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ड्रोन से किया खेत में नेनो यूरिया का छिड़काव
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बिजनौर में गन्ने के खेत में ड्रोन से किया गया यूरिया का छिड़काव।
- फोटो : BIJNOR
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ड्रोन से किया गन्ने के खेत में यूरिया का छिड़काव
बिजनौर। किसानों की आय बढ़ाने और खर्च करने के लिए लगातार जोर दिया जा रहा है। खाद के बढ़ते दाम से खेती करना महंगा हो रहा है। ऐसे में खाद की खेतों में मात्रा कम करने के लिए यूरिया का तरल पदार्थ किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी क्रम में इफ्को की ओर से मंगलवार को कई गांवों में पहुंचकर किसानों को गन्ना खेतों में ड्रोन से नेनो यूरिया का छिड़काव करके दिखाया गया।
सहकारी संस्था इंडियन फार्मर फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा ड्रोन से नेनो यूरिया का स्प्रे कराया गया। इफ्को की ओर से ग्राम रामबाग, कम्भौर और मंडावली में ड्रोन की मदद से गन्ने की फसल पर नेनो यूरिया का छिड़काव कराया गया। मुख्य क्षेत्र प्रबंधक शेलेंद्र सिंह ने बताया कि इफ्को की ओर से तकनीक पर आधारित नेनो यूरिया विकसित की गई है, जोकि पारंपरिक यूरिया से सस्ता है तथा पर्यावरण अनुकूल है। साथ ही इसके प्रयोग से किसानों को आर्थिक रूप से बचत होती है। नेनो यूरिया का प्रयोग चार एमएल प्रति लीटर गन्ने में पहला छिड़काव तथा दूसरा छिड़काव पहले छिड़काव से 15 दिन बाद किया जा सकता है। इफ्को के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि नेनो यूरिया की उपयोगिता 86 प्रतिशत तक पौधो द्वारा उपयोग की जाती। परंपरागत रूप से खाद का प्रयोग की जाने वाली यूरिया की उपयोगिता मात्र 25 से 30 तक ही हो पाती है।
गन्ने में पहले पानी के बाद दानेदार यूरिया का उपयोग किया जाए। गन्ना फसल को दूसरे और तीसरे पानी पर नेनो यूरिया का स्प्रे किया जाए। इससे किसान का खर्च कम होगा।
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-यशपाल सिंह, डीसीओ
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बिजनौर। किसानों की आय बढ़ाने और खर्च करने के लिए लगातार जोर दिया जा रहा है। खाद के बढ़ते दाम से खेती करना महंगा हो रहा है। ऐसे में खाद की खेतों में मात्रा कम करने के लिए यूरिया का तरल पदार्थ किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी क्रम में इफ्को की ओर से मंगलवार को कई गांवों में पहुंचकर किसानों को गन्ना खेतों में ड्रोन से नेनो यूरिया का छिड़काव करके दिखाया गया।
सहकारी संस्था इंडियन फार्मर फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा ड्रोन से नेनो यूरिया का स्प्रे कराया गया। इफ्को की ओर से ग्राम रामबाग, कम्भौर और मंडावली में ड्रोन की मदद से गन्ने की फसल पर नेनो यूरिया का छिड़काव कराया गया। मुख्य क्षेत्र प्रबंधक शेलेंद्र सिंह ने बताया कि इफ्को की ओर से तकनीक पर आधारित नेनो यूरिया विकसित की गई है, जोकि पारंपरिक यूरिया से सस्ता है तथा पर्यावरण अनुकूल है। साथ ही इसके प्रयोग से किसानों को आर्थिक रूप से बचत होती है। नेनो यूरिया का प्रयोग चार एमएल प्रति लीटर गन्ने में पहला छिड़काव तथा दूसरा छिड़काव पहले छिड़काव से 15 दिन बाद किया जा सकता है। इफ्को के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि नेनो यूरिया की उपयोगिता 86 प्रतिशत तक पौधो द्वारा उपयोग की जाती। परंपरागत रूप से खाद का प्रयोग की जाने वाली यूरिया की उपयोगिता मात्र 25 से 30 तक ही हो पाती है।
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गन्ने में पहले पानी के बाद दानेदार यूरिया का उपयोग किया जाए। गन्ना फसल को दूसरे और तीसरे पानी पर नेनो यूरिया का स्प्रे किया जाए। इससे किसान का खर्च कम होगा।
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-यशपाल सिंह, डीसीओ