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रसायन का स्प्रे रोकेगा खेतों में हाथियों का मूवमेंट

Sat, 06 Jun 2020 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2020 12:03 AM IST
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Spray of chemicals will prevent movement of elephants in the fields
अमानगढ़ वन रेंज में वाटर होल में अठखेलियाँ करता हाथी का झुंड। - फोटो : BIJNOR
रसायन का स्प्रे रोकेगा खेतों में हाथियों का मूवमेंट
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बिजनौर। केरल में हथिनी की हत्या के बाद वन विभाग चौकस हो गया है। अब गजराज और इंसानों का टकराव रोकने के लिए वन विभाग अब बैरियर का काम करेगा। हाथियों को वनों में रोकने के लिए उनके मूवमेंट वाले गांवों में फसलों पर रसायन का स्प्रे किया जाएगा। एक बार स्प्रे होने पर गजराज गंध के कारण 12 से 15 दिन तक खेतों की ओर रुख नहीं करेंगे। इसके लिए गांवों को चिह्नित किया जाएगा।
केरल में गर्भवती हथिनी की इंसानों के हाथों मौत ने सभी को हिलाकर रख दिया है। जिले में भी बढ़ापुर क्षेत्र में पिछले साल ऐसा मामला सामने आया था। एक हाथी ने खेतों की ओर आने की कोशिश की तो गांव वालों ने हाथी की गोली मारकर हत्या की और उसके बाद पावर कटर से हाथी के शव के टुकड़े कर नदी में बहा दिया। हाथी के पैर का एक टुकड़ा जंगल में मिलने पर मामले का खुलासा हुआ था। इसके तीन महीने पहले बढ़ापुर में ही एक हाथी की खेतों में मौत हो गई थी। हाथी के मुंह में पत्थर से बने घाव मिले थे। वन विभाग के अफसरों ने माना था कि गन्ने को खाते वक्त उसकी जड़ में आने वाले पत्थर के चबाने पर मुंह में बने घाव के इंफेक्शन से हाथी की मौत हुई थी। वनों में हाथियों के खाने के लिए अपार वनस्पति संपदा है, लेकिन खेतों में खड़ी गन्ने की फसल, केले की खेती हाथियों को गांवों की ओर खींच ही लाती है। खेतों में जाकर हाथी जितनी फसल खाते हैं उससे कई गुना ज्यादा फसल को वे तहस नहस कर देते हैं। इस पर इंसानों और गजराज में भिड़ंत भी होती है। इस भिड़ंत को रोकने के लिए वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे गांवों को चिह्नित किया जा रहा है जो अमानगढ़ वन रेंज के आसपास हैं और वहां पर हाथियों की मूवमेंट ज्यादा है। ऐसे गांवों में फसलों पर रसायनों का स्प्रे किया जाएगा। इस रसायन से ऐसी गंध आएंगी जो हाथियों को बिल्कुल पसंद नहीं है और वह इस गंध से दूर रहना पसंद करते हैं। एक बार रसायन का स्प्रे करने पर इसका असर 12 से 15 दिन तक रहता है।
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अमानगढ़ रेंज में 65 से ज्यादा हाथी
अमानगढ़ वन रेंज में 65 से ज्यादा हाथी रहते हैं। इसके अलावा जिम कार्बेट के हाथी भी अमानगढ़ में आते रहते हैं। अमानगढ़ वन रेंज में इन हाथियों के खाने के लिए काफी वनस्पति है। यहां बने वाटर होल के पानी में हाथियों के बड़े बड़े झुंड अठखेलियां करते हैं। वन्य जीवों के लिए इंसानों के खेत भी जंगल जैसे ही हैं। ऐसे में उनमें टकराव आम बात हो जाती है। जिले में जनवरी और दिसंबर में गुलदार ने छह लोगों को मार डाला था। पिछले साल हाथी ने भी एक व्यक्ति को जंगल में पटक कर मार डाला था।
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टकराव को टालना जरूरी : डीएफओ
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के मुताबिक हाथियों की मूवमेंट वाले एरिया पर पूरी नजर रखी जाती है। अमानगढ़ वन रेंज के पास के गांवों के खेतों में रसायन का छिड़काव करने की योजना बनाई गई है। हाथी खेतों की ओर नहीं आएंगे तो उनमें टकराव भी नहीं होगा।
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