान नियमों के साथ खुलने लगे। वर्तमान में कोरोना का असर शून्य होने पर काफी नियमों में ढील हुई है। निजी स्कूलों में पहले भी ऑनलाइन व स्मार्ट क्लास का प्रयोग होता था, लेकिन सरकारी विद्यालयों के छात्र इस व्यवस्था से काफी दूर थे। कोरोनाकाल में व्हाट्सएप अन्य माध्यमों से पढ़ाई कराई गई। परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों के करीब 30 प्रतिशत छात्रों के सामने संसाधनों का अभाव ेबड़ी बाधा बना। ऐसे छात्र व उनके अभिभावकों के पास इंटरनेट मोबाइल नहीं होने से वह पढ़ाई करने में असमर्थ रहे। इन छात्रों को जोड़ने के लिए गांव के अन्य सहपाठी छात्रों के साथ जोड़ा गया या गांव के अन्य व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर स्कूल का वर्क भेजा गया। यही नहीं बेसिक विभाग ने स्टाफ को स्कूलों में बुलाकर ऐसे छात्रों को वर्कशीट बनाकर घर घर भिजवाई गई, ताकि छात्र पढ़ाई से जुड़े रहे।
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मोहल्ला क्लास ने जगाए रखी अलख
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 40 प्रतिशत छात्र ऑनलाइन पढ़ाई से नहीं जुड़ पाए। ऐसे छात्रों की पढ़ाई के लिए बेसिक विभाग ने मोहल्ला क्लास का संचालन किया। शिक्षक-शिक्षिकाएं गांवों में एक स्थान पर कुछ बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराई। बेसिक व माध्यमिक विभाग व सरकार की ओर से बच्चों को जोड़ने के लिए टीवी और रेडियो पर भी कई कार्यक्रम संचालित किए गए थे। इन पर आने वाले कार्यक्रमों के लिंक व्हट्सएप ग्रुप पर भेजे जाते थे।
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- ग्रामीण अंचल के बच्चों ने जानी तकनीकी
मजबूरी ही सही, लेकिन कोरोनाकाल में तकनीकी का आविष्कार हुआ है। इन संसाधनों से शतप्रतिशत छात्र तो नहीं जुड़ पाए, लेकिन अधिकांश छात्र ऑनलाइन पढ़ाई का महत्व जान गए। आने वाले समय के लिए यह व्यवस्था नियमित व्यवस्था बन गई है।
कोरोनाकाल में सब कुछ पटरी से उतर गया था, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई एक बड़ा माध्यम निकलकर सामने आया है। आज परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों के छात्र भी ऑनलाइन पढ़ाई के बारे में जान गए हैं और उसका प्रयोग भी करना सीख गए हैं।
-ताजवीर सिंह शिक्षक
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स्कूल बंद होने पर ऑनलाइन पढ़ाई अच्छा माध्यम बनी है। उस समय और आज भी शिक्षकों के नवाचार प्रशिक्षण भी ऑनलाइन होने लगे हैं। इससे समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है। प्रारंभ में संसाधन कम होने के परेशानी सामने आई थी।
-संजू राणा, शिक्षिका
वर्जन
कोरोनाकाल में पढ़ाई में बड़ा बदलाव आया है। काफी छात्रों के पास संसाधन न होने से परेशानी हुई थी, लेकिन उन्हें सहपाठी के साथ जोड़कर या मोहल्ला क्लास के माध्यम से शिक्षा से जोड़े रखा। क्लास में पढ़ने के दौरान शिक्षक के भाव से बच्चे सीखते हैं। उस संकट के दौरा में ऑनलाइन पढ़ाई के माध्यम से शिक्षा से जुड़े रहे।
-जयकरन यादव, बीएसए।